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2 घण्टे हुई बारिस से मिली किसानो को राहत-City
Updated Sun, 27 Aug 2017 12:54 AM IST
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खरीफ के लिए आसमान से बरसा अमृत
दो घंटे हुई बारिश ने उमस भरी गर्मी से दी राहत
अमर उजाला ब्यूरो
बबीना।
शनिवार दोपहर हुई झमाझम बारिश से खरीफ की फसलों के लिए अमृत का काम किया है। बारिश ने होने से सूखने के कगार पर पहुंची फसलों के बचने की उम्मीद जाग गई है। अगर पांच-सात दिन ऐसे ही बारिश हो जाए तो खरीफ की फसलों का लाभ किसानों को मिल जाएगा। फिलहाल बारिश ने उमस भरी गर्मी के मौसम से तो राहत दे ही दी है।
सावन में बरसात का न होने का मतलब सूखा पड़ना माना जाता है। इसका असर भी दिख रहा है। क्षेत्र के अधिकतर कुएं, तालाब और नदियां सूखे पड़े हैं। शुरुआत में ठीकठाक बारिश होने के कारण किसानों ने खरीफ की फसलों की बुआई कर दी थी, लेकिन फिर बारिश न होने के कारण फसलें पीली पड़ने लगी थी। खेतों मेें खरीफ की फसलें बाजरा, मक्का, मूंगफली, ज्वार, अरहर, गन्ना आदि की फसलें पानी न मिलने के कारण खराब हो रही थीं। शनिवार को हुई बारिश ने इस फसलों के फिर से तैयार होने की उम्मीद बढ़ा दी है।
मानपुर गांव निवासी किसान सुरेंद्र राजपूत ने बताया कुछ दिन और बारिश हो जाए तो फसलें फिर से जी उठेंगी। लहर ठकुरपुरा के किसान रामकुमार यादव का कहना है कि बारिश न होने से फसलें पीली पड़ गई हैं। अभी और बारिश की दरकार है, तभी फसलें बच पाएंगी। पुरा गांव निवासी प्रीतम सिंह ने बताया कि अगर और बारिश नहीं हुई तो फसलें खराब हो जाएंगी और किसान कर्ज के बोझ तले दब जाएगा।
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दो घंटे हुई बारिश ने उमस भरी गर्मी से दी राहत
अमर उजाला ब्यूरो
बबीना।
शनिवार दोपहर हुई झमाझम बारिश से खरीफ की फसलों के लिए अमृत का काम किया है। बारिश ने होने से सूखने के कगार पर पहुंची फसलों के बचने की उम्मीद जाग गई है। अगर पांच-सात दिन ऐसे ही बारिश हो जाए तो खरीफ की फसलों का लाभ किसानों को मिल जाएगा। फिलहाल बारिश ने उमस भरी गर्मी के मौसम से तो राहत दे ही दी है।
सावन में बरसात का न होने का मतलब सूखा पड़ना माना जाता है। इसका असर भी दिख रहा है। क्षेत्र के अधिकतर कुएं, तालाब और नदियां सूखे पड़े हैं। शुरुआत में ठीकठाक बारिश होने के कारण किसानों ने खरीफ की फसलों की बुआई कर दी थी, लेकिन फिर बारिश न होने के कारण फसलें पीली पड़ने लगी थी। खेतों मेें खरीफ की फसलें बाजरा, मक्का, मूंगफली, ज्वार, अरहर, गन्ना आदि की फसलें पानी न मिलने के कारण खराब हो रही थीं। शनिवार को हुई बारिश ने इस फसलों के फिर से तैयार होने की उम्मीद बढ़ा दी है।
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मानपुर गांव निवासी किसान सुरेंद्र राजपूत ने बताया कुछ दिन और बारिश हो जाए तो फसलें फिर से जी उठेंगी। लहर ठकुरपुरा के किसान रामकुमार यादव का कहना है कि बारिश न होने से फसलें पीली पड़ गई हैं। अभी और बारिश की दरकार है, तभी फसलें बच पाएंगी। पुरा गांव निवासी प्रीतम सिंह ने बताया कि अगर और बारिश नहीं हुई तो फसलें खराब हो जाएंगी और किसान कर्ज के बोझ तले दब जाएगा।
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