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झटका : सहकारी बैंक का 15 करोड़ रुपये हुआ एनपीए
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झांसी। सहकारी बैंक पर एनपीए (नॉन परफार्मिंग एसेट) का भार लगातार बढ़ता जा रहा। पिछले वर्ष का नौ करोड़ रुपये एनपीए में डाला जा चुका है। वहीं, इस बार भी कोविड के असर से इसका बढ़ना तय है। अब तक के आंकड़ों के मुताबिक चालू वित्तीय वर्ष में करीब 15 करोड़ रुपये का ऋण एनपीए हो चुका।
सहकारी समिति सदस्यों को यह बैंक ऋण देते हैं। किसानों के बीच केसीसी समेत फसल, कृषि उपकरण एवं अन्य के ऋण भी दिए जाते हैं। सात फीसदी ब्याज के साथ कर्जधारक को ऋण लौटना होता है। इसे समय पर लौटा देने वालों को सिर्फ तीन फीसदी ब्याज ही देना होता है। जबकि चार प्रतिशत ब्याज सरकार सब्सिडी के तौर पर देती है। इस तरह बेहद मामूली ब्याज दर पर यह ऋण मिलता है। लेकिन इसके बावजूद ज्यादातर कर्जधारक ऋण लौटाने में दिलचस्पी नहीं दिखाते। सहकारी बैंक के अंतिम आंकड़ों के मुताबिक 929.73 लाख रुपये एक वर्ष में एनपीए में डाला जा चुका। बबीना शाखा ने 451.01 लाख रुपये ऋण दिया, इनमें 139.17 लाख एनपीए हो गया। गरौठा शाखा ने 1022.16 लाख ऋण दिया, जिसमें 236.53 लाख ऋण एनपीए हो गया। नंदनपुरा शाखा ने 531.84 लाख ऋण दिए, इसमें 116.55 लाख रुपये एनपीए हो गया। बामौर शाखा ने 663 लाख ऋण दिए। यहां भी 80 लाख रुपये बैंक को नहीं लौटाए गए। कोविड के चलते वसूली भी करीब छह माह ठप रही। इस तरह करीब 15 करोड़ एनपीए हो चुका। आखिरी तिमाही परिणाम आने पर एनपीए का भार बढ़ना तय है।
वसूली में नहीं हो पाती सख्ती
सहकारी बैंक दरियादिल अंदाज में ऋण तो बांटते हैं लेकिन, कड़ाई से वसूली नहीं कर पाते। सहकारी बैंकों से अधिकांश ऋण राजनीतिक दखल के चलते ही मिलते हैं। ऐसे में वसूली के लिए जमकर कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। सरकार ने एनपीए होने वाले ऋणों की वसूली के लिए कुर्की जैसी कार्रवाई पर कई वर्ष पहले ही रोक लगा दी। बकाएदारों को सिर्फ नोटिस ही जारी की जा सकती है। मिलीभगत करके गलत पते पर कर्ज लेकर उसे हड़प कर लिया जाता है। ऐसे में नोटिस भी गलत पते पर ही जाती रहती है।
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इन शाखाओं में सबसे सर्वाधिक एनपीए (लाख में)
बबीना 136.43
गरौठा 128.85
नंदनपुरा 116.55
झांसी 163.41
कोविड के चलते वसूली पर प्रतिकूल असर पड़ा है। हालांकि शाखाओं के माध्यम से एनपीए वसूलने के निर्देश दिए गए हैं। नंदकुमार, महाप्रबंधक, जिला सहकारी बैंक।
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सहकारी समिति सदस्यों को यह बैंक ऋण देते हैं। किसानों के बीच केसीसी समेत फसल, कृषि उपकरण एवं अन्य के ऋण भी दिए जाते हैं। सात फीसदी ब्याज के साथ कर्जधारक को ऋण लौटना होता है। इसे समय पर लौटा देने वालों को सिर्फ तीन फीसदी ब्याज ही देना होता है। जबकि चार प्रतिशत ब्याज सरकार सब्सिडी के तौर पर देती है। इस तरह बेहद मामूली ब्याज दर पर यह ऋण मिलता है। लेकिन इसके बावजूद ज्यादातर कर्जधारक ऋण लौटाने में दिलचस्पी नहीं दिखाते। सहकारी बैंक के अंतिम आंकड़ों के मुताबिक 929.73 लाख रुपये एक वर्ष में एनपीए में डाला जा चुका। बबीना शाखा ने 451.01 लाख रुपये ऋण दिया, इनमें 139.17 लाख एनपीए हो गया। गरौठा शाखा ने 1022.16 लाख ऋण दिया, जिसमें 236.53 लाख ऋण एनपीए हो गया। नंदनपुरा शाखा ने 531.84 लाख ऋण दिए, इसमें 116.55 लाख रुपये एनपीए हो गया। बामौर शाखा ने 663 लाख ऋण दिए। यहां भी 80 लाख रुपये बैंक को नहीं लौटाए गए। कोविड के चलते वसूली भी करीब छह माह ठप रही। इस तरह करीब 15 करोड़ एनपीए हो चुका। आखिरी तिमाही परिणाम आने पर एनपीए का भार बढ़ना तय है।
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वसूली में नहीं हो पाती सख्ती
सहकारी बैंक दरियादिल अंदाज में ऋण तो बांटते हैं लेकिन, कड़ाई से वसूली नहीं कर पाते। सहकारी बैंकों से अधिकांश ऋण राजनीतिक दखल के चलते ही मिलते हैं। ऐसे में वसूली के लिए जमकर कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। सरकार ने एनपीए होने वाले ऋणों की वसूली के लिए कुर्की जैसी कार्रवाई पर कई वर्ष पहले ही रोक लगा दी। बकाएदारों को सिर्फ नोटिस ही जारी की जा सकती है। मिलीभगत करके गलत पते पर कर्ज लेकर उसे हड़प कर लिया जाता है। ऐसे में नोटिस भी गलत पते पर ही जाती रहती है।
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इन शाखाओं में सबसे सर्वाधिक एनपीए (लाख में)
बबीना 136.43
गरौठा 128.85
नंदनपुरा 116.55
झांसी 163.41
कोविड के चलते वसूली पर प्रतिकूल असर पड़ा है। हालांकि शाखाओं के माध्यम से एनपीए वसूलने के निर्देश दिए गए हैं। नंदकुमार, महाप्रबंधक, जिला सहकारी बैंक।