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जीआईसी में बच्चे कम शिक्षक ज्यादा-Dehat

Mon, 05 Jun 2017 08:51 PM IST
Updated Mon, 05 Jun 2017 08:51 PM IST
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जीआईसी में बच्चे कम शिक्षक ज्यादा-Dehat
राजकीय इंटर कॉलेजों में विद्यार्थी कम, शिक्षक ज्यादा
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सब हेड: माध्यमिक शिक्षा विभाग ने शासन को भेजी रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
शासन ने राजकीय इंटर कॉलेजों में छात्रांकन और तैनात शिक्षकों की संख्या मांगी है। जीआईसी झांसी व सूरज प्रसाद बालिका इंटर कॉलेज में छात्रांकन कम के अनुपात में शिक्षकों की संख्या कहीं अधिक पाई गई। यही स्थिति अन्य राजकीय इंटर कॉलेजों की भी है। यह रिपोर्ट निदेशालय को भेज दी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार कई राजकीय इंटर कॉलेजों में पिछले वर्षों में छात्रांकन काफी कम हुआ है, जबकि छात्रांकन के अनुपात में शिक्षकों की तैनाती कहीं ज्यादा है। शासन की भेजी रिपोर्ट में महानगर के राजकीय इंटर कॉलेज में कक्षा छह से 10 तक में 185 विद्यार्थी है, इंटर में कक्षा 11 और 12 में 589 विद्यार्थी है, जबकि यहां नौ प्रवक्ता और 22 सहायक अध्यापक तैनात है। सूरज प्रसाद बालिका इंटर कॉलेज में कक्षा छह से दस तक में 400 छात्राएं है, कक्षा 11 व 12 में 374 बालिकाएं है, जबकि यहां प्रवक्ता छह और 23 सहायक अध्यापक है। बबीना राजकीय बालिका इंटर कालेज में 434 छात्राओं में पांच प्रवक्ता और 12 सहायक अध्यापक है। राजकीय बालिका इंटर कालेज बरुआसागर में 467 छात्राओं को पढ़ाने के लिए 12 सहायक शिक्षक व तीन प्रवक्ता है। रक्सा राजकीय इंटर कॉलेज में 1355 विद्यार्थियों के लिए 11 सहायक शिक्षक व तीन प्रवक्ता है। जीजीआईसी गुरसराय 258 छात्राओं के लिए प्रवक्ता चार और सहायक शिक्षक तीन तैनात है। इंटर कालेजों में 35 विद्यार्थियों पर एक सहायक अध्यापक की तैनाती का मानक है।
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जिला विद्यालय निरीक्षक डा. नीरज कुमार पांडेय ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में शिक्षक कम है, जबकि नगर क्षेत्र में अधिक है। इसे दुरुस्त किया जाएगा। शासन छात्रानुपात एवं शिक्षकों का जो अनुपात है, उसे तर्कसंगत करेगा।
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बच्चों के नहीं लिए जाते एडमीशन
ग्रामीण क्षेत्रों के राजकीय इंटर कालेजों में बच्चों के एडमिशन नहीं लिए जाते है, जिसका कारण इन कॉलेजों में शिक्षकों का अभाव होना बच्चों व अभिभावकों क ो बताया जाता है। विभाग के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों से ऐसी शिकायतें अक्सर आती हैं, कि उनके बच्चे का एडमीशन नहीं लिया जा रहा है। इससे ग्रामीण अंचलों के प्राइवेट कालेजों में महंगी शिक्षा हासिल करने पर बच्चे विवश होते हैं।
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