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रेलवे: वरिष् ठ नागरिकों को नहीं पता हक
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वरिष्ठ नागरिक एक सीट मांगें तो मिलेगी
झांसी। ट्रेन में लंबी वेटिंग के बाद भी वरिष्ठ नागरिक को ट्रेन में आसानी से सीट मिल सकती है। इसके लिए उन्हें फार्म में सिर्फ अपना नाम भरकर देना होगा। जानकारी के अभाव में लोग इस सुविधा का लाभ नहीं ले पाते हैं।
सुभाषगंज निवासी हरीराम (70) को एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए 29 अप्रैल को जयपुर जाना है। उन्होंने 15 अप्रैल को रेलवे आरक्षण खिड़की से एक ही फॉर्म पर अपना व पत्नी शंकुतला (65) का थर्ड एसी में आरक्षित टिकट बनवाया। उनको वेटिंग 6 व 7 नंबर मिली। वहीं, 19 अप्रैल को उनके ही परिवार के एक अन्य वरिष्ठ नागरिक धनीराम ने टिकट बनवाया तो उनको कन्फर्म टिकट मिल गया। इस बात की जानकारी जब हरीराम को हुई तो वह आपत्ति जताने आरक्षण कार्यालय पहुंच गए। उनका कहना था कि 15 अप्रैल को जब वेटिंग का टिकट मिल रहा था, तब 19 अप्रैल को कन्फर्म टिकट कैसे मिल गया? वह रेलवे की आरक्षण व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने लगे। बाद में उन्हें बताया गया कि हर ट्रेन में वरिष्ठ नागरिकों के कोटे की अलग बर्थ होती है। बशर्ते यह लाभ उन्हें तब ही मिलता है, जब वह अकेले नाम का टिकट बनवाएं। दो वरिष्ठ नागरिक हैं तो वह अलग-अलग फार्म भरकर दें। हां, अगर एक से अधिक नाम होंगे तो वरिष्ठ नागरिक के कोटे की बर्थ नहीं मिलेगी। इस बात की जानकारी न होने के कारण अकसर वरिष्ठ नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
किराए में यह मिलता लाभ
60 साल या इससे ऊपर के वरिष्ठ नागरिकों को किराए में 40 प्रतिशत की छूट मिलती है। जबकि, 58 साल या इससे ऊपर की महिला वरिष्ठ नागरिकों को किराए में 50 प्रतिशत छूट का प्रावधान है। इस किराए का लाभ मेल, एक्सप्रेस, राजधानी, शताब्दी एक्सप्रेस की सभी श्रेणियों में मिलता है।
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कोटा भी निर्धारित
हर ट्रेन की सभी श्रेणियों (स्लीपर, सेकेंड और थर्ड एसी) में 45 या इससे अधिक उम्र की महिलाओं व गर्भवती महिलाओं को लोअर बर्थ का कोटा भी मिलता है। हर कोच में दो बर्थ का कोटा निर्धारित है।
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झांसी। ट्रेन में लंबी वेटिंग के बाद भी वरिष्ठ नागरिक को ट्रेन में आसानी से सीट मिल सकती है। इसके लिए उन्हें फार्म में सिर्फ अपना नाम भरकर देना होगा। जानकारी के अभाव में लोग इस सुविधा का लाभ नहीं ले पाते हैं।
सुभाषगंज निवासी हरीराम (70) को एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए 29 अप्रैल को जयपुर जाना है। उन्होंने 15 अप्रैल को रेलवे आरक्षण खिड़की से एक ही फॉर्म पर अपना व पत्नी शंकुतला (65) का थर्ड एसी में आरक्षित टिकट बनवाया। उनको वेटिंग 6 व 7 नंबर मिली। वहीं, 19 अप्रैल को उनके ही परिवार के एक अन्य वरिष्ठ नागरिक धनीराम ने टिकट बनवाया तो उनको कन्फर्म टिकट मिल गया। इस बात की जानकारी जब हरीराम को हुई तो वह आपत्ति जताने आरक्षण कार्यालय पहुंच गए। उनका कहना था कि 15 अप्रैल को जब वेटिंग का टिकट मिल रहा था, तब 19 अप्रैल को कन्फर्म टिकट कैसे मिल गया? वह रेलवे की आरक्षण व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने लगे। बाद में उन्हें बताया गया कि हर ट्रेन में वरिष्ठ नागरिकों के कोटे की अलग बर्थ होती है। बशर्ते यह लाभ उन्हें तब ही मिलता है, जब वह अकेले नाम का टिकट बनवाएं। दो वरिष्ठ नागरिक हैं तो वह अलग-अलग फार्म भरकर दें। हां, अगर एक से अधिक नाम होंगे तो वरिष्ठ नागरिक के कोटे की बर्थ नहीं मिलेगी। इस बात की जानकारी न होने के कारण अकसर वरिष्ठ नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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किराए में यह मिलता लाभ
60 साल या इससे ऊपर के वरिष्ठ नागरिकों को किराए में 40 प्रतिशत की छूट मिलती है। जबकि, 58 साल या इससे ऊपर की महिला वरिष्ठ नागरिकों को किराए में 50 प्रतिशत छूट का प्रावधान है। इस किराए का लाभ मेल, एक्सप्रेस, राजधानी, शताब्दी एक्सप्रेस की सभी श्रेणियों में मिलता है।
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कोटा भी निर्धारित
हर ट्रेन की सभी श्रेणियों (स्लीपर, सेकेंड और थर्ड एसी) में 45 या इससे अधिक उम्र की महिलाओं व गर्भवती महिलाओं को लोअर बर्थ का कोटा भी मिलता है। हर कोच में दो बर्थ का कोटा निर्धारित है।