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ओशो ध्यान शिविर का समापन-Lalitpur
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ओशो तेरे धर्म ने जीना सिखा दिया...
झांसी। सीपरी के पंडित विवाह घर में चल रहे तीन दिवसीय ओशो ध्यान शिविर का रविवार को समापन हुआ। ओशो तेरे धर्म ने क्या-क्या सिखा दिया, जीना सिखा दिया, मरना सिखा दिया.., मेरे आका मेरे प्यारे शहनशाह... की संगीतमय गीतों और धुनों पर अनुयायी जमकर झूमे। साथ ही ध्यान साधना की।
शिविर में साधकों ने सुबह ध्यान की विविध क्रियाएं कीं। ओशो द्वारा रचित अनेक ध्यान विधियों का अभ्यास कराया। इनमें सक्रिय ध्यान, जिवरिश, मैं कौन हूं, सूफी ध्यान, चक्रा ध्यान आदि प्रमुख रहे। पुणे के साधक भरत भारती ने ओशो के संदेश को सुनाते हुए कहा कि ध्यान करने से जीवन में ऊर्जा प्राप्त होती है, जो लक्ष्य को पूरा कराता है। आज पूरी दुनिया ओशो के विचारों और उनके बताए ध्यान को आत्मसात कर चुकी है। सभी देशों में आज उनके लाखों-करोड़ों अनुयायी हैं। इस अवसर पर स्वामी विवेक बोधि, स्वामी कल्याण भारती, मां प्रेम सहज, आनंद स्वामी, मां शांति, आभा, मां प्रेम छाया, मां ओशिका, स्वामी आनंद परवाना, मां प्रेम ऋतिका मौजूद रहीं।
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झांसी। सीपरी के पंडित विवाह घर में चल रहे तीन दिवसीय ओशो ध्यान शिविर का रविवार को समापन हुआ। ओशो तेरे धर्म ने क्या-क्या सिखा दिया, जीना सिखा दिया, मरना सिखा दिया.., मेरे आका मेरे प्यारे शहनशाह... की संगीतमय गीतों और धुनों पर अनुयायी जमकर झूमे। साथ ही ध्यान साधना की।
शिविर में साधकों ने सुबह ध्यान की विविध क्रियाएं कीं। ओशो द्वारा रचित अनेक ध्यान विधियों का अभ्यास कराया। इनमें सक्रिय ध्यान, जिवरिश, मैं कौन हूं, सूफी ध्यान, चक्रा ध्यान आदि प्रमुख रहे। पुणे के साधक भरत भारती ने ओशो के संदेश को सुनाते हुए कहा कि ध्यान करने से जीवन में ऊर्जा प्राप्त होती है, जो लक्ष्य को पूरा कराता है। आज पूरी दुनिया ओशो के विचारों और उनके बताए ध्यान को आत्मसात कर चुकी है। सभी देशों में आज उनके लाखों-करोड़ों अनुयायी हैं। इस अवसर पर स्वामी विवेक बोधि, स्वामी कल्याण भारती, मां प्रेम सहज, आनंद स्वामी, मां शांति, आभा, मां प्रेम छाया, मां ओशिका, स्वामी आनंद परवाना, मां प्रेम ऋतिका मौजूद रहीं।
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