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आडिट से उजागर हुई ग्राम पंचायतों में हुई लाखों की वित्तीय अनियमिता
Sun, 03 Feb 2019 02:50 AM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
Published by: Priyesh Mishra
Updated Sun, 03 Feb 2019 02:50 AM IST
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ललितपुर जिले में करीब तीन दर्जन ग्राम पंचायतों ने 29 लाख रुपये से ज्यादा की वित्तीय अनियमितता की है। इसका खुलासा सहकारी समितियां एवं पंचायतें की आडिट रिपोर्ट से हुआ है। इसमें उन्होंने ग्राम प्रधान व वीडीओ को उत्तरदायी माना है। इसके बाद भी जिम्मेदार आडिट आपत्तियों के निस्तारण में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
ग्राम पंचायतों के समग्र विकास के लिए राज्य वित्त, चौदहवां वित्त एवं मनरेगा योजनांतर्गत धनराशि अवमुक्त की जाती है लेकिन ग्राम प्रधान एवं ग्राम पंचायत विकास अधिकारी इस धनराशि का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। इसकी वास्तविकता जांचने के लिए वर्ष 2015-16 में सहकारी समितियां एवं पंचायतें विभाग के माध्यम से विभिन्न मदों का आडिट कराया गया।
इसमें 35 ग्राम पंचायतें लपेटे में आ गई हैं। इनमें ललितपुर ग्रामीण, जमौरामाफी, मसौराकलां, दैलवारा, सीरोनकलां, हर्षपुर, जिजयावन, किसलवास, पड़ना, ऐरा, ककोरिया, बरखेरा, टेनगा, अंडेला, सिंगेपुर, पिपरियाजागीर, बार, देवरान, पुराधनकुआं, दिदौरा, मोगान, मड़ावरा, बारचौन, दिगवार, रखवारा, गढ़ोलीकलां, गुंदरापुर, खटौरा, बुदनी मड़ावरा, साढूमल, पथराई, राजपुर, सारसेड़, ककड़ारी, पवा सम्मिलित है। इसमें पिपरियाजागीर ग्राम पंचायत में 133540 रुपये, ग्राम पंचायत ऐरा में 141228 रुपये, ग्राम मोगान में 68125 रुपये, सिगेंपुर में 82380 रुपये, ककोरिया में 42910 रुपये, दिगवार में 46692 रुपये, मड़व़रा में 38558 रुपये, पुराधनकुआं में 102349 रुपये, साढूमल में 1674057 रुपये, गुंदरापुर में 68894 रुपये, बुदनी मड़ावरा में 152420 रुपये, ककड़ारी में 48189 रुपये, जिजयावन में 23824 रुपये की अनियमितता सामने आई है।
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इस पर तत्कालीन डीपीआरओ ने आडिट आपत्तियों के निस्तारण के लिए उत्तरदायी ग्राम पंचायत विकास अधिकारी व ग्राम प्रधान को पत्र लिखा था। जिम्मेदारों ने कार्रवाई करने की जगह पत्र को हवा में उड़ा दिया। इससे विभाग के लिए आडिट रिपोर्ट गले की हड्डी बन गई है। अब इस रिपोर्ट पर नए सिरे से वर्तमान डीपीआरओ ने कार्रवाई प्रारंभ कर दी है।
उत्तरदायी प्रधान हो गए भूतपूर्व
जिन ग्राम प्रधानों को अनियमितता के लिए उत्तरदायी माना गया है, वह अब भूतपूर्व हो गए हैं। ऐसे में भूतपूर्व प्रधान आडिट आपत्तियों के निस्तारण में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।
आडिट आपत्ति का परिपालन कराने के लिए पूर्व में ग्राम पंचायत सचिवों को पत्र लिखे गए थे। जिस पर अभी तक परिपालन आख्या प्राप्त नहीं हुई है। इसमें नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
श्रवण कुमार सिंह, जिला पंचायत राज अधिकारी
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ग्राम पंचायतों के समग्र विकास के लिए राज्य वित्त, चौदहवां वित्त एवं मनरेगा योजनांतर्गत धनराशि अवमुक्त की जाती है लेकिन ग्राम प्रधान एवं ग्राम पंचायत विकास अधिकारी इस धनराशि का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। इसकी वास्तविकता जांचने के लिए वर्ष 2015-16 में सहकारी समितियां एवं पंचायतें विभाग के माध्यम से विभिन्न मदों का आडिट कराया गया।
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इसमें 35 ग्राम पंचायतें लपेटे में आ गई हैं। इनमें ललितपुर ग्रामीण, जमौरामाफी, मसौराकलां, दैलवारा, सीरोनकलां, हर्षपुर, जिजयावन, किसलवास, पड़ना, ऐरा, ककोरिया, बरखेरा, टेनगा, अंडेला, सिंगेपुर, पिपरियाजागीर, बार, देवरान, पुराधनकुआं, दिदौरा, मोगान, मड़ावरा, बारचौन, दिगवार, रखवारा, गढ़ोलीकलां, गुंदरापुर, खटौरा, बुदनी मड़ावरा, साढूमल, पथराई, राजपुर, सारसेड़, ककड़ारी, पवा सम्मिलित है। इसमें पिपरियाजागीर ग्राम पंचायत में 133540 रुपये, ग्राम पंचायत ऐरा में 141228 रुपये, ग्राम मोगान में 68125 रुपये, सिगेंपुर में 82380 रुपये, ककोरिया में 42910 रुपये, दिगवार में 46692 रुपये, मड़व़रा में 38558 रुपये, पुराधनकुआं में 102349 रुपये, साढूमल में 1674057 रुपये, गुंदरापुर में 68894 रुपये, बुदनी मड़ावरा में 152420 रुपये, ककड़ारी में 48189 रुपये, जिजयावन में 23824 रुपये की अनियमितता सामने आई है।
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इस पर तत्कालीन डीपीआरओ ने आडिट आपत्तियों के निस्तारण के लिए उत्तरदायी ग्राम पंचायत विकास अधिकारी व ग्राम प्रधान को पत्र लिखा था। जिम्मेदारों ने कार्रवाई करने की जगह पत्र को हवा में उड़ा दिया। इससे विभाग के लिए आडिट रिपोर्ट गले की हड्डी बन गई है। अब इस रिपोर्ट पर नए सिरे से वर्तमान डीपीआरओ ने कार्रवाई प्रारंभ कर दी है।
उत्तरदायी प्रधान हो गए भूतपूर्व
जिन ग्राम प्रधानों को अनियमितता के लिए उत्तरदायी माना गया है, वह अब भूतपूर्व हो गए हैं। ऐसे में भूतपूर्व प्रधान आडिट आपत्तियों के निस्तारण में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।
आडिट आपत्ति का परिपालन कराने के लिए पूर्व में ग्राम पंचायत सचिवों को पत्र लिखे गए थे। जिस पर अभी तक परिपालन आख्या प्राप्त नहीं हुई है। इसमें नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
श्रवण कुमार सिंह, जिला पंचायत राज अधिकारी