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झांसी मेडिकल कॉलेज में जल्द होगी ‘खतरनाक वायरस’ की जांच
Mon, 14 Jan 2019 02:10 AM IST
Priyesh Mishra
प्रशांत शर्मा, अमर उजाला, झांसी
प्रशांत शर्मा, अमर उजाला, झांसी
Published by: Priyesh Mishra
Updated Mon, 14 Jan 2019 02:10 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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हवा के जरिए फैलने वाले बेहद खतरनाक वाइरस और बैक्टीरिया की जांच जल्द ही महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में हो सकेगी। इसके लिए कॉलेज में पांच करोड़ की लागत से बायो सेफ्टी लेवल-3 (बीएसएल) लैब की स्थापना की जा रही है। लैब के शुरू होने के बाद यहां पर यलो फीवर, स्वाइन फ्लू समेत हवा के जरिए फैलने वाले वाइरस, बैक्टीरिया की जांच हो सकेगी। फरवरी-मार्च तक लैब का काम पूरा होने की संभावना है। इस लैब में किसी भी बाहरी व्यक्ति के जाने की अनुमति नहीं होगी। जांच नमूने के लिए भी ऑटोमेटिक व्यवस्था होगी।
हवा के जरिए फैलने वाले वाइरस बेहद खतरनाक होते हैं। कुछ ही समय में ये तेजी से लोगों को अपना शिकार बनाने लगते हैं। अक्सर देखने को मिलता है कि विदेश में किसी बीमारी का वाइरस फैला और देश का कोई व्यक्ति घूमने गया और चपेट में आ गया, तो स्वदेश लौटने पर हवा के जरिए यह वाइरस एक दूसरे में फैलना शुरू हो जाता है। इससे महामारी की स्थिति हो जाती है। पिछले कुछ समय से स्वाइन फ्लू के मामले में ऐसा देखने को मिला है। स्थिति यह रहती है कि अस्पतालों की सामान्य लैबों में हवा के जरिए फैलने वाले स्वाइन फ्लू जैसे वाइरसों की जांच के लिए नमूने लेते समय स्टाफ के भी चपेट में आने की संभावना रहती है। इसे देखते हुए देश के प्रमुख शहरों में इन वाइरसों की जांच के लिए अलग से लैब खोली जा रही हैं।
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में भी बायो सेफ्टी लेवल-3 (बीएसएल) लैब की स्थापना कराई जा रही है। इसके लिए पांच करोड़ रुपये बजट निर्धारित किया गया है। इस लैब के शुरू होने के बाद यहां पर यलो फीवर, स्वाइन फ्लू समेत हवा के जरिए फैलने वाले वाइरस, बैक्टीरिया की जांच हो सकेगी।
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सैंपल कलेक्शन की प्रक्रिया ऑटोमेटिक
बीएसएल-3 लैब लोहे के बंकरनुमा आकृति की होगी। इस लैब में जैसे ही कोई डॉक्टर प्रवेश करेगा, उसका पूरा शरीर स्ट्रेलाइज हो जाएगा। ताकि, बाहर का कोई भी वाइरस, बैक्टीरिया इत्यादि लैब में न जा सके। सैंपल कलेक्शन की प्रक्रिया ऑटोमेटिक होगी। टेस्ट ट्यूब में सैंपल रखने के लिए डॉक्टर को मशीन के अंदर हाथ डालना पड़ेगा। इसके बाद ऑटोमेटिक मशीन सैंपल ले लेगी। यह प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित होगी। जांच के दौरान वाइरस फैलने की संभावना नगण्य रहेगी।
बीएसएल-3 लैब बनने से बेहद खतरनाक वाइरस और बैक्टीरिया की सुरक्षित जांचें मेडिकल कॉलेज में हो सकेंगी। लैब का निर्माण तेजी से चल रहा है। हालांकि, लैब के संचालन में बिजली की खपत ज्यादा होगी, इसके लिए शासन को पत्र लिखकर ट्रांसफार्मर की मांग की गई है। - डॉ. साधना कौशिक, प्राचार्य, महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज।
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हवा के जरिए फैलने वाले वाइरस बेहद खतरनाक होते हैं। कुछ ही समय में ये तेजी से लोगों को अपना शिकार बनाने लगते हैं। अक्सर देखने को मिलता है कि विदेश में किसी बीमारी का वाइरस फैला और देश का कोई व्यक्ति घूमने गया और चपेट में आ गया, तो स्वदेश लौटने पर हवा के जरिए यह वाइरस एक दूसरे में फैलना शुरू हो जाता है। इससे महामारी की स्थिति हो जाती है। पिछले कुछ समय से स्वाइन फ्लू के मामले में ऐसा देखने को मिला है। स्थिति यह रहती है कि अस्पतालों की सामान्य लैबों में हवा के जरिए फैलने वाले स्वाइन फ्लू जैसे वाइरसों की जांच के लिए नमूने लेते समय स्टाफ के भी चपेट में आने की संभावना रहती है। इसे देखते हुए देश के प्रमुख शहरों में इन वाइरसों की जांच के लिए अलग से लैब खोली जा रही हैं।
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महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में भी बायो सेफ्टी लेवल-3 (बीएसएल) लैब की स्थापना कराई जा रही है। इसके लिए पांच करोड़ रुपये बजट निर्धारित किया गया है। इस लैब के शुरू होने के बाद यहां पर यलो फीवर, स्वाइन फ्लू समेत हवा के जरिए फैलने वाले वाइरस, बैक्टीरिया की जांच हो सकेगी।
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सैंपल कलेक्शन की प्रक्रिया ऑटोमेटिक
बीएसएल-3 लैब लोहे के बंकरनुमा आकृति की होगी। इस लैब में जैसे ही कोई डॉक्टर प्रवेश करेगा, उसका पूरा शरीर स्ट्रेलाइज हो जाएगा। ताकि, बाहर का कोई भी वाइरस, बैक्टीरिया इत्यादि लैब में न जा सके। सैंपल कलेक्शन की प्रक्रिया ऑटोमेटिक होगी। टेस्ट ट्यूब में सैंपल रखने के लिए डॉक्टर को मशीन के अंदर हाथ डालना पड़ेगा। इसके बाद ऑटोमेटिक मशीन सैंपल ले लेगी। यह प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित होगी। जांच के दौरान वाइरस फैलने की संभावना नगण्य रहेगी।
बीएसएल-3 लैब बनने से बेहद खतरनाक वाइरस और बैक्टीरिया की सुरक्षित जांचें मेडिकल कॉलेज में हो सकेंगी। लैब का निर्माण तेजी से चल रहा है। हालांकि, लैब के संचालन में बिजली की खपत ज्यादा होगी, इसके लिए शासन को पत्र लिखकर ट्रांसफार्मर की मांग की गई है। - डॉ. साधना कौशिक, प्राचार्य, महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज।