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कोर्ट-हत्या के आरोप में तीन को आजीवन कारावास-City
Updated Sat, 07 Jul 2018 01:56 AM IST
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श्रेणी - कोर्ट
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हत्या के आरोप में तीन को आजीवन कारावास
- तीन नवंबर 2016 को युवक को उतार दिया था मौत के घाट
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी) न्यायालय संख्या दो राधे मोहन श्रीवास्तव की अदालत में तीन अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता संतोष कुमार दोहरे के अनुसार तीन नवंबर 2006 को ग्राम रिया निवासी कम्मोद पुत्र गुमान ने थाना एरच में लिखित तहरीर देते हुए बताया था कि 31 अक्टूबर 2006 की शाम करीब पांच बजे उसका 19 वर्षीय पुत्र राजालाल बेर खाने की कहकर घर से खेत की तरफ गया था। काफी रात तक वापस न लौटने पर उसकी तलाश की गयी, लेकिन कहीं पता नहीं चला। तीन नवंबर को कम्मोद अपने भतीजे रामलाल के साथ अहरोरा जंगल पहुंचा तो माता मंदिर के पास कुछ दूरी पर नग्न अवस्था में राजालाल का सिर कटा शव पड़ा हुआ था। कटे सिर की तलाश करने पर करीब आधा किलोमीटर दूर एक खेत में आधा हिस्सा मिला।
कम्मोद ने गांव के भरत पुत्र रघुराज व अन्य लोगों पर धारदार हथियार से गला काटकर हत्या करने का संदेह जताया। पुलिस ने तहरीर के आधार पर भरत व अज्ञात हत्यारों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया। विवेचना उपरांत महेन्द्र मेहतर पुत्र हरिलाल, राम बिहारी उर्फ राजू उर्फ पटेल पुत्र हरिलाल मेहतर, भरत पुत्र रघुराज सिंह निवासी ग्राम रिया व सुरेश पुत्र भूरे निवासी बरौना थाना जतारा जिला टीकमगढ मप्र के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया। दौरान मुकदमा महेन्द्र की मौत हो गई। मामले की सुनवाई उपरांत साक्ष्याें व गवाहों के आधार पर अभियुक्त सुरेश व राम बिहारी को आजीवन कारावास, 25-25 हजार रुपये अर्थदंड व अभियुक्त भरत को आजीवन कारावास व 60 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड की जमा धनराशि में से 80 प्रतिशत वादी मुकदमा, विधिक वारिस को बतौर क्षतिपूर्ति प्रदान की जाएगी।
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हत्या के आरोप में तीन को आजीवन कारावास
- तीन नवंबर 2016 को युवक को उतार दिया था मौत के घाट
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी) न्यायालय संख्या दो राधे मोहन श्रीवास्तव की अदालत में तीन अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता संतोष कुमार दोहरे के अनुसार तीन नवंबर 2006 को ग्राम रिया निवासी कम्मोद पुत्र गुमान ने थाना एरच में लिखित तहरीर देते हुए बताया था कि 31 अक्टूबर 2006 की शाम करीब पांच बजे उसका 19 वर्षीय पुत्र राजालाल बेर खाने की कहकर घर से खेत की तरफ गया था। काफी रात तक वापस न लौटने पर उसकी तलाश की गयी, लेकिन कहीं पता नहीं चला। तीन नवंबर को कम्मोद अपने भतीजे रामलाल के साथ अहरोरा जंगल पहुंचा तो माता मंदिर के पास कुछ दूरी पर नग्न अवस्था में राजालाल का सिर कटा शव पड़ा हुआ था। कटे सिर की तलाश करने पर करीब आधा किलोमीटर दूर एक खेत में आधा हिस्सा मिला।
कम्मोद ने गांव के भरत पुत्र रघुराज व अन्य लोगों पर धारदार हथियार से गला काटकर हत्या करने का संदेह जताया। पुलिस ने तहरीर के आधार पर भरत व अज्ञात हत्यारों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया। विवेचना उपरांत महेन्द्र मेहतर पुत्र हरिलाल, राम बिहारी उर्फ राजू उर्फ पटेल पुत्र हरिलाल मेहतर, भरत पुत्र रघुराज सिंह निवासी ग्राम रिया व सुरेश पुत्र भूरे निवासी बरौना थाना जतारा जिला टीकमगढ मप्र के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया। दौरान मुकदमा महेन्द्र की मौत हो गई। मामले की सुनवाई उपरांत साक्ष्याें व गवाहों के आधार पर अभियुक्त सुरेश व राम बिहारी को आजीवन कारावास, 25-25 हजार रुपये अर्थदंड व अभियुक्त भरत को आजीवन कारावास व 60 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड की जमा धनराशि में से 80 प्रतिशत वादी मुकदमा, विधिक वारिस को बतौर क्षतिपूर्ति प्रदान की जाएगी।
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