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बीयू में खुला भूजल विश्लेषक शोध केंद्र -City
Updated Fri, 04 May 2018 11:40 PM IST
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बीयू में खुला भूजल विश्लेषक शोध केंद्र
- शोध कार्यों के नतीजों को किसानों के खेतों तक पहुंचाएं: कुलपति
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (डीएसटी) के सहयोग से बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के भूगर्भ विज्ञान विभाग में आधुनिक उपकरणों से लैस भूजल विश्लेषक शोध केंद्र का कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे और डीएसटी प्रमुख डॉ. भूप सिंह ने लोकार्पण किया। कुलपति ने वैज्ञानिकों का आह्वान किया कि वे प्रयोगशालाओं के शोध कार्यों के नतीजों को किसानों के खेतों और आमजन के जीवन तक पहुंचाएं।
कुलपति ने कहा कि जीवन में गुणात्मक सुधार आने पर ही शोध सही मायने में सार्थक होंगे। उन्होंने वैज्ञानिकों को क्षेत्र के गांवों में जाकर किसानों को रासायनिक पदार्थों के अंधाधुंध प्रयोग से होने वाली समस्याओं के बारे में बताया। कहा कि यदि सब लोग इसके खतरों से आगाह होंगे, तो खेतों में रसायनों का प्रयोग कम करेंगे। कुलसचिव सीपी तिवारी ने कहा कि बुंदेलखंड में सबसे बड़ी समस्या पानी की कमी की है। क्षेत्र में खान का कार्य उल्लेख करते हुए कहा कि इससे किसानों को बीमारियां ही मिलती हैं। उन्होंने खनन कार्य की परिधि वाले क्षेत्र के लोगों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया। डीएसटी प्रमुख डॉ. भूप सिंह ने वैज्ञानिकों व विशेषज्ञों से क्षेत्र के लिए बेहतरीन परियोजनाएं बनाने का आह्वान किया। डीएसटी प्रतिनिधि डॉ. एके सिंह ने वैज्ञानिकों से उपकरणों के साथ-साथ ज्ञान को अपने सहयोगियों और विद्यार्थियों से साझा करने की अपील की। भूजल वैश्लेषिक शोध केंद्र के प्रमुख प्रो. एसपी सिंह ने क्षेत्र की समस्याएं बताईं।
इस दौरान प्रो. एमएम सिंह, डॉ. ऋषि सक्सेना, प्रो. देवेश निगम, प्रो. एसके कटियार, उमेश शुक्ला मौजूद रहे। गौरतलब है कि डीएसटी ने बुंदेलखंड की समस्याओं को पहचानकर उन्हें दूर करने के लिए जरूरी शोध परियोजनाएं बनाने और उन्हें क्रियान्वित करने के लिए बीयू को नोडल सेंटर बनाया है।
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बीयू में खुला भूजल विश्लेषक शोध केंद्र
- शोध कार्यों के नतीजों को किसानों के खेतों तक पहुंचाएं: कुलपति
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (डीएसटी) के सहयोग से बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के भूगर्भ विज्ञान विभाग में आधुनिक उपकरणों से लैस भूजल विश्लेषक शोध केंद्र का कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे और डीएसटी प्रमुख डॉ. भूप सिंह ने लोकार्पण किया। कुलपति ने वैज्ञानिकों का आह्वान किया कि वे प्रयोगशालाओं के शोध कार्यों के नतीजों को किसानों के खेतों और आमजन के जीवन तक पहुंचाएं।
कुलपति ने कहा कि जीवन में गुणात्मक सुधार आने पर ही शोध सही मायने में सार्थक होंगे। उन्होंने वैज्ञानिकों को क्षेत्र के गांवों में जाकर किसानों को रासायनिक पदार्थों के अंधाधुंध प्रयोग से होने वाली समस्याओं के बारे में बताया। कहा कि यदि सब लोग इसके खतरों से आगाह होंगे, तो खेतों में रसायनों का प्रयोग कम करेंगे। कुलसचिव सीपी तिवारी ने कहा कि बुंदेलखंड में सबसे बड़ी समस्या पानी की कमी की है। क्षेत्र में खान का कार्य उल्लेख करते हुए कहा कि इससे किसानों को बीमारियां ही मिलती हैं। उन्होंने खनन कार्य की परिधि वाले क्षेत्र के लोगों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया। डीएसटी प्रमुख डॉ. भूप सिंह ने वैज्ञानिकों व विशेषज्ञों से क्षेत्र के लिए बेहतरीन परियोजनाएं बनाने का आह्वान किया। डीएसटी प्रतिनिधि डॉ. एके सिंह ने वैज्ञानिकों से उपकरणों के साथ-साथ ज्ञान को अपने सहयोगियों और विद्यार्थियों से साझा करने की अपील की। भूजल वैश्लेषिक शोध केंद्र के प्रमुख प्रो. एसपी सिंह ने क्षेत्र की समस्याएं बताईं।
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इस दौरान प्रो. एमएम सिंह, डॉ. ऋषि सक्सेना, प्रो. देवेश निगम, प्रो. एसके कटियार, उमेश शुक्ला मौजूद रहे। गौरतलब है कि डीएसटी ने बुंदेलखंड की समस्याओं को पहचानकर उन्हें दूर करने के लिए जरूरी शोध परियोजनाएं बनाने और उन्हें क्रियान्वित करने के लिए बीयू को नोडल सेंटर बनाया है।
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