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‘दलदल’ में फंसा तालाब की सफाई का काम
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‘दलदल’ में फंसा तालाब की सफाई का काम
झांसी। लक्ष्मी तालाब में सफाई का काम दलदल ने धीमा कर दिया है। दलदल से गीला कीचड़ निकल रहा है, जिसको डंपर से फेंकना संभव नहीं हो पा रहा है। कीचड़ को एक जगह से दूसरी जगह डालकर सुखाया जा रहा है। सूखने पर इसे फेंका जाएगा। इससे यह काम जल्द पूरा होता दिखाई नहीं दे रहा है। वैसे जल निगम ने दिसंबर 2018 तक काम पूरा करने का लक्ष्य बनाया था।
लक्ष्मी तालाब की सफाई पर छह करोड़ रुपये खर्च होेने हैं, इसमें जिओ मिलर कंपनी को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाने का ठेका कुल 34 करोड़ रुपये में मिला है। इसमें से पांच प्रतिशत हिस्सा सफाई मद में खर्च करना है। ढाई लाख क्यूबिक मीटर सफाई होनी है। कंपनी ने 29 मई 2018 से सफाई शुरू कर दस जुलाई तक दो हजार क्यूबिक मीटर की सफाई कर दी थी। इसमें दस लाख रुपये से अधिक खर्च हो गए। बरसात के पानी से फिर तालाब भर गया है और स्थिति जस की तस हो गई।
अक्तूबर से दोबारा लक्ष्मी तालाब की सफाई का काम शुरू किया गया है। इस बार जिओ मिलर कंपनी के साथ पांच ठेकेदार भी सफाई का काम कर रहे हैं। तालाब की 40 फीसदी से ज्यादा सफाई कर दी गई है। जलकुंभी को हटा दिया गया है। तालाब के बीच अब सफाई करने में परेशानियां शुरू हो गई हैं। यहां दलदल से कीचड़ निकालने में जेसीबी मशीन फंस रही है। दूसरा, गीले कीचड़ को डंपर से फेंकना संभव नहीं हो पा रहा है। इससे काम धीमा पड़ गया है। इस संबंध में जलनिगम के मुख्य अभियंता राजेश कुमार ने बताया कि कीचड़ को आसपास डालकर पहले सुखाया जा रहा है। कीचड़ के सूखने पर ही उसे फेंका जाएगा। तेजी से काम हो, इसकी पूरी कोशिश की जा रही है।
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यह भी जानिए
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नारायण बाग के पास स्थित लक्ष्मी ताल को सुंदर बनाने पर 54 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। इसमें साठ फीसदी पैसा (32.50 करोड़ रुपये) केंद्र सरकार व चालीस फीसदी (21.50 करोड़ रुपये) राज्य सरकार को देना है। योजना 2015 में शुरू हुई थी, जिसमें 25 करोड़ रुपये का बजट अभी तक मिल चुका है। दिल्ली की जिओ मिलर कंपनी को 34 करोड़ रुपये का ठेका जल शोधन वाटर टैंक (एसटीपी) व अन्य निर्माण काम के लिए दिया गया है।
झांसी। लक्ष्मी तालाब में सफाई का काम दलदल ने धीमा कर दिया है। दलदल से गीला कीचड़ निकल रहा है, जिसको डंपर से फेंकना संभव नहीं हो पा रहा है। कीचड़ को एक जगह से दूसरी जगह डालकर सुखाया जा रहा है। सूखने पर इसे फेंका जाएगा। इससे यह काम जल्द पूरा होता दिखाई नहीं दे रहा है। वैसे जल निगम ने दिसंबर 2018 तक काम पूरा करने का लक्ष्य बनाया था।
लक्ष्मी तालाब की सफाई पर छह करोड़ रुपये खर्च होेने हैं, इसमें जिओ मिलर कंपनी को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाने का ठेका कुल 34 करोड़ रुपये में मिला है। इसमें से पांच प्रतिशत हिस्सा सफाई मद में खर्च करना है। ढाई लाख क्यूबिक मीटर सफाई होनी है। कंपनी ने 29 मई 2018 से सफाई शुरू कर दस जुलाई तक दो हजार क्यूबिक मीटर की सफाई कर दी थी। इसमें दस लाख रुपये से अधिक खर्च हो गए। बरसात के पानी से फिर तालाब भर गया है और स्थिति जस की तस हो गई।
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अक्तूबर से दोबारा लक्ष्मी तालाब की सफाई का काम शुरू किया गया है। इस बार जिओ मिलर कंपनी के साथ पांच ठेकेदार भी सफाई का काम कर रहे हैं। तालाब की 40 फीसदी से ज्यादा सफाई कर दी गई है। जलकुंभी को हटा दिया गया है। तालाब के बीच अब सफाई करने में परेशानियां शुरू हो गई हैं। यहां दलदल से कीचड़ निकालने में जेसीबी मशीन फंस रही है। दूसरा, गीले कीचड़ को डंपर से फेंकना संभव नहीं हो पा रहा है। इससे काम धीमा पड़ गया है। इस संबंध में जलनिगम के मुख्य अभियंता राजेश कुमार ने बताया कि कीचड़ को आसपास डालकर पहले सुखाया जा रहा है। कीचड़ के सूखने पर ही उसे फेंका जाएगा। तेजी से काम हो, इसकी पूरी कोशिश की जा रही है।
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नारायण बाग के पास स्थित लक्ष्मी ताल को सुंदर बनाने पर 54 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। इसमें साठ फीसदी पैसा (32.50 करोड़ रुपये) केंद्र सरकार व चालीस फीसदी (21.50 करोड़ रुपये) राज्य सरकार को देना है। योजना 2015 में शुरू हुई थी, जिसमें 25 करोड़ रुपये का बजट अभी तक मिल चुका है। दिल्ली की जिओ मिलर कंपनी को 34 करोड़ रुपये का ठेका जल शोधन वाटर टैंक (एसटीपी) व अन्य निर्माण काम के लिए दिया गया है।