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आशुरा का रोजा रखने से साल भर के गुनाह माफ होते हैं।-City
Updated Thu, 13 Sep 2018 02:21 AM IST
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आशूरा का रोजा रखने से साल भर के गुनाह माफ होते हैं- मुफ्ती
- मुहर्रम के शुरू होते ही इस्लामी नया साल शुरू होता है
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। मुहर्रम से इस्लामी नया साल शुरू होता है। मुहर्रम की दस तारीख को आशुरा का दिन कहा जाता है। इसी दिन हजरत आदम अलेहिस्सलाम को पैदा किया गया और आशूरा को उनको जन्नत से निकाला गया। इसी तारीख को उनकी तौबा कुबूल हुई, आशूरा को ही अर्श, कुर्सी, जीम, आसमान, चांद, सूरज और सितारे पैदा किए गए। इसी दिन हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम को पैदा किया गया।
इसी दिन आपको नमरूद से निजात मिली। हजरत इदरीस अलेहिस्सलाम को इसी दिन आसमान पर उठाया गया। नूह अलेहिस्सलाम की कश्ती सूदी पहाड़ी पर इसी दिन ठहरी थी। हजरत सूलेमान अलेहिस्सलाम को इसी दिन बादशाहत मिली। हजरत यूनुस अलेहिस्सलाम को आशूरा के दिन ही मछली के पेट से निकाला गया। आशूरा के दिन रोजा रखने से साल भर के गुनाह माफ किये जाते हैं। यह बात मुफ्ती साबिर अंसारी ने बताई है।
उन्होने बताया कि इसी दिन आसमान से पहली बारिश हुई और इसी दिन अल्लाह तआला पूरी कायनात को वापस बुला लेगें। कुरान व हदीस से पता चलता है कि मोहर्रम की नवी और दसवी या दसवी और ग्यारहवी तारीख को रोजा रखा जाए। बुखारी शरीफ में हजरत आयशा रजीअल्लाह ताआला अन्हा की रिवायत है कि मुहम्मद सल्ललहु अलैही वसल्लम ने योमे आशुराह के रोजे रखने का हुक्म दिया है। दसवी तारीख को अपनी मालदारी के मुताबिक अपने परिवार, खानदान और गरीबों पर खाने-पीने में खूब खर्च करें। अल्लाह तआला पूरे साल उसके रिज्क में खूब बरकत देते है। इस दिन अल्लाह का जिक्र, दुआ व इस्तग्फार और नफली इबादतों का ज्यादा से ज्यादा एहतेमाम करें ताकि अल्लाह पाक पूरे साल नेक काम और अच्छे आमाल करने की तौफीक अता फरमाता रहे। आशुराह नबी के पहले से मनाया जाता है।
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- मुहर्रम के शुरू होते ही इस्लामी नया साल शुरू होता है
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। मुहर्रम से इस्लामी नया साल शुरू होता है। मुहर्रम की दस तारीख को आशुरा का दिन कहा जाता है। इसी दिन हजरत आदम अलेहिस्सलाम को पैदा किया गया और आशूरा को उनको जन्नत से निकाला गया। इसी तारीख को उनकी तौबा कुबूल हुई, आशूरा को ही अर्श, कुर्सी, जीम, आसमान, चांद, सूरज और सितारे पैदा किए गए। इसी दिन हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम को पैदा किया गया।
इसी दिन आपको नमरूद से निजात मिली। हजरत इदरीस अलेहिस्सलाम को इसी दिन आसमान पर उठाया गया। नूह अलेहिस्सलाम की कश्ती सूदी पहाड़ी पर इसी दिन ठहरी थी। हजरत सूलेमान अलेहिस्सलाम को इसी दिन बादशाहत मिली। हजरत यूनुस अलेहिस्सलाम को आशूरा के दिन ही मछली के पेट से निकाला गया। आशूरा के दिन रोजा रखने से साल भर के गुनाह माफ किये जाते हैं। यह बात मुफ्ती साबिर अंसारी ने बताई है।
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उन्होने बताया कि इसी दिन आसमान से पहली बारिश हुई और इसी दिन अल्लाह तआला पूरी कायनात को वापस बुला लेगें। कुरान व हदीस से पता चलता है कि मोहर्रम की नवी और दसवी या दसवी और ग्यारहवी तारीख को रोजा रखा जाए। बुखारी शरीफ में हजरत आयशा रजीअल्लाह ताआला अन्हा की रिवायत है कि मुहम्मद सल्ललहु अलैही वसल्लम ने योमे आशुराह के रोजे रखने का हुक्म दिया है। दसवी तारीख को अपनी मालदारी के मुताबिक अपने परिवार, खानदान और गरीबों पर खाने-पीने में खूब खर्च करें। अल्लाह तआला पूरे साल उसके रिज्क में खूब बरकत देते है। इस दिन अल्लाह का जिक्र, दुआ व इस्तग्फार और नफली इबादतों का ज्यादा से ज्यादा एहतेमाम करें ताकि अल्लाह पाक पूरे साल नेक काम और अच्छे आमाल करने की तौफीक अता फरमाता रहे। आशुराह नबी के पहले से मनाया जाता है।
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