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इमरजेंसी में खोखले काउच-City

Thu, 26 Oct 2017 10:30 PM IST
Updated Thu, 26 Oct 2017 10:30 PM IST
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इमरजेंसी में खोखले काउच-City
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इमरजेंसी के गद्दे हैं बहुत भद्दे
टैग: बदहाली
- कटे-फटे और खोखले, मरीजों को इनमें नहीं मिलता आराम
- बजट की कमी और रखरखाव में लापरवाही है इसकी वजह
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में रखे काउच (मरीज परीक्षण शैय्या) का बुरा हाल है। काउच के गद्दे फटे और खोखले हो गए हैं। कहीं तो गद्दा भी नहीं है। इमरजेंसी आने वाले मरीजों का इन्हीं काउच पर लिटाकर इलाज किया जाता है। अस्पताल प्रशासन ने इन्हें दुरुस्त करने के निर्देश दे दिए हैं।
मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में लगभग 50 बेड हैं। रोजाना 30 से 40 मरीज यहां भर्ती होते हैं। इन्हीं बेडों पर मेडिसिन और बाल रोग विभाग के मरीजों को भी भर्ती किया जाता है। ऐसे में बेड की संख्या कम होने पर गैलरी में काफी समय पहले आठ से दस काउच डाल दिए गए थे। मौजूदा समय में सभी काउच की हालत बहुत बदतर हो गई है। किसी के गद्दे फटे हुए हैं, तो किसी के सड़ गए हैं। यहीं नहीं, कुछ काउच के गद्दे खोखले हो गए हैं। एक में तो गद्दा ही नहीं है। ऐसे में जिन मरीजों को इन पर लिटाया जाता है, उन्हें आराम नहीं मिलने से परेशानी होती है।
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मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हरीशचंद्र आर्या ने बताया कि बजट की समस्या के चलते अब तक इन्हें सुधरवाया नहीं जा सका है। अनुरक्षण का बजट मिलने के बाद इन्हें ठीक करने के निर्देश दे दिए गए हैं। 10-15 दिनों में सभी काउच दुरुस्त करा लिए जाएंगे।
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बॉक्स..
बच्चों को हो सकता संक्रमण
इमरजेंसी में बने बाल रोग विभाग के कमरे में बेड के ठीक बगल में वॉश बेसिन बना है। इसके आसपास बहुत गंदगी जमा रहती है। डॉक्टर, कर्मचारियों द्वारा हाथ धोने पर छींटे बच्चों के बेड पर गिरते हैं। हर समय संक्रमण फैलने की संभावना बनी हुई है।

ढाई हजार से मिलते गद्दा
जानकारों ने बताया कि अच्छी कंपनी का तीन बाई छह का गद्दा 2500 से 3500 रुपये में आता है। जबकि, वॉटरप्रूफ कवर 200 रुपये में मिल जाता है। इस पर तीन साल की वॉरंटी मिलती है। ये गद्दे सात से आठ साल तक उपयोग किए जा सकते हैं।


2010 से नहीं बदले
मेडिकल कॉलेज में इमरजेंसी/ट्रामा सेंटर वर्ष 2010 में शुरू हुआ था, तभी यहां पर काउच खरीदे गए थे। बताया गया कि साल साल से काउच के खराब हो चुके गद्दे नहीं बदले गए हैं। हालांकि, एक साल पहले फटे गद्दों में फॉर्म भरकर मरम्मत की गई थी।
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