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कमेटी सुस्त, जांच फुस्स-City
Updated Fri, 10 Aug 2018 06:24 PM IST
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अमर की मौत के दोषियों को ‘सजा’ कब?
टैग: मेडिकल कॉलेज
- 22 जून को इमरजेंसी उपकरण न मिलने से हुई थी बच्चे की मौत
- डेढ़ माह बीतने के बावजूद पूरी नहीं हो पाई जांच, नियत पर सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में इमरजेंसी स्टाफ की लापरवाही से हुई मासूम अमर की मौत की जांच डेढ़ महीने बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। जबकि, प्राचार्य कमेटी को दो बार रिमाइंडर जारी कर चुकी हैं। इससे जांच कमेटी की नियत सवालों के घेरे में है।
20 जून की रात टीकमगढ़ के पहाड़ी खुर्द निवासी अमर सिंह (8) कुएं में गिर गया था। इससे उसके पेट में रक्तस्त्राव होने के साथ-साथ शरीर में गंभीर चोटें आ गई थीं। देर रात लगभग ढाई बजे परिजन उसे मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंच गए। डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू कर दिया। 21 जून की सुबह साढ़े नौ बजे डॉक्टरों ने उसका ऑपरेशन करने का फैसला किया। इमरजेंसी स्टाफ से ऑपरेशन की व्यवस्था करने की बात कही। इस पर स्टाफ ने हाथ खड़े कर दिए। सूत्रों ने बताया कि स्टाफ ने कहा कि उनके पास ऑपरेशन के लिए ओटी उपकरण नहीं है। न ही लेनिन पैक है। इस पर डॉक्टरों ने कहा कि वह पैक को पानी में उबालकर ऑपरेशन कर देंगे। मगर स्टाफ लगातार न नुकुर करता रहा। इसमें ढाई तीन घंटे बीत गए और इमरजेंसी में लेटे-लेटे मासूम अमर ने दम तोड़ दिया। 22 जून के अपने अंक में अमर उजाला ने स्टाफ की लापरवाही हुई अमर की मौत का मामला प्रमुखता से उठाया। खबर का संज्ञान लेकर मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने जांच कमेटी गठित कर दी। शुरू से ही कमेटी की जांच बेहद सुस्त होने की वजह से प्राचार्य डॉ. साधना कौशिक ने दो रिमाइंडर जारी किए। कमेटी ने उनके दोनों रिमाइंडर की परवाह नहीं की। अब घटना को डेढ़ महीना बीतने के बाद भी जांच पूरी नहीं हुई है।
जल्द पूरी होगी जांच
कमेटी को दो रिमाइंडर दिए जा चुके हैं। कमेटी के सदस्यों को बुलाकर पूछा जाएगा कि आखिर क्यों देरी हो रही है। जल्द जांच पूरी कराई जाएगी। - डॉ. साधना कौशिक, मेडिकल कॉलेज प्राचार्य।
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अमर की मौत के दोषियों को ‘सजा’ कब?
टैग: मेडिकल कॉलेज
- 22 जून को इमरजेंसी उपकरण न मिलने से हुई थी बच्चे की मौत
- डेढ़ माह बीतने के बावजूद पूरी नहीं हो पाई जांच, नियत पर सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में इमरजेंसी स्टाफ की लापरवाही से हुई मासूम अमर की मौत की जांच डेढ़ महीने बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। जबकि, प्राचार्य कमेटी को दो बार रिमाइंडर जारी कर चुकी हैं। इससे जांच कमेटी की नियत सवालों के घेरे में है।
20 जून की रात टीकमगढ़ के पहाड़ी खुर्द निवासी अमर सिंह (8) कुएं में गिर गया था। इससे उसके पेट में रक्तस्त्राव होने के साथ-साथ शरीर में गंभीर चोटें आ गई थीं। देर रात लगभग ढाई बजे परिजन उसे मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंच गए। डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू कर दिया। 21 जून की सुबह साढ़े नौ बजे डॉक्टरों ने उसका ऑपरेशन करने का फैसला किया। इमरजेंसी स्टाफ से ऑपरेशन की व्यवस्था करने की बात कही। इस पर स्टाफ ने हाथ खड़े कर दिए। सूत्रों ने बताया कि स्टाफ ने कहा कि उनके पास ऑपरेशन के लिए ओटी उपकरण नहीं है। न ही लेनिन पैक है। इस पर डॉक्टरों ने कहा कि वह पैक को पानी में उबालकर ऑपरेशन कर देंगे। मगर स्टाफ लगातार न नुकुर करता रहा। इसमें ढाई तीन घंटे बीत गए और इमरजेंसी में लेटे-लेटे मासूम अमर ने दम तोड़ दिया। 22 जून के अपने अंक में अमर उजाला ने स्टाफ की लापरवाही हुई अमर की मौत का मामला प्रमुखता से उठाया। खबर का संज्ञान लेकर मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने जांच कमेटी गठित कर दी। शुरू से ही कमेटी की जांच बेहद सुस्त होने की वजह से प्राचार्य डॉ. साधना कौशिक ने दो रिमाइंडर जारी किए। कमेटी ने उनके दोनों रिमाइंडर की परवाह नहीं की। अब घटना को डेढ़ महीना बीतने के बाद भी जांच पूरी नहीं हुई है।
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जल्द पूरी होगी जांच
कमेटी को दो रिमाइंडर दिए जा चुके हैं। कमेटी के सदस्यों को बुलाकर पूछा जाएगा कि आखिर क्यों देरी हो रही है। जल्द जांच पूरी कराई जाएगी। - डॉ. साधना कौशिक, मेडिकल कॉलेज प्राचार्य।
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