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खेल - हाकी खिलाड़ियों की दुर्दशा-City
Updated Thu, 12 Jul 2018 03:52 AM IST
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‘कच्चे’ मकान से निकले ‘पक्के’ खिलाड़ी
- तीनों की हॉकी में बनाई में धाक, कई मैचों में दिलाई देश को जीत
- दो अंतरराष्ट्रीय व एक राष्ट्रीय स्तर पर कर रहे खेल का प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। कच्चे घर और बदहाली के दामन से निकलकर शहर के तीन लड़कों ने वो कर दिखाया, तमाम सुविधाओं से संपन्न लोग नहीं कर पाते। नंगे पैर टूटी हॉकी से खेलकर एक ही परिवार के तीन लड़के आज देश में ही नहीं, विदेशों में भी मेजर ध्यानचंद की नगरी की धाक जमा रहे हैं। दो अंतरराष्ट्रीय तो एक राष्ट्रीय स्तर पर अपनी हॉकी से जलवा दिखा रहा है।
महानगर के आशिक चौराहे के पास नई बस्ती में रहने वाले केशवानंद कुशवाहा के चार बच्चे हैं। इनमें तीन बेटे और एक बेटी है। उनका दो कमरों का कच्चा मकान है। वह भजन-कीर्तन करके परिवार का पोषण करते थे। इनके सबसे बड़े बेटे ऋषभ ने जब हॉकी खेलना शुरू किया तो उसके पास न तो जूते थे और न ही अच्छी हॉकी। लेकिन टूटी हॉकी से ही वह लक्ष्मी व्यायाम मंदिर में अपनी प्रैक्टिस करते रहते। ऋषभ के साथ शिवम भी हॉकी की प्रैक्टिस करते थे। इन दोनों को यहां देख पूर्व अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी सुबोध खंडकर ने इन्हें तराशना शुरू किया। सुबोध के प्रयास कुछ ही महीने बाद ऋषभ को पहले स्टेट और बाद में नेशनल स्तर पर खेलने का मौका मिला। वहीं, शिवम ने भी लगातार बेहतर प्रदर्शन करते हुए अंडर 18 एशिया कप में भारत की टीम में जगह बनाने का मौका मिला। दोनों भाइयों से प्रेरित होकर सौरभ ने भी हॉकी थामी और अंडर 18 एशिया कप में भारत की ओर से धुआंधार शॉट लगाए।
सौरभ और शिवम का चयन हॉकी प्रीमियर लीग में हो गया है। सौरभ इंडियन कोटेक की टीम से और शिवम इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन की ओर से अपनी हॉकी का जलवा दिखाएंगे।
बेटे के पासपोर्ट को नहीं थे रुपये
केशवानंद बनाते हैं कि 2016 में छोटे बेटे सौरभ का चयन एशिया हॉकी गोल्ड कप के लिए हुआ था। पहली बार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेलने का मौका तो मिला था, पर ढाका जाने के लिए पासपोर्ट बनवाने रुपये नहीं थे। किसी प्रकार से अपने सहयोगियों की मदद ली और बेटे के पासपोर्ट के लिए रुपये एकत्र कर उसे मैच खेलने भेजा, इसमें भारत को ट्रॉफी जिताने में सौरभ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
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खिलाड़ियों का सफर
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ऋषभ आनंद
2010 में केडी सिंह बाबू नेशनल सब जूनियर
2014 में जूनियर ग्रामीण नेशनल
2015 में स्कूल नेशनल
2015 में एनसीसी नेशनल हाकी
2016 में जूनियर नेशनल
2018 में कस्टम की ओर से कोलकाता हाकी लीग
शिवम आनंद
2014 में स्कूल नेशनल
2015 में सब जूनियर नेशनल
2016 में नई दिल्ली की ओर से जूनियर नेशनल
2016 में ढाका में एशिया कप
2017 में रायपुर की ओर से जूनियर नेशनल
2018 में भोपाल की ओर से जूनियर नेशनल
2018 में इंडियन आयल कोर्पोेरेशन की ओर से बंग्लूरू हॉकी लीग
2018 में थाईलैंड में जूनियर हॉकी लीग
सौरभ आनंद
2013 में केडी सिंह बाबू सब जूनियर
2014 में दिल्ली की ओर से स्कूल नेशनल
2014 में हरियाणा की ओर से ग्रामीण नेशनल
2016 में सैफई की ओर से सब जूनियर नेशनल
2016 में एशिया गोल्ड कप
2018 में भोपाल की ओर से जूनियर नेशनल
2017 में दिल्ली की ओर से स्कूल नेशनल
2018 में नई दिल्ली की ओर से खेलो इंडिया
2018 में बैंगलोर हॉकी लीग इंडियन कोटेक की ओर से
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‘कच्चे’ मकान से निकले ‘पक्के’ खिलाड़ी
- तीनों की हॉकी में बनाई में धाक, कई मैचों में दिलाई देश को जीत
- दो अंतरराष्ट्रीय व एक राष्ट्रीय स्तर पर कर रहे खेल का प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। कच्चे घर और बदहाली के दामन से निकलकर शहर के तीन लड़कों ने वो कर दिखाया, तमाम सुविधाओं से संपन्न लोग नहीं कर पाते। नंगे पैर टूटी हॉकी से खेलकर एक ही परिवार के तीन लड़के आज देश में ही नहीं, विदेशों में भी मेजर ध्यानचंद की नगरी की धाक जमा रहे हैं। दो अंतरराष्ट्रीय तो एक राष्ट्रीय स्तर पर अपनी हॉकी से जलवा दिखा रहा है।
महानगर के आशिक चौराहे के पास नई बस्ती में रहने वाले केशवानंद कुशवाहा के चार बच्चे हैं। इनमें तीन बेटे और एक बेटी है। उनका दो कमरों का कच्चा मकान है। वह भजन-कीर्तन करके परिवार का पोषण करते थे। इनके सबसे बड़े बेटे ऋषभ ने जब हॉकी खेलना शुरू किया तो उसके पास न तो जूते थे और न ही अच्छी हॉकी। लेकिन टूटी हॉकी से ही वह लक्ष्मी व्यायाम मंदिर में अपनी प्रैक्टिस करते रहते। ऋषभ के साथ शिवम भी हॉकी की प्रैक्टिस करते थे। इन दोनों को यहां देख पूर्व अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी सुबोध खंडकर ने इन्हें तराशना शुरू किया। सुबोध के प्रयास कुछ ही महीने बाद ऋषभ को पहले स्टेट और बाद में नेशनल स्तर पर खेलने का मौका मिला। वहीं, शिवम ने भी लगातार बेहतर प्रदर्शन करते हुए अंडर 18 एशिया कप में भारत की टीम में जगह बनाने का मौका मिला। दोनों भाइयों से प्रेरित होकर सौरभ ने भी हॉकी थामी और अंडर 18 एशिया कप में भारत की ओर से धुआंधार शॉट लगाए।
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सौरभ और शिवम का चयन हॉकी प्रीमियर लीग में हो गया है। सौरभ इंडियन कोटेक की टीम से और शिवम इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन की ओर से अपनी हॉकी का जलवा दिखाएंगे।
बेटे के पासपोर्ट को नहीं थे रुपये
केशवानंद बनाते हैं कि 2016 में छोटे बेटे सौरभ का चयन एशिया हॉकी गोल्ड कप के लिए हुआ था। पहली बार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेलने का मौका तो मिला था, पर ढाका जाने के लिए पासपोर्ट बनवाने रुपये नहीं थे। किसी प्रकार से अपने सहयोगियों की मदद ली और बेटे के पासपोर्ट के लिए रुपये एकत्र कर उसे मैच खेलने भेजा, इसमें भारत को ट्रॉफी जिताने में सौरभ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
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खिलाड़ियों का सफर
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ऋषभ आनंद
2010 में केडी सिंह बाबू नेशनल सब जूनियर
2014 में जूनियर ग्रामीण नेशनल
2015 में स्कूल नेशनल
2015 में एनसीसी नेशनल हाकी
2016 में जूनियर नेशनल
2018 में कस्टम की ओर से कोलकाता हाकी लीग
शिवम आनंद
2014 में स्कूल नेशनल
2015 में सब जूनियर नेशनल
2016 में नई दिल्ली की ओर से जूनियर नेशनल
2016 में ढाका में एशिया कप
2017 में रायपुर की ओर से जूनियर नेशनल
2018 में भोपाल की ओर से जूनियर नेशनल
2018 में इंडियन आयल कोर्पोेरेशन की ओर से बंग्लूरू हॉकी लीग
2018 में थाईलैंड में जूनियर हॉकी लीग
सौरभ आनंद
2013 में केडी सिंह बाबू सब जूनियर
2014 में दिल्ली की ओर से स्कूल नेशनल
2014 में हरियाणा की ओर से ग्रामीण नेशनल
2016 में सैफई की ओर से सब जूनियर नेशनल
2016 में एशिया गोल्ड कप
2018 में भोपाल की ओर से जूनियर नेशनल
2017 में दिल्ली की ओर से स्कूल नेशनल
2018 में नई दिल्ली की ओर से खेलो इंडिया
2018 में बैंगलोर हॉकी लीग इंडियन कोटेक की ओर से