{"_id":"5cd9c4e1bdec2207903d5507","slug":"11557775585-jhansi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"इस बार हज यात्री लखनऊ से जाएंगे जद्दा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इस बार हज यात्री लखनऊ से जाएंगे जद्दा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इस बार हज यात्री लखनऊ से जाएंगे जद्दा
झांसी। इस बार सऊदी अरब ने बड़ा बदलाव किया है। पहले लखनऊ से जाने वाले हज यात्री सीधे मदीने जाते थे। वह वहां पर आठ दिन रुकने के बाद मक्के के लिए रवाना होते थे लेकिन इस बार हवाई जहाज लखनऊ से जद्दा जाएगा। जद्दा से हज यात्रियों को बस से मक्का रवाना किया जाएगा। इसलिए हज यात्रियों को लखनऊ हज हाउस से ही एहराम (चादर के दो टुकड़े) बांधना होगा। हज के लिए उड़ानें भी जून के अंतिम सप्ताह या जुलाई के पहले सप्ताह से शुरू होंगी। झांसी मंडल से भी काफी संख्या में हज यात्री रवाना होंगे। इसके लिए जल्दी ही अंतिम सूची भी सेंट्रल हज कमेटी जारी करेगी।
हज यात्री मक्के में सबसे पहले पहुंचने के बाद खाने काबा का तवाफ करते हैं। तवाफ भी एहराम की हालत में होता है। अगर सीधे हज यात्री मक्का जाते हैं तो उनको एहराम बांधने के साथ यह भी नियत करनी होती है कि अल्लाह उनका उमरा और हज कबूल फरमाए। मक्का पवित्र शहर है, इसलिए काबा के ऊपर से कोई उड़ान नहीं गुजरती है। हज यात्रा के दौरान कई जगह चेक प्वाइंट बनाए जाने की वजह से बस से जद्दा से मक्का पहुंचने में करीब चार से पांच घंटे लगते हैं।
एहराम बांधने के बाद हज यात्रियों पर तमाम तरह की बंदिश लग जाती हैं। सफर के दौरान उनसे गलतियां होने की आशंका अधिक होती है। इसलिए उनकी सहूलियत के लिए कहा गया है कि हवाई जहाज में ही ऐलान होने के बाद नियत करें। एहराम की हालत में बालों पर कंघी भी न करें। अगर एक बाल भी टूट गया तो दम देना पड़ेगा। हज यात्रियों को हज की ट्रेनिंग देते समय एहराम बांधने का भी तरीका बताया जा रहा है। शारिक अलवी, मास्टर ट्रेनर, स्टेट हज कमेटी
विज्ञापन
विज्ञापन
झांसी। इस बार सऊदी अरब ने बड़ा बदलाव किया है। पहले लखनऊ से जाने वाले हज यात्री सीधे मदीने जाते थे। वह वहां पर आठ दिन रुकने के बाद मक्के के लिए रवाना होते थे लेकिन इस बार हवाई जहाज लखनऊ से जद्दा जाएगा। जद्दा से हज यात्रियों को बस से मक्का रवाना किया जाएगा। इसलिए हज यात्रियों को लखनऊ हज हाउस से ही एहराम (चादर के दो टुकड़े) बांधना होगा। हज के लिए उड़ानें भी जून के अंतिम सप्ताह या जुलाई के पहले सप्ताह से शुरू होंगी। झांसी मंडल से भी काफी संख्या में हज यात्री रवाना होंगे। इसके लिए जल्दी ही अंतिम सूची भी सेंट्रल हज कमेटी जारी करेगी।
हज यात्री मक्के में सबसे पहले पहुंचने के बाद खाने काबा का तवाफ करते हैं। तवाफ भी एहराम की हालत में होता है। अगर सीधे हज यात्री मक्का जाते हैं तो उनको एहराम बांधने के साथ यह भी नियत करनी होती है कि अल्लाह उनका उमरा और हज कबूल फरमाए। मक्का पवित्र शहर है, इसलिए काबा के ऊपर से कोई उड़ान नहीं गुजरती है। हज यात्रा के दौरान कई जगह चेक प्वाइंट बनाए जाने की वजह से बस से जद्दा से मक्का पहुंचने में करीब चार से पांच घंटे लगते हैं।
विज्ञापन
एहराम बांधने के बाद हज यात्रियों पर तमाम तरह की बंदिश लग जाती हैं। सफर के दौरान उनसे गलतियां होने की आशंका अधिक होती है। इसलिए उनकी सहूलियत के लिए कहा गया है कि हवाई जहाज में ही ऐलान होने के बाद नियत करें। एहराम की हालत में बालों पर कंघी भी न करें। अगर एक बाल भी टूट गया तो दम देना पड़ेगा। हज यात्रियों को हज की ट्रेनिंग देते समय एहराम बांधने का भी तरीका बताया जा रहा है। शारिक अलवी, मास्टर ट्रेनर, स्टेट हज कमेटी
विज्ञापन