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मायावती ने गलत बुंदेलखंड का गलत नक् शा पास किया-Cordination
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बुंदेलखंड का नक्शा स्पष्ट हो तो तीन माह में अलग राज्य- उमा
झांसी। लोकसभा चुनाव आने से पहले केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री उमा भारती ने अलग बुंदेलखंड का मामला फिर से उठाया है। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड का नक्शा स्पष्ट नहीं है। यदि नक्शा स्पष्ट हो जाए तो तीन महीने में अलग बुंदेलखंड राज्य बनवा देंगे।
केंद्रीय मंत्री ने 2011 में सबसे पहले ललितपुर में अलग बुंदेलखंड राज्य की वकालत की थी। कुछ दिनों के बाद चुनावी जनसभा में उन्होंने केंद्र में भाजपा की सरकार बनने पर तीन साल में अलग राज्य के गठन की घोषणा की थी, लेकिन पांच साल बीत गए और अब तक इस दिशा में कुछ नहीं हुआ। पहले उन्होंने कहा था कि मध्यप्रदेश तैयार नहीं है। अब उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि बुंदेलखंड का नक्शा स्पष्ट नहीं है। राज्य का गठन जबरन नहीं होता, बल्कि जनसमर्थन से होता है। अब राज्य के लिए समर्पित नेता नहीं रहे। पूर्व सांसद लक्ष्मी नारायण नायक और शंकर लाल मेहरोत्रा ने बुंदेलखंड की लड़ाई लड़ी थी। मध्यप्रदेश के जिले अलग राज्य के लिए तैयार नहीं हैं। चूंकि मैं मध्यप्रदेश से आती हूं, इसलिए इसका महत्व समझती हूं।
उन्होंने कहा कि उप्र के केवल सात जिलों से बुंदेलखंड नहीं बन सकता। इन जिलों के अलावा अलग राज्य की मांग कर रहे लोगों के पास बुंदेलखंड का कोई नक्शा नहीं है। मध्यप्रदेश को इसमें जोड़ना गलत है। मैं अपने वायदे पर अटल हूं, बशर्ते अलग राज्य का सही नक्शा बताया जाए। भाजपा छोटे राज्यों की पक्षधर है। यदि सही नक्शा आ जाए तो तीन महीने में अलग बुंदेलखंड राज्य बनवा देंगे। पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने जिस बुंदेलखंड राज्य का नक्शा प्रस्तावित किया है, वह बिल्कुल गलत है।
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झांसी। लोकसभा चुनाव आने से पहले केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री उमा भारती ने अलग बुंदेलखंड का मामला फिर से उठाया है। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड का नक्शा स्पष्ट नहीं है। यदि नक्शा स्पष्ट हो जाए तो तीन महीने में अलग बुंदेलखंड राज्य बनवा देंगे।
केंद्रीय मंत्री ने 2011 में सबसे पहले ललितपुर में अलग बुंदेलखंड राज्य की वकालत की थी। कुछ दिनों के बाद चुनावी जनसभा में उन्होंने केंद्र में भाजपा की सरकार बनने पर तीन साल में अलग राज्य के गठन की घोषणा की थी, लेकिन पांच साल बीत गए और अब तक इस दिशा में कुछ नहीं हुआ। पहले उन्होंने कहा था कि मध्यप्रदेश तैयार नहीं है। अब उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि बुंदेलखंड का नक्शा स्पष्ट नहीं है। राज्य का गठन जबरन नहीं होता, बल्कि जनसमर्थन से होता है। अब राज्य के लिए समर्पित नेता नहीं रहे। पूर्व सांसद लक्ष्मी नारायण नायक और शंकर लाल मेहरोत्रा ने बुंदेलखंड की लड़ाई लड़ी थी। मध्यप्रदेश के जिले अलग राज्य के लिए तैयार नहीं हैं। चूंकि मैं मध्यप्रदेश से आती हूं, इसलिए इसका महत्व समझती हूं।
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उन्होंने कहा कि उप्र के केवल सात जिलों से बुंदेलखंड नहीं बन सकता। इन जिलों के अलावा अलग राज्य की मांग कर रहे लोगों के पास बुंदेलखंड का कोई नक्शा नहीं है। मध्यप्रदेश को इसमें जोड़ना गलत है। मैं अपने वायदे पर अटल हूं, बशर्ते अलग राज्य का सही नक्शा बताया जाए। भाजपा छोटे राज्यों की पक्षधर है। यदि सही नक्शा आ जाए तो तीन महीने में अलग बुंदेलखंड राज्य बनवा देंगे। पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने जिस बुंदेलखंड राज्य का नक्शा प्रस्तावित किया है, वह बिल्कुल गलत है।
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