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कोतवाली से मिनर्वा चौराहा तक आवारा जानवरों का डेरा-City
Updated Fri, 10 Aug 2018 06:24 PM IST
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कोतवाली से मिनर्वा चौराहा तक आवारा जानवरों का डेरा
टैग: घूमती आफत
- वाहनों के गुजरने से अक्सर बन जाती जाम की स्थिति
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। शहर के अधिक भीड़भाड़ वाले मार्ग में से एक कोतवाली से मिनर्वा चौराहे तक जगह-जगह आवारा जानवर जगह घेरे रहते हैं। इससे खासकर वाहन चालकों को निकलने में परेशानी होती है। अक्सर जाम की स्थिति बन जाती है।
शहर में लगभग 50 हजार से अधिक छुट्टा जानवर घूम रहे हैं। इनकी संख्या कम होने के बजाए बढ़ती जा रही है। आवारा जानवरों को रखने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं होने के कारण ये सड़कों पर डेरा डाले रहते हैं। इससे लोगों को आवागमन में न सिर्फ असुविधा होती है, बल्कि कई बार तो उनकी जान पर बन आती है। इन दिनों कोतवाली, रानी महल और मिनर्वा चौराहे के आसपास बहुत अधिक संख्या में आवारा जानवर बैठे अथवा खड़े रहते हैं। इस प्रमुख चौराहे पर इन जानवरों द्वारा जगह घेरने से मार्ग संकरा हो जाता है। इससे लोगों को निकलने में बहुत असुविधा होती है। कोतवाली की दीवार से सटी और जिला अस्पताल के बगल में लगी फलों की दुकानों पर ये जानवर मुंह मारते हैं। जब दुकानदार जानवरों को भगाते हैं तो ये इधर-उधर भागने लगते हैं। ऐसे में राहगीरों के चोटिल होने की संभावना रहती है।
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कोतवाली से मिनर्वा चौराहा तक आवारा जानवरों का डेरा
टैग: घूमती आफत
- वाहनों के गुजरने से अक्सर बन जाती जाम की स्थिति
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। शहर के अधिक भीड़भाड़ वाले मार्ग में से एक कोतवाली से मिनर्वा चौराहे तक जगह-जगह आवारा जानवर जगह घेरे रहते हैं। इससे खासकर वाहन चालकों को निकलने में परेशानी होती है। अक्सर जाम की स्थिति बन जाती है।
शहर में लगभग 50 हजार से अधिक छुट्टा जानवर घूम रहे हैं। इनकी संख्या कम होने के बजाए बढ़ती जा रही है। आवारा जानवरों को रखने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं होने के कारण ये सड़कों पर डेरा डाले रहते हैं। इससे लोगों को आवागमन में न सिर्फ असुविधा होती है, बल्कि कई बार तो उनकी जान पर बन आती है। इन दिनों कोतवाली, रानी महल और मिनर्वा चौराहे के आसपास बहुत अधिक संख्या में आवारा जानवर बैठे अथवा खड़े रहते हैं। इस प्रमुख चौराहे पर इन जानवरों द्वारा जगह घेरने से मार्ग संकरा हो जाता है। इससे लोगों को निकलने में बहुत असुविधा होती है। कोतवाली की दीवार से सटी और जिला अस्पताल के बगल में लगी फलों की दुकानों पर ये जानवर मुंह मारते हैं। जब दुकानदार जानवरों को भगाते हैं तो ये इधर-उधर भागने लगते हैं। ऐसे में राहगीरों के चोटिल होने की संभावना रहती है।
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