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ट्रेनों से गायब हुआ रेल नीर
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ट्रेनों में ‘रेल नीर’ की जगह लोकल पानी
झांसी। ट्रेनों में मुसाफिरों को रेल नीर के बजाए लोकल कंपनी का पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। मजबूरी में यात्री इस पानी को पूरे दाम अदा कर खरीद रहे हैं। इससे पानी बेचने वालों को खासा मुनाफा हो रहा है। वहीं दूसरी ओर रेलवे प्रशासन रेल नीर की पूरी उपलब्धता का दावा कर रहा है।
रेल प्रशासन ने ट्रेनों में यात्रियों की सुविधा के लिए रेल नीर (पानी की बोतल) का आदेश जारी किया है। शुरू में तो वेंडरों के हाथ में रेल नीर दिखाई दिया, लेकिन धीरे - धीरे रेल नीर ट्रेनों से गायब हो गया। इन दिनों आलम यह है कि रेल नीर की पर्याप्त आपूर्ति नहीं मिलने का हवाला देकर उसके स्थान पर अन्य ब्रांडों का लोकल पानी बेचा जा रहा है। जब यात्री वेंडर से रेल नीर के बारे में पूछता है तो एक उत्तर मिलता है कि रेल नीर नहीं आ रहा है।
मंडल के अधिकारियोें के औचक निरीक्षण में कई बार पानी के गोरखधंधे की पोल खुली, लेकिन आज तक इस पर लगाम नहीं लग सकी। दो दिन पहले ही सीनियर डीसीएम व डीसीएम ने 18 ट्रेनों में औचक जांच कर साढ़े सात सौ पानी की बोतलें पकड़ी थी, लेकिन उसके बाद भी अवैध कारोबार नहीं रुक सका।
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कमीशन के चक्कर में बिक रहा घटिया पानी
बताया गया है कि बारह रेल नीर की बोतलें 146 रुपये में पैंट्री कार मैनेजर को मिलती हैं जो 180 रुपये में बिकती हैं। ऐसे में मैनेजर को 34 रुपये कमीशन ही मिलता है। वहीं, लोकल कंपनियों की एक बोतल औसतन छह से सात रुपये में मिलती है। ऐसे में बारह बोतलों पर 70 से 80 रुपये की बचत होती है।
इस तरह चलता है गोरखधंधा
रेलवे ने सिर्फ रेल नीर पानी की बोतलें ही बेचने की अनुमति दी हैं, लेकिन कई पैंट्रीकार मैनेजर और वेंडर दूसरे और नकली ब्रांड की बोतलें खुलेआम बेचकर मुनाफा कमाते हैं। चेकिंग से बचने के लिए रेल नीर की बोतलें रख ली जाती हैं लेकिन दूसरे ब्रांड की बोतलें बेची जाती हैं।
ट्रेनों में रेल नीर पानी की कोई कमी नहीं है। समय - समय पर उनकी टीमें ट्रेनों में चेकिंग करती हैं। डा. जितेंद्र कुमार, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक
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झांसी। ट्रेनों में मुसाफिरों को रेल नीर के बजाए लोकल कंपनी का पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। मजबूरी में यात्री इस पानी को पूरे दाम अदा कर खरीद रहे हैं। इससे पानी बेचने वालों को खासा मुनाफा हो रहा है। वहीं दूसरी ओर रेलवे प्रशासन रेल नीर की पूरी उपलब्धता का दावा कर रहा है।
रेल प्रशासन ने ट्रेनों में यात्रियों की सुविधा के लिए रेल नीर (पानी की बोतल) का आदेश जारी किया है। शुरू में तो वेंडरों के हाथ में रेल नीर दिखाई दिया, लेकिन धीरे - धीरे रेल नीर ट्रेनों से गायब हो गया। इन दिनों आलम यह है कि रेल नीर की पर्याप्त आपूर्ति नहीं मिलने का हवाला देकर उसके स्थान पर अन्य ब्रांडों का लोकल पानी बेचा जा रहा है। जब यात्री वेंडर से रेल नीर के बारे में पूछता है तो एक उत्तर मिलता है कि रेल नीर नहीं आ रहा है।
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मंडल के अधिकारियोें के औचक निरीक्षण में कई बार पानी के गोरखधंधे की पोल खुली, लेकिन आज तक इस पर लगाम नहीं लग सकी। दो दिन पहले ही सीनियर डीसीएम व डीसीएम ने 18 ट्रेनों में औचक जांच कर साढ़े सात सौ पानी की बोतलें पकड़ी थी, लेकिन उसके बाद भी अवैध कारोबार नहीं रुक सका।
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कमीशन के चक्कर में बिक रहा घटिया पानी
बताया गया है कि बारह रेल नीर की बोतलें 146 रुपये में पैंट्री कार मैनेजर को मिलती हैं जो 180 रुपये में बिकती हैं। ऐसे में मैनेजर को 34 रुपये कमीशन ही मिलता है। वहीं, लोकल कंपनियों की एक बोतल औसतन छह से सात रुपये में मिलती है। ऐसे में बारह बोतलों पर 70 से 80 रुपये की बचत होती है।
इस तरह चलता है गोरखधंधा
रेलवे ने सिर्फ रेल नीर पानी की बोतलें ही बेचने की अनुमति दी हैं, लेकिन कई पैंट्रीकार मैनेजर और वेंडर दूसरे और नकली ब्रांड की बोतलें खुलेआम बेचकर मुनाफा कमाते हैं। चेकिंग से बचने के लिए रेल नीर की बोतलें रख ली जाती हैं लेकिन दूसरे ब्रांड की बोतलें बेची जाती हैं।
ट्रेनों में रेल नीर पानी की कोई कमी नहीं है। समय - समय पर उनकी टीमें ट्रेनों में चेकिंग करती हैं। डा. जितेंद्र कुमार, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक