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तिब्बती माकेट-City

Wed, 15 Nov 2017 10:18 PM IST
Updated Wed, 15 Nov 2017 10:18 PM IST
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तिब्बती माकेट-City
फोटो
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अपनी संस्कृति से रूबरू कराएंगे तिब्बती व्यापारी
सब हेड: 40 वर्ष से लगातार तीन माह को आ रहे हैं शहर में
क्रासर:
दलाई लामा की करते है पूजा, एप्रन पोशाक है महिला के विवाहित होने की पहचान
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
अपने व्यापारिक गुणों से लुभाने के साथ अपने संस्कृति से पहचान कराने वाले तिब्बती व्यापारी एक बार फिर हमारे शहर में आ चुके हैं। इलाइट चौराहे के पास पिछले चालीस सालों से तीन माह के लिए लगातार आ रहे ये व्यापारी अपने गुरु दलाई लामा की प्रति अगाध श्रद्धा रखते हैं। एप्रन ड्रेस इस वर्ग की विवाहित महिलाओं की पहचान है।
महानगर में पिछले 40 वर्षों से लगातार नवंबर से जनवरी तक सर्दी के सीजन में तिब्बती व्यापारी गर्म कपडे़ बेचने आते है। ग्राहकों का सम्मान और एक दाम इस मार्केट की बड़ी पहचान बन चुकी है। मार्केट में पांच रंगों लाल, नीला, पीला, हरा, सफेद जो इंद्रधनुष के रंग है वाले थारचो झंडे लगे है। इनमें सफेद झंडों पर तिब्बती भाषा शब्द और घोड़ा बने हुए है। यह झंडे तिब्बतियों में बेहद शुभ माने जाते है। तिब्बती रिफ्यूजी स्वेटर मार्केट झांसी की प्रधान डोलमा के मुताबिक तिब्बती महिलाओं की खास ड्रेस होती है। एप्रन ड्रेस महिला के शादीशुदा होने की पहचान है। चमकीले पोलिएस्टर कपडे़ से निर्मित एप्रन कपडे़ के ऊ पर पहना जाता है। शादीशुदा तिब्बती महिलाओं के एप्रन रंग बिरंगा होता है। यह कमर से घुटनों तक रहता है। जिस तरह से सिंदूर लगाए महिला के विवाहित होना माना जाता है, उसी प्रकार से यह एप्रन पहनना भी तिब्बती महिला के विवाहित होना माना जाता है। पुरुष बुंचू पहनते है।
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तीन माह के बाजार में सिर्फ 10 दिसंबर को ही मार्केट बंद रहता है, क्योंकि इस दिन तिब्बतियों के गुरु दलाई लाला को शांति का नोबेल पुरस्कार मिला था। सभी तिब्बती व्यापारी इस दिन कार्यक्रम आयोजित कर दलाई लामा की पूजा करते है और उन्हें सफे द स्कार्फ जिसे तिब्बती भाषा में खाता कहते है, चढ़ाते है।
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बाक्स
समानता का है बोलबाला
पहाड़ निवासी तिब्बती समुदाय में लिंगभेद न के बराबर है। यही कारण है कि इस मार्के ट में लगी 20 दुकानों पर करीब 50 तिब्बती महिलाएं व्यापार संहाले है। प्रधान डोलमा के मुताबिक तीन माह के व्यापारिक सीजन में बच्चों को बोर्डिंग स्कूल में पढ़ने को भेज दिया जाता है।

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घाटे का नहीं है काम
पिछले कुछ वर्षों से झांसी में सर्दी में तेजी नहीं रही। इससे गर्म कपड़ों के बाजार में फर्क पड़ा और माल बचा रहा। लेकिन यह माल हिल स्टेशन पर बेच दिया जाता है। इससे तिब्बती व्यापारी घाटे से बच जाते है। गर्म स्वेटर, जैकेट तिब्बती व्यापारी पंजाब, हिमाचल की वूलन कंपनियों से खरीदते है। तिब्बती व्यापारियों के अनुसार जीएसटी के चलते इस बार माल देर से मिला। इनमें श्रीग हामो पोटा ने बताया कि तिब्बती पूरे भारत में गर्म कपडे़ बेचते है।


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कई रेंज है वूलन और जैकेट में
तिब्बती मार्केट में बच्चों के स्वेटर, जैकेट से लेकर महिलाओं के लिए पार्टी वियर शॉल, जैकेट, टाप, बेबी साफ्ट वूलन शाल आदि विभिन्न दामों और डिजाइनों में है। इनमें गले में डालने वाला लेडीज पॉन चू, जिसे साड़ी, सूट में पहना जाता है आकर्षण है। इनकी रेंज 670 रुपये से शुरू है। इसके अलावा साफ्ट वूलन के स्टॉल 300 रुपये से, बच्चों के स्वेटर 190 रुपये से, बेबी साफ्ट वूलन शॉल 190 रुपये से, एंब्रोजी पार्टी वियर शॉल 580 रुपये से, हाफ स्वेटर 330 रुपये से, लेडीज में लॉग स्वेटर 550 रुपये से, फुल स्वेटर 400 रुपये से, लेडीज जैकेट काटन व लेदर में 700 रुपये से, स्वेटर डिजाइन जैकेट 1000 रुपये की रेंज से प्रारंभ है।
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