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टैक्स: पूरे देश एक जैसी होगी ई वे बिल की व्यवस् था-City
Updated Wed, 06 Sep 2017 08:43 PM IST
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बहती, परिवहन मेमो सहित अन्य फार्म होंगे होंगे बंद
सब हेड: एक अक्तूबर से व्यवस्था लागू करने की तैयारी
क्रासर
पूरे देश में एक जैसी होगी ई-वे बिल की व्यवस्था
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
देश में एक टैक्स ‘जीएसटी’ की प्रणाली लागू होने के बाद उत्तर प्रदेश में 16 अगस्त से दूसरे राज्यों से माल मंगाने के लिए ई-वे बिल की व्यवस्था शुरू कर दी गई थी। बेहती और अन्य फार्म भी नए रूप में लागू कर दिए गए। मगर, व्यापारियों की समस्या को देखते हुए अब प्रदेश में दोबारा सभी फार्म बंद करने की तैयारी चल रही हैं। एक अक्तूबर से ई-वे बिल की व्यवस्था केंद्रीय स्तर पर लागू करने की तैयारी चल रही है।
केंद्र सरकार ने एक देश, एक टैक्स का नारा देकर गुड्स एंड सर्विस टैक्स एक जुलाई से लागू कर दिया। कारोबारियों को भरोसा था कि अब जीएसटी में दूसरे राज्य से माल मंगाने पर फार्म 38 (आयात घोषणापत्र), दूसरे राज्य में माल भेजने के लिए फार्म 21 (परिवहन मेमो) और प्रदेश से गुजरने के लिए सीमा में प्र्रवेश करने के लिए बहती नहीं बनवानी होगी। मगर, उत्तर प्रदेश में वाणिज्यकर विभाग ने उक्त फार्मों के नाम बदलकर 16 अगस्त से दोबारा चालू कर दिए थे। नई व्यवस्था में दूसरे राज्य से 50 हजार से अधिक का माल मंगाने पर लगने वाले आयात घोषणा पत्र को ई-वे बिल और बहती को टीडीएफ (ट्रांजिस्ट डिकलरेशन फार्म) नाम दे दिया गया। माल मंगाने के लिए फार्मों की दोबारा व्यवस्था शुरू होने से व्यापारी वर्ग बेहद नाराज चल रहा है। व्यापारियों का कहना है कि केंद्र सरकार ने जीएसटी लागू कर उनका व्यापार करना मुश्किल कर दिया है।
व्यापारियों की इन्हीं सब समस्याओं को देखते हुए केंद्र सरकार एक अक्तूबर से पूरे देश में एक ई-वे बिल की व्यवस्था लागू करने जा रही है। इस व्यवस्था में 50 हजार से अधिक का माल मंगाने पर एक ही फार्म ई-वे बिल का उपयोग करना होगा। प्रदेश में बाकी अन्य फर्म खत्म हो जाएंगे।
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‘केंद्र सरकार पूरे देश में एक ही ई-वे बिल लाने पर विचार कर रही है। मगर, जब तक सरकारी तौर पर इसकी घोषणा नहीं हो जाती है, तब तक कुछ भी कहना गलत होगा। ’
एसएस मिश्रा, ज्वाइंट कमिश्नर (कार्यपालक) वाणिज्यकर।
अभी ये है व्यवस्था
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- उत्तर प्रदेश के बाहर के किसी स्थान से प्रदेश के अंदर 50000 रुपये अथवा उससे अधिक मूल्य के माल को मंगाने पर ई-वे बिल 01 लगाना पड़ता है।
- उत्तर प्रदेश के अंदर या दूसरे प्रदेश में एक लाख रुपये या उससे अधिक मूल्य के मेंथा ऑयल, सुपारी, लोहा और इस्पात तथा सभी प्रकार के खाद्य तेल व वनस्पति घी ई-वे बिल 02 लगाना पड़ता है।
- उत्तर प्रदेश के अंदर ई-कामर्स ऑपरेटरों अथवा उनके द्वारा अधिकृत कोरियर अभिकर्ताओं से माल मंगाने पर ई-वे बिल 03 लगाना पड़ता है।
- उत्तर प्रदेश की सीमा से 50000 रुपये या उससे अधिक मूल्य का माल निकालने पर टीडीएफ-01 फार्म जनरेट करना पड़ता है।
- यदि कोई व्यक्ति अपने व्यक्तिगत उपयोग के लिए निजी वाहन से व्यक्तिगत सामान के रूप में या किसी सार्वजनिक यात्री परिवहन वाहन के माध्यम से अपने पहचान संबंधी दस्तावेजों के साथ 50,000 रुपये से कम मूल्य का माल लाता है तो इसमें ई-वे बिल 01 की आवश्यकता नहीं है।
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सब हेड: एक अक्तूबर से व्यवस्था लागू करने की तैयारी
क्रासर
पूरे देश में एक जैसी होगी ई-वे बिल की व्यवस्था
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
देश में एक टैक्स ‘जीएसटी’ की प्रणाली लागू होने के बाद उत्तर प्रदेश में 16 अगस्त से दूसरे राज्यों से माल मंगाने के लिए ई-वे बिल की व्यवस्था शुरू कर दी गई थी। बेहती और अन्य फार्म भी नए रूप में लागू कर दिए गए। मगर, व्यापारियों की समस्या को देखते हुए अब प्रदेश में दोबारा सभी फार्म बंद करने की तैयारी चल रही हैं। एक अक्तूबर से ई-वे बिल की व्यवस्था केंद्रीय स्तर पर लागू करने की तैयारी चल रही है।
केंद्र सरकार ने एक देश, एक टैक्स का नारा देकर गुड्स एंड सर्विस टैक्स एक जुलाई से लागू कर दिया। कारोबारियों को भरोसा था कि अब जीएसटी में दूसरे राज्य से माल मंगाने पर फार्म 38 (आयात घोषणापत्र), दूसरे राज्य में माल भेजने के लिए फार्म 21 (परिवहन मेमो) और प्रदेश से गुजरने के लिए सीमा में प्र्रवेश करने के लिए बहती नहीं बनवानी होगी। मगर, उत्तर प्रदेश में वाणिज्यकर विभाग ने उक्त फार्मों के नाम बदलकर 16 अगस्त से दोबारा चालू कर दिए थे। नई व्यवस्था में दूसरे राज्य से 50 हजार से अधिक का माल मंगाने पर लगने वाले आयात घोषणा पत्र को ई-वे बिल और बहती को टीडीएफ (ट्रांजिस्ट डिकलरेशन फार्म) नाम दे दिया गया। माल मंगाने के लिए फार्मों की दोबारा व्यवस्था शुरू होने से व्यापारी वर्ग बेहद नाराज चल रहा है। व्यापारियों का कहना है कि केंद्र सरकार ने जीएसटी लागू कर उनका व्यापार करना मुश्किल कर दिया है।
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व्यापारियों की इन्हीं सब समस्याओं को देखते हुए केंद्र सरकार एक अक्तूबर से पूरे देश में एक ई-वे बिल की व्यवस्था लागू करने जा रही है। इस व्यवस्था में 50 हजार से अधिक का माल मंगाने पर एक ही फार्म ई-वे बिल का उपयोग करना होगा। प्रदेश में बाकी अन्य फर्म खत्म हो जाएंगे।
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‘केंद्र सरकार पूरे देश में एक ही ई-वे बिल लाने पर विचार कर रही है। मगर, जब तक सरकारी तौर पर इसकी घोषणा नहीं हो जाती है, तब तक कुछ भी कहना गलत होगा। ’
एसएस मिश्रा, ज्वाइंट कमिश्नर (कार्यपालक) वाणिज्यकर।
अभी ये है व्यवस्था
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- उत्तर प्रदेश के बाहर के किसी स्थान से प्रदेश के अंदर 50000 रुपये अथवा उससे अधिक मूल्य के माल को मंगाने पर ई-वे बिल 01 लगाना पड़ता है।
- उत्तर प्रदेश के अंदर या दूसरे प्रदेश में एक लाख रुपये या उससे अधिक मूल्य के मेंथा ऑयल, सुपारी, लोहा और इस्पात तथा सभी प्रकार के खाद्य तेल व वनस्पति घी ई-वे बिल 02 लगाना पड़ता है।
- उत्तर प्रदेश के अंदर ई-कामर्स ऑपरेटरों अथवा उनके द्वारा अधिकृत कोरियर अभिकर्ताओं से माल मंगाने पर ई-वे बिल 03 लगाना पड़ता है।
- उत्तर प्रदेश की सीमा से 50000 रुपये या उससे अधिक मूल्य का माल निकालने पर टीडीएफ-01 फार्म जनरेट करना पड़ता है।
- यदि कोई व्यक्ति अपने व्यक्तिगत उपयोग के लिए निजी वाहन से व्यक्तिगत सामान के रूप में या किसी सार्वजनिक यात्री परिवहन वाहन के माध्यम से अपने पहचान संबंधी दस्तावेजों के साथ 50,000 रुपये से कम मूल्य का माल लाता है तो इसमें ई-वे बिल 01 की आवश्यकता नहीं है।