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झांसी हादसा: खाक हो गईं परिवार की खुशियां, टूट गए अरमान, बेटे के शव को देखकर बोला पिता- तुझे अफसर बनाने का था सपना
Fri, 15 Oct 2021 08:53 PM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
Published by: Vikas Kumar
Updated Fri, 15 Oct 2021 08:53 PM IST
सार
झांसी में मनौती पूरी होने पर शुक्रवार को दोपहर जवारे विसर्जन के लिए आ रहे श्रद्धालुओं से भरी एक ट्रैक्टर ट्राली चिरगांव थाना क्षेत्र स्थित छिरौना के पास भैंस सामने आने से खंदक में भरे पानी में पलट गई। इस दुर्घटना में पानी में डूबने और ट्राली के नीचे दबने से एक ही परिवार के ग्यारह लोगों की मौत हो गई।
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अपनों की मौत पर विलाप करे परिजन
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
चिरगांव में ट्रैक्टर पलटने से हुए हादसे में सास-बहू और दो बच्चों मौत हो गई। अनिल और पवन का तो सब कुछ उजड़ गया। हादसे में उनकी मां मुन्नी देवी, अनिल की पत्नी पूजा और बेटी कृस्या और पवन के बेटे अवि की मौत हो गई।
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दतिया के गांव पंडोखर में स्व. मोतीलाल के बेटे अनिल और पवन की पत्नियों को बच्चे होने पर मनौती पूरी करने के लिए नवरात्र में जवारे बोये गए थे। नौ दिनों से परिवार में उत्सव का माहौल था। दशहरा पर जवारे विसर्जित करने जाने के लिए बृहस्पतिवार रात तक तैयारियां चलती रहीं। सुबह सात बजे मोतीलाल की पत्नी मुन्नी देवी सभी परिजनों और रिश्तेदारों को ट्रैक्टर में लेकर छिरौना गांव के लिए निकलीं। मां मुन्नीदेवी, अनिल की पत्नी पूजा, अनिल की एक साल की बेटी कृस्या और पवन का बेटा अवि एक ही ट्रैक्टर में सवार हुए। इस बीच ट्रैक्टर पलटने से हुए हादसे में चारों की मौत हो गई। अनिल और पवन का रो-रोकर बुरा हाल था।
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छह महीने पहले हुई थी पिता की मौत
अनिल और पवन के पिता की भी छह महीने पहले मौत हुई है। पवन ने बताया कि उसके पिता मोतीलाल किसी काम से गांव पंडोखर के पास ही गए थे। इस दौरान हादसे में उनकी मौत हुई थी। पिता की मौत के बाद परिवार संभला ही था कि अब हादसे ने सब कुछ छीन लिया।
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छह साल पहले हुई थी दोनों भाइयों की शादी
अनिल और पवन की शादी छह साल पहले एक ही मंडप में हुई थी। हादसे में अनिल की पत्नी पूजा की मौत हो गई। अनिल ने बताया कि पत्नी ने बेटी को पढ़ाने और शादी के लिए तमाम अरमान संजोए थे। मगर उसके सपने अधूरे ही रह गए। जबकि हादसे में पवन की पत्नी निशा घायल है।
मेरी तो खुशी छिन गई
तीन साल के बेटे अवि के शव को देखकर पवन फफक पड़ा। रोते-रोते बोला कि मेरा लाडला चला गया। पवन ने बताया कि बेटा मुझे अपनी जान से ज्यादा प्यारा था। उसे पढ़ा-लिखाकर अफसर बनाने का सपना देखा था। रोज शाम को काम से वापस आकर मेरे साथ खेलता और खुश होता। अब मेरी तो खुशी ही छिन गई।