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धर्म-कर्म में लीन रहने से दूर होंगी बुराईयां-City
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धर्म में लीन रहने से दूर होंगी बुराइयां
झांसी। संसार में व्यक्ति धर्म-कर्म में लीन रहेगा तो उसके अंदर की बुराइयां स्वत: समाप्त होने लगेंगी। यह उद्गार कथा व्यास पंडित अमर कृष्ण शास्त्री ने भागवतमहापुराण के पूजन के बाद कही।
उन्होंने कथा का प्रारंभ करने के पहले पंडाल में मौजूद श्रद्धालुओं से कहा कि भागवत कथा के श्रवण से व्यक्ति के सद्गुणों का विकास होता है। उसके अंदर के काम, क्रोध, लोभ, मोह आदि का विनाश हो जाता है। हमें जीवन में हमेशा अच्छे कार्य करते रहना चाहिए। भागवत कथा सुनने से पाप पुण्य में बदल जाते हैं। कथा की शुरूआत उन्होंने प्रसंग में कृष्ण की बाल लीला का वर्णन किया। बाल जीवन की उनकी मोहक प्रस्तुतियां दीं। कथा का प्रारंभ मुख्य यजमान नीतू-श्रीराम हयारण ने महापुराण का पूजन कर किया।
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झांसी। संसार में व्यक्ति धर्म-कर्म में लीन रहेगा तो उसके अंदर की बुराइयां स्वत: समाप्त होने लगेंगी। यह उद्गार कथा व्यास पंडित अमर कृष्ण शास्त्री ने भागवतमहापुराण के पूजन के बाद कही।
उन्होंने कथा का प्रारंभ करने के पहले पंडाल में मौजूद श्रद्धालुओं से कहा कि भागवत कथा के श्रवण से व्यक्ति के सद्गुणों का विकास होता है। उसके अंदर के काम, क्रोध, लोभ, मोह आदि का विनाश हो जाता है। हमें जीवन में हमेशा अच्छे कार्य करते रहना चाहिए। भागवत कथा सुनने से पाप पुण्य में बदल जाते हैं। कथा की शुरूआत उन्होंने प्रसंग में कृष्ण की बाल लीला का वर्णन किया। बाल जीवन की उनकी मोहक प्रस्तुतियां दीं। कथा का प्रारंभ मुख्य यजमान नीतू-श्रीराम हयारण ने महापुराण का पूजन कर किया।
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