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सिविक एमीनिटीज- संकरी गलियों से कचरा उठाएंगे ई रिक् शा-City
Updated Mon, 04 Sep 2017 09:32 PM IST
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ग्राफिक्स - ई-रिक्शा
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संकरी गलियों से कचरा लाएंगे ई-रिक्शा
सब हेड: बीस खरीदेगा नगर निगम, बायो कंपोस्ट प्लांट भी लगेगा
क्रासर
पार्कों में लगे पेड़-पौधों में डाली जाएगी जैविक खाद
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
संकरी गलियों से कचरा लादकर लाने के लिए नगर निगम जल्द ही बीस ई-रिक्शे खरीदेगा। निगम जल्द ही गीले कचरे से बायो कंपोस्ट खाद बनाएगा, ताकि इस खाद का उपयोग पार्कों के पेड़-पौधों में डालने में किया जा सके। बिना यूरिया की इस खाद से पौधे स्वस्थ रहेंगे।
स्मार्ट सिटी में पर्यावरण कम से कम प्रदूषित हो, इसके लिए नगर निगम ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। शहर में प्रतिदिन 250 टन से 300 टन तक कचरा निकलता है। दीपावली के आसपास 350 टन तक कचरा निकलता है। इस कचरे का व्यावसायिक उपयोग नहीं होता, बल्कि कचरे को डंपिंग साइट पर डाल दिया जाता है। डंपिंग साइट की कमी को देखते हुए अब कचरे का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करने का निर्णय लिया गया है। सूखा और गीला कचरा अलग-अलग इकट्ठा किया जा रहा है। गीले कचरे से मसीहागंज में नगर निगम की खंती के पास बायो कंपोस्ट प्लांट लगाया जाएगा। दूसरी ओर, नगर निगम ने तय किया है कि शहर की संकरी गलियों से कचरा इकट्ठा करने के लिए ई-रिक्शा चलाए जाएंगे। इन रिक्शों से यह फायदा होगा कि प्रदूषण बिल्कुल नहीं होगा। अभी गलियों में तिपहिया गाड़ियां जाती हैं, लेकिन कहीं चबूतरा तो कहीं ऊबड़-खाबड़ जगह होने के कारण गाड़ियों को आने-जाने में दिक्कत होती है। इस कारण पहले चरण में 20 ई-रिक्शा खरीदे जाएंगे।
सूखा कचरा
प्लास्टिक के कवर, बोतल, बाक्स, टॉफी, रबर, कागज, कप-प्लेट, फूलदान, चमड़ा बेल्ट, रेजर, ब्लेड, ट्यूब लाइट, पुराना सामान, सीएफएल, सौंदर्य प्रसाधन, एलईडी बल्ब, अखबार, टिन पैक आदि सूखा कचरा की श्रेणी में आता है। यह कचरा नीले रंग की डस्टबिन में रखकर कचरा वाले को दिया जाता है।
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गीला कचरा
पकाया या बिना पकाया भोजन, बेकार सब्जी, फल, अंडे के छिलके, फूलमाला, जूस, शौचालय में इस्तेमाल किया जाने वाला टिश्यू, टायलेट पेपर, चाय के बैग, कॉफी पाउडर, बगीचे से निकलने वाले खरपतवार इस श्रेणी में आते हैं। यह कचरा हरे रंग की डस्टबिन में रखकर कचरा वाले को दिया जाता है।
सहूलियत होगी
ई-रिक्शा और बायो कंपोस्ट प्लांट का काम टेंडर के माध्यम से पूरा कराया जाएगा। ई-रिक्शा से प्रदूषण नहीं होगा और गलियों से कचरा उठाने में आसानी हो जाएगी।
- डा. राकेश बाबू, नगर स्वास्थ्य अधिकारी
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संकरी गलियों से कचरा लाएंगे ई-रिक्शा
सब हेड: बीस खरीदेगा नगर निगम, बायो कंपोस्ट प्लांट भी लगेगा
क्रासर
पार्कों में लगे पेड़-पौधों में डाली जाएगी जैविक खाद
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
संकरी गलियों से कचरा लादकर लाने के लिए नगर निगम जल्द ही बीस ई-रिक्शे खरीदेगा। निगम जल्द ही गीले कचरे से बायो कंपोस्ट खाद बनाएगा, ताकि इस खाद का उपयोग पार्कों के पेड़-पौधों में डालने में किया जा सके। बिना यूरिया की इस खाद से पौधे स्वस्थ रहेंगे।
स्मार्ट सिटी में पर्यावरण कम से कम प्रदूषित हो, इसके लिए नगर निगम ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। शहर में प्रतिदिन 250 टन से 300 टन तक कचरा निकलता है। दीपावली के आसपास 350 टन तक कचरा निकलता है। इस कचरे का व्यावसायिक उपयोग नहीं होता, बल्कि कचरे को डंपिंग साइट पर डाल दिया जाता है। डंपिंग साइट की कमी को देखते हुए अब कचरे का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करने का निर्णय लिया गया है। सूखा और गीला कचरा अलग-अलग इकट्ठा किया जा रहा है। गीले कचरे से मसीहागंज में नगर निगम की खंती के पास बायो कंपोस्ट प्लांट लगाया जाएगा। दूसरी ओर, नगर निगम ने तय किया है कि शहर की संकरी गलियों से कचरा इकट्ठा करने के लिए ई-रिक्शा चलाए जाएंगे। इन रिक्शों से यह फायदा होगा कि प्रदूषण बिल्कुल नहीं होगा। अभी गलियों में तिपहिया गाड़ियां जाती हैं, लेकिन कहीं चबूतरा तो कहीं ऊबड़-खाबड़ जगह होने के कारण गाड़ियों को आने-जाने में दिक्कत होती है। इस कारण पहले चरण में 20 ई-रिक्शा खरीदे जाएंगे।
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सूखा कचरा
प्लास्टिक के कवर, बोतल, बाक्स, टॉफी, रबर, कागज, कप-प्लेट, फूलदान, चमड़ा बेल्ट, रेजर, ब्लेड, ट्यूब लाइट, पुराना सामान, सीएफएल, सौंदर्य प्रसाधन, एलईडी बल्ब, अखबार, टिन पैक आदि सूखा कचरा की श्रेणी में आता है। यह कचरा नीले रंग की डस्टबिन में रखकर कचरा वाले को दिया जाता है।
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गीला कचरा
पकाया या बिना पकाया भोजन, बेकार सब्जी, फल, अंडे के छिलके, फूलमाला, जूस, शौचालय में इस्तेमाल किया जाने वाला टिश्यू, टायलेट पेपर, चाय के बैग, कॉफी पाउडर, बगीचे से निकलने वाले खरपतवार इस श्रेणी में आते हैं। यह कचरा हरे रंग की डस्टबिन में रखकर कचरा वाले को दिया जाता है।
सहूलियत होगी
ई-रिक्शा और बायो कंपोस्ट प्लांट का काम टेंडर के माध्यम से पूरा कराया जाएगा। ई-रिक्शा से प्रदूषण नहीं होगा और गलियों से कचरा उठाने में आसानी हो जाएगी।
- डा. राकेश बाबू, नगर स्वास्थ्य अधिकारी