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45 फीट गहरे दलदल में समा गई महिला, मौत
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41- बक्सा क्षेत्र के जागरण पुर गांव में कुएं के बगल में स्थित गड्ढे में महिला के गिरने के बाद जेसीबी
- फोटो : JAUNPUR
बक्शा (जौनपुर)। क्षेत्र के जागनपुर गांव में रविवार को सुबह करीब छह बजे एक महिला घर के सामने दलदल में समा गई। पुलिस, फायर ब्रिगेड और एनडीआरएफ की टीम को बचाने के लिए बुलाया गया। आठ घंटे के प्रयास के बाद महिला को 45 फीट की गहराई से बाहर निकाला गया। उसकी मौत हो चुकी थी। राहत और बचाव के काम में ग्रामीण भी सहयोग करते रहे। जिस स्थान पर महिला धंसी वहां पहले कुआं था, जिसे पाट दिया गया था।
ग्राम पंचायत बक्शा के राजस्व गांव जागनपुर निवासी अरुण यादव की पत्नी हीरावती यादव (45) सुबह करीब छह बजे भैंस दूहने के बाद दूध घर में रखकर बाहर निकलीं। बरामदे की सीढ़ी से दो कदम आगे बढ़ी की जमीन में धंसने लगीं। वहां दलदल हो गया था। उनकी 12 साल की बेटी काजल ने मांग को धंसता देखकर खींचना शुरू किया लेकिन वह बचा नहीं सकी। हीरावती गले तक दलदल में धंस गई थीं। बेटी के शोर मचाने पर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। वे कुछ कर पाते इससे पहले ही वह जमीन में समा गई थी। ऊपर करीब दो वर्ग फीट का गड्ढा बन गया था। लोगों ने रस्सी फेंके लेकिन वह रस्सी नहीं पकड़ पाईं और नीचे की तरफ धंसती चली गई। ग्रामीणों ने टार्च जलाकर गड्ढे में देखने की कोशिश की लेकिन वह इतना गहरा हो गया था कि कुछ दिखा ही नहीं।
ग्रामीणों ने यूपी 100 पर पुलिस और फायर ब्रिगेड को भी सूचित किया। पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम ने जेसीबी से खुदाई शुरू की। थानेदार शशि प्रकाश चौधरी की देखरेख में खुदाई चलती रही लेकिन सफलता नहीं मिली थी। नौ बजे तहसीलदार ज्ञानेंद्र सिंह ने एनडीआरएफ को सूचना दी। दोपहर दो बजे एनडीआरएफ के इंस्पेक्टर रोहित भरद्वाज 30 सदस्यीय टीम के साथ पहुंचे। तब तक 45 फीट गहराई तक खुदाई की जा चुकी थी और महिला दिखाई देने लगी थी। एनडीआरएफ की टीम ने 2.10 बजे महिला को बाहर निकाला गया। मौके पर ही उसकी मौत हो चुकी थी। पुलिस ने ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। ग्रामीणों ने बताया कि जिस स्थान पर महिला धंसी थी, वहां चार दशक पहले कुआं था। उसेे मिट्टी से पाट दिया गया था। लगातार चार दिनों तक हुई बारिश के बाद कुएं की मिट्टी दलदल हो गई थी, जिसके चलते हादसा हुआ।
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ग्राम पंचायत बक्शा के राजस्व गांव जागनपुर निवासी अरुण यादव की पत्नी हीरावती यादव (45) सुबह करीब छह बजे भैंस दूहने के बाद दूध घर में रखकर बाहर निकलीं। बरामदे की सीढ़ी से दो कदम आगे बढ़ी की जमीन में धंसने लगीं। वहां दलदल हो गया था। उनकी 12 साल की बेटी काजल ने मांग को धंसता देखकर खींचना शुरू किया लेकिन वह बचा नहीं सकी। हीरावती गले तक दलदल में धंस गई थीं। बेटी के शोर मचाने पर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। वे कुछ कर पाते इससे पहले ही वह जमीन में समा गई थी। ऊपर करीब दो वर्ग फीट का गड्ढा बन गया था। लोगों ने रस्सी फेंके लेकिन वह रस्सी नहीं पकड़ पाईं और नीचे की तरफ धंसती चली गई। ग्रामीणों ने टार्च जलाकर गड्ढे में देखने की कोशिश की लेकिन वह इतना गहरा हो गया था कि कुछ दिखा ही नहीं।
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ग्रामीणों ने यूपी 100 पर पुलिस और फायर ब्रिगेड को भी सूचित किया। पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम ने जेसीबी से खुदाई शुरू की। थानेदार शशि प्रकाश चौधरी की देखरेख में खुदाई चलती रही लेकिन सफलता नहीं मिली थी। नौ बजे तहसीलदार ज्ञानेंद्र सिंह ने एनडीआरएफ को सूचना दी। दोपहर दो बजे एनडीआरएफ के इंस्पेक्टर रोहित भरद्वाज 30 सदस्यीय टीम के साथ पहुंचे। तब तक 45 फीट गहराई तक खुदाई की जा चुकी थी और महिला दिखाई देने लगी थी। एनडीआरएफ की टीम ने 2.10 बजे महिला को बाहर निकाला गया। मौके पर ही उसकी मौत हो चुकी थी। पुलिस ने ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। ग्रामीणों ने बताया कि जिस स्थान पर महिला धंसी थी, वहां चार दशक पहले कुआं था। उसेे मिट्टी से पाट दिया गया था। लगातार चार दिनों तक हुई बारिश के बाद कुएं की मिट्टी दलदल हो गई थी, जिसके चलते हादसा हुआ।
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