UP Election Result: जौनपुर की मल्हनी सीट से धनंजय सिंह हारे, सपा का कब्जा बरकरार, मुलायम ने किया था प्रचार
मल्हनी सीट से सपा प्रत्याशी लकी यादव ने जदयू से मैदान में उतरे धनंजय सिंह को 16711 मतों से पछाड़ दिया है। वहीं मछलीशहर से सपा प्रत्याशी डा. रागिनी सोनकर की भी जीत हुई है।
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जौनपुर की नौ विधानसभा सीटों की चुनावी नतीजे अब सामने लगे हैं। जिले की मल्हनी सीट एक बार फिर पूर्व सांसद धनंजय सिंह के कारण चर्चा में रही। मल्हनी सीट से सपा प्रत्याशी लकी यादव ने जदयू से मैदान में उतरे धनंजय सिंह को 16711 मतों से पछाड़ा।
वहीं मछलीशहर से सपा प्रत्याशी डा. रागिनी सोनकर मुंगराबादशाहपुर से सपा के पंकज पटेल, जफराबाद से सपा- सुभासपा प्रत्याशी जगदीश रॉय, शाहगंज विधानसभा से भाजपा समर्थित निषाद पार्टी के रमेश सिंह, केराकत से पूर्व सांसद व सपा प्रत्याशी तूफानी सरोज, मड़ियाहूं विधानसभा से अपना दल के प्रत्याशी आर के पटेल और बदलापुर विधानसभा से वर्तमान विधायक रमेश मिश्रा ने चुनाव में जीत दर्ज की।
2017 में भी धनंजय को मिली थी हार
2017 के विधानसभा चुनाव में सपा के कद्दावर नेता पारसनाथ यादव ने धनंजय को हराया था। उनके निधन के बाद हुए उपचुनाव में भी धनंजय को पारसनाथ यादव के बेटे लकी यादव के हाथों पराजय का सामना करना पड़ा।
मुलायम सिंह यादव ने किया मल्हनी में प्रचार
शुरुआती रुझानों में धन्नंजय सिंह ने समाजवादी पार्टी के लकी यादव को पीछे छोड़ा था। मगर दोपहर बाद वो पिछड़ गए। मल्हनी सीट को पूर्वांचल की हॉट सीट का तमगा मिला था। यहां खुद सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने लकी यादव के लिए वोट मांगे थे। मल्हनी के अलावा वे सिर्फ अखिलेश यादव की सीट करहल ही गए थे।
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव की दांव पर लगी थी प्रतिष्ठा
पूर्वांचल की सबसे हाट सीट मल्हनी पर सबकी नजर थी। दिनभर हर कोई इस सीट के बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिश में लगा था। शुरुआत में जेडीयू प्रत्याशी और पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने जबर्दस्त बढ़त बनाई लेकिन बाद में लकी यादव ने उन्हें पीछे कर दिया और आखिर में लगातार बढ़त बनाते हुए दूसरी बार इस सीट से विधायक बने। इसके पहले, उनके पिता पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वर्गीय पारसनाथ यादव लगातार दो बार विधायक रह चुके हैं।
इस सीट को लेकर सपा मुखिया अखिलेश यादव ने अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगा दी थी। मतदान के दिन जिलाध्यक्ष लाल बहादुर यादव की अगुवाई में एक बड़ी टीम क्षेत्र में लगा दी। स्थिति यह रही कि सातवें चरण में सपा ने ही इस सीट पर सबसे ज्यादा फर्जी वोटिंग की शिकायत निर्वाचन आयोग से की थी।
साल 2012 में हुए इस सीट पर पहली बार चुनाव हुआ तो सपा के पारसनाथ यादव ने रिकार्ड 81602 वोट पाकर जीते थे। उन्होंने निर्दल उम्मीदवार डा. जागृति सिंह को 31502 वोटों के अंतर से हराया था। साल 2017 में सपा के पारसनाथ यादव को हराने के लिए निषाद पार्टी से बाहुबली पूर्व सांसद धनंजय सिंह मैदान में उतरे थे। लेकिन, उन्हें भी हार का सामना करना पड़ा था।
पिछले चुनाव में भाजपा ने पांच सीटों पर किया था कब्जा
इस चुनाव में मुलायम सिंह यादव प्रचार करने आए थे। वहीं, कोरोनाकाल में पारसनाथ यादव के निधन के बाद साल 2020 में उपचुनाव कराना पड़ा। इस चुनाव में सपा ने उनके बेटे लकी यादव को आगे लाया। जिन्होंने इस सीट पर सपा के जीत की हैट्रिक बनवाई। हालांकि इस उपचुनाव में कांटे का मुकाबला देखने को मिला था, जिसमें सपा के लकी यादव 73462 मत पाकर विधायक बने थे। जबकि इस चुनाव में पूर्व सांसद धनंजय सिंह निर्दल प्रत्याशी के तौर पर मैदान में थे और उन्हें 68838 मिले थे।
वहीं, भाजपा के मनोज सिंह 28860 और बसपा के जय प्रकाश दुबे 25180 ही पाए थे। धनंजय सिंह ने अपनी पत्नी श्रीकला धनंजय सिंह को जिला पंचायत अध्यक्ष मैदान में उतारकर सपा को करारी हार दी थी। इसके बाद धनजंय सिंह मल्हनी सीट पर अपनी जीत को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त थे।
यह बना हार-जीत का टर्निंग प्वाइंट
भाजपा प्रत्याशी डा. केपी सिंह के आने से मल्हनी विधानसभा का समीकरण बदल गया था। वहीं, सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की प्रतिष्ठा दांव पर लगने लगने से समाजवादी पार्टी के नेता-कार्यकर्ता पूरी ताकत से मैदान में उतर गए। इसके कारण सपा को इसका लाभ हुआ और वह लगातार दूसरी बार चुनाव जीते।