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Jaunpur News: हत्यारोपी विजय यादव के खिलाफ दर्ज हैं दो मुकदमे
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केराकत (जौनपुर)। लखनऊ के सिविल कोर्ट में पश्चिम यूपी के अपराधी संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा की गोली मारकर हत्या करने का आरोपी विजय यादव उर्फ आनंद के खिलाफ दो मुकदमे पहले से दर्ज हैं। आजमगढ़ की देवगांव कोतवाली में वर्ष 2016 के दौरान पॉक्सो एक्ट का मुकदमा दर्ज हुआ था। इस मामले में उसे गिरफ्तार करके जेल भेजा गया था। जेल भी गया था। हालांकि, इस मामले में पीड़ित किशोरी से सुलह हो चुकी है। दूसरा मुकदमा वर्ष 2020 में जौनपुर के केराकत कोतवाली में महामारी एक्ट का दर्ज हुआ था।
लखनऊ की अदालत में अपराधी की हत्या के बाद आरोपी विजय यादव अचानक चर्चा में आ गया। वह आजमगढ़ जिले की सीमा से सटे जौनपुर जिले के केराकत थानाक्षेत्र के सुल्तानपुर गांव का रहने वाला है। घटना के बाद ही पुलिस की कई टीमें हत्यारोपी के गांव पहुंची और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि की जानकारी ली। साथ ही परिजनों के बयान दर्ज किए। पुलिस की पूछताछ में जो तथ्य सामने आए हैं, उसके मुताबिक विजय यादव पहले मुंबई रहकर कमाता था। वह एक पाइप कंपनी में काम करता था। मुंबई से लौटा तो तीन महीने तक गांव रहा। 10 मई में ममेरी बहन की शादी में गया था। 11 मई को काम की तलाश में लखनऊ गया, फिर पिता श्यामा यादव को फोन करके बताया कि पेयजल की लाइन बिछाने वाली कंपनी में काम मिला है। अब लखनऊ में रहकर ही काम करना है। पिछले 21 दिनों से उसका संपर्क परिजनों से नहीं हुआ है। अब अपराधी की हत्या में नाम सामने आया है।
चार भाइयों में दूसरे नंबर का है हत्यारोपी
आजमगढ़ जिले के देवगांव थाना क्षेत्र की सीमा से महज एक किमी पहले स्थित केराकत के सुल्तानपुर गांव निवासी श्यामा यादव के चार पुत्रों में हत्यारोपी विजय दूसरे नंबर का है। परिवार से मिली जानकारी के अनुसार, बड़ा भाई दिल्ली में रहकर एक प्राइवेट कंपनी में काम करता है। विजय मुंबई में रहता था। वह जरायम की दुनिया में कैसे पहुंचा, इसकी जानकारी न तो गांव के लोगों काे है और न ही परिवार में किसी को कोई जानकारी। विजय के दो भाई छोटे पढ़ाई करते हैं।
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मां बोली- आपराधिक प्रवृत्ति का नहीं था विजय
हत्यारोपी की मां निर्मला बेटे विजय की करतूत से हैरान हैं। उनका कहना है कि वह 15 मई को जब मायके गई थीं, तभी विजय का फोन आया था। इसके बाद से मोबाइल फोन बंद बता रहा था। अब किसी की हत्या की बात कही जा रही है। इस पर विश्वास कर पाना कठिन है। वह आपराधिक प्रवृत्ति का नहीं था। इस तरह की घटना को कैसे अंजाम दे सकता है, यह सुनकर ही रूह कांप रही है। इस तरह के कृत्य का समर्थन नहीं किया जा सकता है।
ग्राम प्रधान से मिली घटना की जानकारी
राम प्रधान ने घटना की जानकारी दी। एक व्यक्ति ने मोबाइल फोन पर फोटो दिखाया और पूछा की यह आपका लड़का है। मैंने, हां में जवाब दिया। विजय आपराधिक प्रवृत्ति का नहीं था। ऐसी घटना को अंजाम देगा, इस पर भरोसा कर पाना कठिन है। उसे 11 मई को बाइक से केराकत छोड़ने गया था। वह तो घर-परिवार को आगे बढ़ाने की बात करता था। पीछे कैसे ढकेल देगा। श्यामा यादव, हत्यारोपी के पिता
एक महीने से नहीं भेजा था पैसा
विजय ने 2012 में हाईस्कूल की परीक्षा पास की थी। इसके बाद जौनपुर से इंटर और मो. हसन पीजी कॉलेज से बीकॉम किया। मुंबई में अच्छा कमाता था। खर्च के लिए घर पैसा भी भेजता था, लेकिन लखनऊ जाने के बाद से एक भी रुपये नहीं भेजे हैं।
किशोरी के साथ भागा था हत्यारोपी
विजय के पिता श्यामा यादव की आजमगढ़ के देवगांव में मिठाई की दुकान थी। वह दुकान पर भी जाता था। यहीं पर एक किशोरी से संपर्क हो गया और दोनों भाग गए। किशोरी के परिजनों की तहरीर पर देवगांव थाने में ही पॉक्सो एक्ट का मुकदमा दर्ज हुआ था। तीन महीने के बाद पुलिस ने दोनों को मुंबई से बरामद किया था। विजय की मां के मुताबिक, इस मामले में वह जेल गया था। करीब छह महीने बाद घर आया था। अब सुलह हो चुकी है।
विजय यादव के खिलाफ अभी दो मुकदमे दर्ज होने की बात सामने आई है। मामले की छानबीन कराई जा रही है। फिलहाल, कोई बड़ा आपराधिक रिकाॅर्ड सामने नहीं आया है। लखनऊ की टीम पूछताछ कर रही है। वहां से यदि कोई इनपुट मिलता है तो उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- गौरव शर्मा, पुलिस क्षेत्राधिकारी- केराकत
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लखनऊ की अदालत में अपराधी की हत्या के बाद आरोपी विजय यादव अचानक चर्चा में आ गया। वह आजमगढ़ जिले की सीमा से सटे जौनपुर जिले के केराकत थानाक्षेत्र के सुल्तानपुर गांव का रहने वाला है। घटना के बाद ही पुलिस की कई टीमें हत्यारोपी के गांव पहुंची और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि की जानकारी ली। साथ ही परिजनों के बयान दर्ज किए। पुलिस की पूछताछ में जो तथ्य सामने आए हैं, उसके मुताबिक विजय यादव पहले मुंबई रहकर कमाता था। वह एक पाइप कंपनी में काम करता था। मुंबई से लौटा तो तीन महीने तक गांव रहा। 10 मई में ममेरी बहन की शादी में गया था। 11 मई को काम की तलाश में लखनऊ गया, फिर पिता श्यामा यादव को फोन करके बताया कि पेयजल की लाइन बिछाने वाली कंपनी में काम मिला है। अब लखनऊ में रहकर ही काम करना है। पिछले 21 दिनों से उसका संपर्क परिजनों से नहीं हुआ है। अब अपराधी की हत्या में नाम सामने आया है।
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चार भाइयों में दूसरे नंबर का है हत्यारोपी
आजमगढ़ जिले के देवगांव थाना क्षेत्र की सीमा से महज एक किमी पहले स्थित केराकत के सुल्तानपुर गांव निवासी श्यामा यादव के चार पुत्रों में हत्यारोपी विजय दूसरे नंबर का है। परिवार से मिली जानकारी के अनुसार, बड़ा भाई दिल्ली में रहकर एक प्राइवेट कंपनी में काम करता है। विजय मुंबई में रहता था। वह जरायम की दुनिया में कैसे पहुंचा, इसकी जानकारी न तो गांव के लोगों काे है और न ही परिवार में किसी को कोई जानकारी। विजय के दो भाई छोटे पढ़ाई करते हैं।
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मां बोली- आपराधिक प्रवृत्ति का नहीं था विजय
हत्यारोपी की मां निर्मला बेटे विजय की करतूत से हैरान हैं। उनका कहना है कि वह 15 मई को जब मायके गई थीं, तभी विजय का फोन आया था। इसके बाद से मोबाइल फोन बंद बता रहा था। अब किसी की हत्या की बात कही जा रही है। इस पर विश्वास कर पाना कठिन है। वह आपराधिक प्रवृत्ति का नहीं था। इस तरह की घटना को कैसे अंजाम दे सकता है, यह सुनकर ही रूह कांप रही है। इस तरह के कृत्य का समर्थन नहीं किया जा सकता है।
ग्राम प्रधान से मिली घटना की जानकारी
राम प्रधान ने घटना की जानकारी दी। एक व्यक्ति ने मोबाइल फोन पर फोटो दिखाया और पूछा की यह आपका लड़का है। मैंने, हां में जवाब दिया। विजय आपराधिक प्रवृत्ति का नहीं था। ऐसी घटना को अंजाम देगा, इस पर भरोसा कर पाना कठिन है। उसे 11 मई को बाइक से केराकत छोड़ने गया था। वह तो घर-परिवार को आगे बढ़ाने की बात करता था। पीछे कैसे ढकेल देगा। श्यामा यादव, हत्यारोपी के पिता
एक महीने से नहीं भेजा था पैसा
विजय ने 2012 में हाईस्कूल की परीक्षा पास की थी। इसके बाद जौनपुर से इंटर और मो. हसन पीजी कॉलेज से बीकॉम किया। मुंबई में अच्छा कमाता था। खर्च के लिए घर पैसा भी भेजता था, लेकिन लखनऊ जाने के बाद से एक भी रुपये नहीं भेजे हैं।
किशोरी के साथ भागा था हत्यारोपी
विजय के पिता श्यामा यादव की आजमगढ़ के देवगांव में मिठाई की दुकान थी। वह दुकान पर भी जाता था। यहीं पर एक किशोरी से संपर्क हो गया और दोनों भाग गए। किशोरी के परिजनों की तहरीर पर देवगांव थाने में ही पॉक्सो एक्ट का मुकदमा दर्ज हुआ था। तीन महीने के बाद पुलिस ने दोनों को मुंबई से बरामद किया था। विजय की मां के मुताबिक, इस मामले में वह जेल गया था। करीब छह महीने बाद घर आया था। अब सुलह हो चुकी है।
विजय यादव के खिलाफ अभी दो मुकदमे दर्ज होने की बात सामने आई है। मामले की छानबीन कराई जा रही है। फिलहाल, कोई बड़ा आपराधिक रिकाॅर्ड सामने नहीं आया है। लखनऊ की टीम पूछताछ कर रही है। वहां से यदि कोई इनपुट मिलता है तो उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- गौरव शर्मा, पुलिस क्षेत्राधिकारी- केराकत