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हर मुठभेड़ की कहानी, वर्षों पुरानी, सबको जुबानी

Sun, 16 Feb 2020 12:21 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 16 Feb 2020 12:21 AM IST
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Skirmish injured in encounter, soldier also shot
जौनपुर। पुलिस के साथ भी यह अजीब संयोग है। जब भी वह अपराधियों को मुठभेड़ में पकड़ती है तो कहानी एक जैसी ही होती है। बदमाश किसी घटना को अंजाम देने के लिए क्षेत्र में घूम रहे होते हैं और ठीक उसी वक्त पुलिस चेकिंग कर रही होती है। अचानक से दोनों का आमना-सामना होता है। पुलिस बाइक सवार बदमाशों को रुकने का इशारा करती है तो वह भागने लगते हैं। पुलिस उनका पीछा करती है और फिर बदमाश उस पर फायरिंग कर देते हैं। जवाबी कार्रवाई में पुलिस भी गोली चलाती है और यह गोली हर बार बदमाश के पैर में ही लगती है। यही नहीं हर बार मुठभेड़ में एक ही बदमाश पकड़ा जाता, जबकि उसका साथी अंधेरे का लाभ लेकर फरार हो जाता है। बदमाश के पास से एक देसी तमंचा और एक कारतूस के साथ अक्सर चोरी की बाइक भी मिल जाती है।
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पुलिस लगातार आधुनिक होती जा रही है। वक्त के साथ अपराध और अपराध करने का तरीका बदला है तो पुलिस ने भी अपने काम-काज के तरीके में बदलाव लाया है। मगर वर्षों बाद भी पुलिस के फर्द का मजमून नहीं बदल पाया है। पिछले चार माह में हुए तीन मुठभेड़ों के फर्द पर गौर करें तो स्थिति काफी कुछ ऐसे ही है। हर बार वह एक ही कहानी दोहरा कर लिखती और सुनाती चली आ रही है। अंतर सिर्फ थाना, जगह, बदमाश और पुलिस टीम के नामों में होता है। वर्षों पुरानी यह कहानी हर किसी को जुबानी याद हो चुकी है। फर्द में बार-बार एक ही कहानी को दोहराना कानूनी रूप से जिम्मेदारों के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है, मगर वह इस ओर नजरें इनायत करने को तैयार ही नहीं है।
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पहली मुठभेड़
पहली मुठभेड़ नवंबर की है। 18 नवंबर की रात लाइन बाजार पुलिस रसैना तिराहे के पास चेकिंग कर रही थी। तभी बाइक सवार तीन बदमाश कुद्दूपुर की ओर से आते दिखे। पुलिस ने उन्हें रुकने का इशारा किया तो वह भागने लगे। पीछा करने पर उन्होंने फायरिंग कर दी। इसमें एक गोली कांस्टेबल संदीप तिवारी के हाथ में लगी, जबकि पुलिस की ओर से चलाई गई गोली में 25 हजार का इनामी बदमाश प्रदीप यादव जख्मी हुआ। गोली उसके बांए पैर में लगी। उसके अन्य साथी फरार हो गए। देसी पिस्टल, कारतूस और बाइक बरामद हुई।
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दूसरी मुठभेड़
23 दिसंबर की रात सरायख्वाजा पुलिस की बदमाशों से मुठभेड़ हुई। पूविवि के पीछे सुल्तानपुर गांव के पास मोड़ पर पुलिस चेकिंग कर रही थी। बाइक से दो बदमाश पहुंचे। पुलिस ने उन्हें रोका तो वह भागने लगे। पीछा करने पर बदमाशों ने पुलिस पर गोली चला दी। एक गोली कांस्टेबल योगेंद्र यादव के हाथ में लगी, जबकि पुलिस की गोली 50 हजार के इनामी बदमाश राम सिंह यादव के पैर में लगी और वह वहीं गिर पड़ा। उसका साथी फरार हो गया। उसके पास से भी देसी कट्टा, कारतूस और बाइक बरामद हुआ।

तीसरी मुठभेड़
शुक्रवार की रात बदलापुर और महराजगंज पुलिस के साथ संयुक्त मुठभेड़ में घायल बदमाश श्यामले यादव के भी दांए पैर में ही गोली लगी है, जबकि सिपाही अरविंद कुमार सिंह का हाथ गोली लगने से जख्मी हो गया। यहां भी पुलिस वाहन चेकिंग कर रही थी। बाइक सवार बदमाशों को रुकने का इशारा किया तो वह भागने लगे और पीछा करने पर गोली चला दी। बदमाश श्यामले के पास से एक कट्टा, दो कारतूस और एक बाइक मिली है। उसका साथी अंधेरे का लाभ उठाकर फरार हो गया।
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