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एसआईटी की जांच में जिले के तीन सिपाहियों का नाम, होगी पूछताछ.
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जौनपुर। ओवरलोड ट्रकों से वसूली के मामले में एसआईटी का शिकंजा कसने के बाद परिवहन कार्यालय में खलबली मची हुई है। जांच के दायरे में जिले के तत्कालीन एआरटीओ के अलावा तीन सिपाही भी हैं। प्रवर्तन का काम देखने वाले इन सिपाहियों के नाम और नंबर गोरखपुर से पकड़े गए गिरोह के सदस्यों की डायरी में मिले हैं। एसआईटी की एफआईआर में भी इनके नाम हैं।
जनवरी माह में गोरखपुर के एक होटल पर छापा मारकर एसटीएफ ने छह लोगों को गिरफ्तार किया था। आरोप था कि पूर्वांचल में ओवरलोड ट्रकों से वसूली इन्हीं के माध्यम से कराई जाती है। उनके पास से बरामद डायरी, रजिस्टर, मोबाइल में पूर्वांचल के विभिन्न जिलों के एआरटीओ, परिवहन विभाग के कर्मचारी, प्रवर्तन के सिपाही व अन्य प्रमुख लोगों के नाम व नंबर, लेन-देन का ब्योरा और वसूली के लिए ट्रकों को दिए जाने वाले कोड आदि की जानकारी थी। मामले की जांच एसआईटी को सौंपी गई थी। एसआईटी की जांच में जिन 18 जिलों के एआरटीओ और प्रवर्तन सिपाहियों की संलिप्तता सामने आई है, उसमें जौनपुर के भी तीन सिपाही शामिल हैं। तीन सिपाहियों के नाम डायरी में मिले थे। गिरोह के सदस्यों के मोबाइल की सीडीआर में भी एक का नंबर ट्रेस हुआ था, जिसके आधार पर वारंट भी जारी हुआ। गिरफ्तारी से राहत के लिए उसने कोर्ट की शरण ली। जौनपुर से पहले तीनों सिपाहियों की तैनाती सोनभद्र में भी थी।
एक से तीन हजार प्रति ट्रक होती थी वसूली
पूर्वांचल से गुजरने वाली ट्रकों से ओवरलोड के बदले रेट फिक्स था। प्रत्येक ट्रक से प्रति चक्कर एक से तीन हजार रुपये वसूले जाते थे। गिरोह के सदस्य रुपये लेने के बाद उन्हें कोठ बताते थे। रास्ते में कहीं भी रोके जाने पर ट्रक चालक को संबंधित एआरटीओ को वह कोड बताना होता था। कोड बताते ही उन्हें आगे जाने की छूट मिल जाती थी। सोनभद्र, मिर्जापुर से गिट्टी बालू लेकर जाने वाले ज्यादातर वाहनों से इसी दर पर वसूली होती थी। बाद में इसका हिस्सा संबंधित रूट में आने वाले सभी जिलों के अधिकारियों तक पहुंच जाता था।
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यह पूरा मामला मेरे संज्ञान में नहीं है और न ही इस संबंध में एसआईटी या शासन की ओर से कोई पत्र ही प्राप्त हुआ है। जांच टीम अगर कोई पत्र देती है तो उसे पूरा सहयोग किया जाएगा। -एसपी सिंह, एआरटीओ, जौनपुर
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जनवरी माह में गोरखपुर के एक होटल पर छापा मारकर एसटीएफ ने छह लोगों को गिरफ्तार किया था। आरोप था कि पूर्वांचल में ओवरलोड ट्रकों से वसूली इन्हीं के माध्यम से कराई जाती है। उनके पास से बरामद डायरी, रजिस्टर, मोबाइल में पूर्वांचल के विभिन्न जिलों के एआरटीओ, परिवहन विभाग के कर्मचारी, प्रवर्तन के सिपाही व अन्य प्रमुख लोगों के नाम व नंबर, लेन-देन का ब्योरा और वसूली के लिए ट्रकों को दिए जाने वाले कोड आदि की जानकारी थी। मामले की जांच एसआईटी को सौंपी गई थी। एसआईटी की जांच में जिन 18 जिलों के एआरटीओ और प्रवर्तन सिपाहियों की संलिप्तता सामने आई है, उसमें जौनपुर के भी तीन सिपाही शामिल हैं। तीन सिपाहियों के नाम डायरी में मिले थे। गिरोह के सदस्यों के मोबाइल की सीडीआर में भी एक का नंबर ट्रेस हुआ था, जिसके आधार पर वारंट भी जारी हुआ। गिरफ्तारी से राहत के लिए उसने कोर्ट की शरण ली। जौनपुर से पहले तीनों सिपाहियों की तैनाती सोनभद्र में भी थी।
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एक से तीन हजार प्रति ट्रक होती थी वसूली
पूर्वांचल से गुजरने वाली ट्रकों से ओवरलोड के बदले रेट फिक्स था। प्रत्येक ट्रक से प्रति चक्कर एक से तीन हजार रुपये वसूले जाते थे। गिरोह के सदस्य रुपये लेने के बाद उन्हें कोठ बताते थे। रास्ते में कहीं भी रोके जाने पर ट्रक चालक को संबंधित एआरटीओ को वह कोड बताना होता था। कोड बताते ही उन्हें आगे जाने की छूट मिल जाती थी। सोनभद्र, मिर्जापुर से गिट्टी बालू लेकर जाने वाले ज्यादातर वाहनों से इसी दर पर वसूली होती थी। बाद में इसका हिस्सा संबंधित रूट में आने वाले सभी जिलों के अधिकारियों तक पहुंच जाता था।
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यह पूरा मामला मेरे संज्ञान में नहीं है और न ही इस संबंध में एसआईटी या शासन की ओर से कोई पत्र ही प्राप्त हुआ है। जांच टीम अगर कोई पत्र देती है तो उसे पूरा सहयोग किया जाएगा। -एसपी सिंह, एआरटीओ, जौनपुर