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महरुपुर मड़ैया के 50 घरों में ताला
जौनपुर ब्यूराे
Updated Sat, 05 Dec 2015 12:53 AM IST
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खाकी के खौफ से महरूपुर मड़ैया गांव की चौहान बस्ती के 50 से अधिक घरों में ताला लग गया है। दरवाजे पर बंधे मवेशियों को कोई चारा देने वाला भी नहीं है। पिछले 24 घंटे के अंदर भूख प्यास से तड़प चार मवेशियों की मौत हो गई।
इसकी जानकारी पर पड़ोस के गांव के कुछ लोगों ने शुक्रवार को चौहान बस्ती में जा कर भूखे मवेशियों को आजाद कर दिया। पानी की तलाश में एक गाय शुक्रवार को बस्ती के कुएं में गिर पड़ी। जिसे पुलिस ने जेसीबी की मदद से सुरक्षित निकाल
लिया। शुक्रवार को अमर उजाला की टीम बस्ती में पहुंची तो वहां अजीब सा सन्नाटा पसरा था। एक घर के बाहर बैठी वृद्धा ने गाड़ी को दरवाजे के सामने रुकते देखा तो वह तेजी से अंदर चली गई और दरवाजा बंद कर लिया। उसे लगा कि शायद
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पुलिस वाले आए हैं। बाद में जब उसे बताया गया कि हमलोग अखबार वाले हैं तो उसने दरवाजा खोला और अपनी पीड़ा बयान करते हुए फफक कर रो पड़ी।
वृद्धा गौरी देवी ने कहा कि उनके परिवार के लोग कहां हैं उन्हें खुद पता नहीं है। वह गठिया से पीड़ित हैं इसलिए वह घर छोड़कर नहीं जा सकीं। आसपास के घरों के सारे लोग रिश्तेदारों के यहां चले गए हैं।
गांव में घूमने पर टीम को पुरुष तो क्या कोई महिला या बच्चा नजर नहीं आया। महेंद्र चौहान, छोटेलाल, बृजलाल और मानसिंह के दरवाजों पर खूंटे से बंधी भैंसें वैसे ही मरी पड़ी थी। वहां उन्हें दफन करने वाला भी कोई नहीं था। पड़ोसी गांव के लोग इस भय से बस्ती में नहीं जा रहे हैं कि पुलिस कहीं उन्हें भी गिरफ्तार न कर ले।
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इसकी जानकारी पर पड़ोस के गांव के कुछ लोगों ने शुक्रवार को चौहान बस्ती में जा कर भूखे मवेशियों को आजाद कर दिया। पानी की तलाश में एक गाय शुक्रवार को बस्ती के कुएं में गिर पड़ी। जिसे पुलिस ने जेसीबी की मदद से सुरक्षित निकाल
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लिया। शुक्रवार को अमर उजाला की टीम बस्ती में पहुंची तो वहां अजीब सा सन्नाटा पसरा था। एक घर के बाहर बैठी वृद्धा ने गाड़ी को दरवाजे के सामने रुकते देखा तो वह तेजी से अंदर चली गई और दरवाजा बंद कर लिया। उसे लगा कि शायद
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पुलिस वाले आए हैं। बाद में जब उसे बताया गया कि हमलोग अखबार वाले हैं तो उसने दरवाजा खोला और अपनी पीड़ा बयान करते हुए फफक कर रो पड़ी।
वृद्धा गौरी देवी ने कहा कि उनके परिवार के लोग कहां हैं उन्हें खुद पता नहीं है। वह गठिया से पीड़ित हैं इसलिए वह घर छोड़कर नहीं जा सकीं। आसपास के घरों के सारे लोग रिश्तेदारों के यहां चले गए हैं।
गांव में घूमने पर टीम को पुरुष तो क्या कोई महिला या बच्चा नजर नहीं आया। महेंद्र चौहान, छोटेलाल, बृजलाल और मानसिंह के दरवाजों पर खूंटे से बंधी भैंसें वैसे ही मरी पड़ी थी। वहां उन्हें दफन करने वाला भी कोई नहीं था। पड़ोसी गांव के लोग इस भय से बस्ती में नहीं जा रहे हैं कि पुलिस कहीं उन्हें भी गिरफ्तार न कर ले।