संवाद न्यूज एजेंसी जौनपुर। हिंदी अब केवल साहित्य और संवाद की भाषा तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल दौर में रोजगार और तकनीक से भी तेजी से जुड़ रही है।
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग में हिंदी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने भाषा की बदलती भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि कृत्रिम मेधा के दौर में हिंदी के लिए नई संभावनाएं पैदा हुई हैं। इसके साथ ही डिजिटल माध्यमों पर हिंदी पत्रकारिता के बढ़ते प्रभाव के बीच विश्वसनीयता और तथ्यों की जांच को भी जरूरी बताया। कार्यक्रम में प्रो. अविनाश पाठार्डीकर ने कहा कि कृत्रिम मेधा हिंदी को समझने, संवाद करने, अनुवाद करने, लिखने और आवाज पहचानने में सक्षम हो रही है। इससे हिंदी के डिजिटल विस्तार को नई गति मिली है। उन्होंने कहा कि भाषा समाज और संस्कृति को जोड़ने का भी काम करती है। प्रो. मनोज मिश्र ने कहा कि डिजिटल मंचों के विस्तार से हिंदी पत्रकारिता के लिए संभावनाएं बढ़ी हैं, लेकिन तेजी से खबर देने के साथ