{"_id":"5af48b064f1c1b3b0a8b9725","slug":"fear-for-water-as-the-train-stops","type":"story","status":"publish","title_hn":"ट्रेन रुकते ही पानी के लिए मारामारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ट्रेन रुकते ही पानी के लिए मारामारी
jaunpur
Updated Thu, 10 May 2018 11:40 PM IST
विज्ञापन
पानी लेने के लिए नल पर धक्कामुक्की करते यात्री।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
छपरा से लोकमान्य तिलक टर्मिनल कुर्ला जाने वाली गोदान एक्सप्रेस आकर रुकती है। प्लेटफार्म यात्रियों की भीड़ से पटा था। भीड़ ट्रेन में सवार होने के लिए टूट पड़ती है। कुछ मिनटों तक यह सब चलता रहता है।
जनरल और स्लीपर कोच में पहले से सफर कर रहे कुछ यात्री पानी की खाली बोतल लिए भीड़ को चीरते हुए प्लेट फार्म पर उतरे और पानी की तलाश में इधर उधर भटकते रहे। प्लेट फार्म पर सिर्फ एक टोटी से पानी आ रहा था, वह भी पीने लायक नहीं। इसी प्लेट फार्म पर वाटर प्वाइंट लगा है, जहां 20 रुपये में पांच लीटर ठंडा पानी मिलता है। वहां भीड़ लग गई। भीड़ में से दो चार लोगों ही बोतल भरने में सफल हुए थे, तभी ट्रेन की सीटी बजी और मऊ के तबरेज आलम, आजमगढ़ के शिवधारी, मो. फहीम सहित तमाम लोग खाली बोतल और सूखी हलक के साथ ट्रेन में चढ़ गए। जौनपुर जंक्शन पर यह दृश्य कोई पहली बार नहीं दिखा। भीषण गर्मी में जब भी कोई ट्रेन यहां रुकती है तो यात्री पानी के लिए इधर उधर प्लेटफार्म पर हांफते रहते हैं और किसी को पानी मिला तो मिला नहीं तो अधिकतर लोग ट्रेन में सवार हो जाते हैं। जौनपुर जंक्शन से रोजाना 31 एक्सप्रेस और आठ पैसेंजर ट्रेनें गुजरती हैं।
कामाख्या और टाटा अमृतसर एक्सप्रेस को छोड़कर सभी 29 एक्सप्रेस और आठ पैसेंजर ट्रेनों का यहां ठहराव होता है।
रोजाना करीब 4000 से 4200 यात्री जंक्शन से विभिन्न ट्रेनों में सवार होते हैं और इतने ही यात्री यहां ट्रेनों से उतरते भी हैं। यानी करीब 10 हजार यात्रियों का आना जाना इस स्टेशन से होता है। बावजूद इसके यहां यात्री सुविधाएं नदारद हैं। स्टेशन पर न तो पेयजल की व्यवस्था है और न ही बैठने का ठीक इंतजाम है।
विज्ञापन
विज्ञापन
जनरल और स्लीपर कोच में पहले से सफर कर रहे कुछ यात्री पानी की खाली बोतल लिए भीड़ को चीरते हुए प्लेट फार्म पर उतरे और पानी की तलाश में इधर उधर भटकते रहे। प्लेट फार्म पर सिर्फ एक टोटी से पानी आ रहा था, वह भी पीने लायक नहीं। इसी प्लेट फार्म पर वाटर प्वाइंट लगा है, जहां 20 रुपये में पांच लीटर ठंडा पानी मिलता है। वहां भीड़ लग गई। भीड़ में से दो चार लोगों ही बोतल भरने में सफल हुए थे, तभी ट्रेन की सीटी बजी और मऊ के तबरेज आलम, आजमगढ़ के शिवधारी, मो. फहीम सहित तमाम लोग खाली बोतल और सूखी हलक के साथ ट्रेन में चढ़ गए। जौनपुर जंक्शन पर यह दृश्य कोई पहली बार नहीं दिखा। भीषण गर्मी में जब भी कोई ट्रेन यहां रुकती है तो यात्री पानी के लिए इधर उधर प्लेटफार्म पर हांफते रहते हैं और किसी को पानी मिला तो मिला नहीं तो अधिकतर लोग ट्रेन में सवार हो जाते हैं। जौनपुर जंक्शन से रोजाना 31 एक्सप्रेस और आठ पैसेंजर ट्रेनें गुजरती हैं।
विज्ञापन
कामाख्या और टाटा अमृतसर एक्सप्रेस को छोड़कर सभी 29 एक्सप्रेस और आठ पैसेंजर ट्रेनों का यहां ठहराव होता है।
रोजाना करीब 4000 से 4200 यात्री जंक्शन से विभिन्न ट्रेनों में सवार होते हैं और इतने ही यात्री यहां ट्रेनों से उतरते भी हैं। यानी करीब 10 हजार यात्रियों का आना जाना इस स्टेशन से होता है। बावजूद इसके यहां यात्री सुविधाएं नदारद हैं। स्टेशन पर न तो पेयजल की व्यवस्था है और न ही बैठने का ठीक इंतजाम है।
विज्ञापन