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कर्मचारी संगठनों ने भरी हुंकार, प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो, जौनपुर
Updated Thu, 03 Sep 2015 12:33 AM IST
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न्यूनतम वेतनमान में संशोधन और पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने समेत 15 सूत्री मांगों को लेकर बुधवार को केंद्र और राज्य सरकार के अधीन जिले भर के कर्मचारियों ने धरना-प्रदर्शन कर आवाज बुलंद की।
केंद्रीय श्रम संगठनों, औद्योगिक फेडरेशन और राज्य कर्मचारी संगठनों के संयुक्त आह्वान पर सभी विभागों के कर्मियों ने कामकाज ठप कर दिया।
जुलूस की शक्ल में कलेक्ट्रेट पहुंचे कर्मचारी संगठनों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। हड़ताल में शिक्षक और बैंक कर्मचारी भी शामिल रहे। बैंकों के बंद होने से कारोबार भी प्रभावित हुआ।
डाक, बीएसएनएल, बिजली, एलआईसी, रोडवेज कर्मचारियों ने भी काम ठप कर कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया। रोडवेज की बसें डिपो से बाहर नहीं निकलीं। इससे यात्रियों को भी काफी परेशानी उठानी पड़ी।
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संगठनों ने कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन और धरना सभा के बाद अपनी मांग से संबंधित प्रधानमंत्री को संबोधित पत्रक डीएम को सौंपा।
कलेक्ट्रेट में आयोजित धरना सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की नीतियां श्रम विरोधी हैं। पिछले एक साल के कार्यकाल में केंद्र सरकार देश की मेहनतकश जनता पर लगातार हमले कर रही है।
सार्वजनिक उद्योगों और सम्पत्तियों, प्राकृतिक संसाधनों और सार्वजनिक सेवाओं को पूरी तरह निजीकरण करके पूंजीपतियों के हाथों में सौंपने का षडयंत्र सरकार कर रही है। दवा उद्योग में 100 फीसदी और बीमा में 49 फीसदी विदेशी पूंजी निवेश की
छूट देना इस बात का ज्वलंत उदाहरण है। मजदूर वर्ग के हितों को संरक्षण देने वाले कानूनों को निष्प्रभावी करने के लिए 44 श्रम कानूनों को जोड़कर लेबर कोर बनाने की तैयारी केंद्र सरकार कर रही है। धरना सभा को राज्य कर्मचारी संयुक्त
परिषद के जिलाध्यक्ष राकेश कुमार श्रीवास्तव, माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश मंत्री रमेश सिंह, जिलाध्यक्ष संतोष कुमार सिंह, निखिलेश सिंह, डा. राकेश सिंह, मो. हनीफ, अशोक सिंह, अजय चौरसिया, अजय सिंह, एके सिंह, उपेंद्र सिंह, राजेश
रावत, अंकित, सालिगराम, सरिता सिंह, राणा प्रताप सिंह, प्रमोद शुक्ला, प्रदीप सिंह, कल्पनाथ गुप्ता, शिव कुमार यादव, संजय चौधरी, जय प्रकाश, इंद्रजीत ने संबोधित किया। संचालन नीरज श्रीवास्तव ने किया।
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केंद्रीय श्रम संगठनों, औद्योगिक फेडरेशन और राज्य कर्मचारी संगठनों के संयुक्त आह्वान पर सभी विभागों के कर्मियों ने कामकाज ठप कर दिया।
जुलूस की शक्ल में कलेक्ट्रेट पहुंचे कर्मचारी संगठनों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। हड़ताल में शिक्षक और बैंक कर्मचारी भी शामिल रहे। बैंकों के बंद होने से कारोबार भी प्रभावित हुआ।
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डाक, बीएसएनएल, बिजली, एलआईसी, रोडवेज कर्मचारियों ने भी काम ठप कर कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया। रोडवेज की बसें डिपो से बाहर नहीं निकलीं। इससे यात्रियों को भी काफी परेशानी उठानी पड़ी।
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संगठनों ने कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन और धरना सभा के बाद अपनी मांग से संबंधित प्रधानमंत्री को संबोधित पत्रक डीएम को सौंपा।
कलेक्ट्रेट में आयोजित धरना सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की नीतियां श्रम विरोधी हैं। पिछले एक साल के कार्यकाल में केंद्र सरकार देश की मेहनतकश जनता पर लगातार हमले कर रही है।
सार्वजनिक उद्योगों और सम्पत्तियों, प्राकृतिक संसाधनों और सार्वजनिक सेवाओं को पूरी तरह निजीकरण करके पूंजीपतियों के हाथों में सौंपने का षडयंत्र सरकार कर रही है। दवा उद्योग में 100 फीसदी और बीमा में 49 फीसदी विदेशी पूंजी निवेश की
छूट देना इस बात का ज्वलंत उदाहरण है। मजदूर वर्ग के हितों को संरक्षण देने वाले कानूनों को निष्प्रभावी करने के लिए 44 श्रम कानूनों को जोड़कर लेबर कोर बनाने की तैयारी केंद्र सरकार कर रही है। धरना सभा को राज्य कर्मचारी संयुक्त
परिषद के जिलाध्यक्ष राकेश कुमार श्रीवास्तव, माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश मंत्री रमेश सिंह, जिलाध्यक्ष संतोष कुमार सिंह, निखिलेश सिंह, डा. राकेश सिंह, मो. हनीफ, अशोक सिंह, अजय चौरसिया, अजय सिंह, एके सिंह, उपेंद्र सिंह, राजेश
रावत, अंकित, सालिगराम, सरिता सिंह, राणा प्रताप सिंह, प्रमोद शुक्ला, प्रदीप सिंह, कल्पनाथ गुप्ता, शिव कुमार यादव, संजय चौधरी, जय प्रकाश, इंद्रजीत ने संबोधित किया। संचालन नीरज श्रीवास्तव ने किया।