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पेशी से लौटते समय फैजाबाद मे हुई थी खालिद की मौत
Updated Sat, 25 Aug 2018 01:32 AM IST
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जौनपुर। लखनऊ कचहरी ब्लास्ट के मामले में दोषी करार दिए गए आजमगढ़ के तारिक काजमी को एसटीएफ ने 22 दिसंबर 2007 को जब बाराबंकी से गिरफ्तार किया था तो उसके साथ जौनपुर का खालिद मुजाहिद भी था। आतंकी घटना में खालिद मुजाहिद का नाम आने पर जिले के लोग हतप्रभ रह गए थे।
मड़ियाहूं कोतवाली क्षेत्र के सदरगंज मोहल्ला निवासी खालिद मुजाहिद की 18 मई 2013 को पेशी से वापस लखनऊ ले जाते समय रामसनेही घाट के पास उसकी मौत हो गई थी। खालिद के चाचा जहीर आलम फलाही ने उसकी हत्या का आरोप लगाते हुए मई 2013 में ही बाराबंकी कोतवाली में तत्कालीन डीजीपी विक्रम सिंह, एडीजी कानून व्यवस्था बृजलाल समेत 50 पुलिस अधिकारियों पर केस दर्ज कराया था। खालिद की मौत की जांच कराने की मांग को लेकर जहीर आलम फलाही ने विधानसभा के सामने तीन महीने तक लगातार धरना दिया था। जिला मुख्यालय पर भी प्रदर्शन हुए थे। खालिद मुजाहिद के चाचा जहीर आलम फलाही का आरोप है कि एसटीएफ ने खालिद को 16 दिसंबर 2007 को शाम छह बजे सदरगंज मोहल्ले में स्थित एक चाट की दुकान से उठाया था। 22 दिसंबर 2007 को उसकी गिरफ्तारी बाराबंकी से तारिक काजमी के साथ दिखा दी थी। जहीर आमल फलाही की ओर से बाराबंकी में दर्ज कराया गया मुकदमा अभी चल रहा है। अगले महीने 14 सितंबर को उस मामले में तारीख है। जहीर का कहना है कि खालिद के शव का पोस्टमार्टम होने से पहले उन्होंने देखा था उसकी फोटो कोर्ट की फाइल में भी संलग्न की है। उसके पीठ पर चेट के निशान थे। उसका शरीर सूजा था और नीला पड़ गया था। नाक, आंख, कान से खून रिस रहा रहा था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी मौत का कारण स्पष्ट नहीं है। जहीर कहते हैं कि उन्होंने जन सूचना अधिकार कानून के तहत जेल के डाक्टर से सूचना हासिल की गई है जिसमें कहा गया है कि खालिद को कोई बीमारी नहीं थी। खालिद की मौत के मामले में बाराबंकी में चल रहे केस का नतीजा जो भी हो पर खालिद मुजाहिद के साथ बाराबंकी में गिरफ्तार आजमगढ़ के रानी की सराय थाना क्षेत्र के सोनवारा गांव निवासी तारिक काजमी को लखनऊ कचहरी ब्लास्ट मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद जिले में खालिद मुजाहिद की चर्चा आम हो गई है।
मड़ियाहूं कोतवाली क्षेत्र के सदरगंज मोहल्ला निवासी खालिद मुजाहिद की 18 मई 2013 को पेशी से वापस लखनऊ ले जाते समय रामसनेही घाट के पास उसकी मौत हो गई थी। खालिद के चाचा जहीर आलम फलाही ने उसकी हत्या का आरोप लगाते हुए मई 2013 में ही बाराबंकी कोतवाली में तत्कालीन डीजीपी विक्रम सिंह, एडीजी कानून व्यवस्था बृजलाल समेत 50 पुलिस अधिकारियों पर केस दर्ज कराया था। खालिद की मौत की जांच कराने की मांग को लेकर जहीर आलम फलाही ने विधानसभा के सामने तीन महीने तक लगातार धरना दिया था। जिला मुख्यालय पर भी प्रदर्शन हुए थे। खालिद मुजाहिद के चाचा जहीर आलम फलाही का आरोप है कि एसटीएफ ने खालिद को 16 दिसंबर 2007 को शाम छह बजे सदरगंज मोहल्ले में स्थित एक चाट की दुकान से उठाया था। 22 दिसंबर 2007 को उसकी गिरफ्तारी बाराबंकी से तारिक काजमी के साथ दिखा दी थी। जहीर आमल फलाही की ओर से बाराबंकी में दर्ज कराया गया मुकदमा अभी चल रहा है। अगले महीने 14 सितंबर को उस मामले में तारीख है। जहीर का कहना है कि खालिद के शव का पोस्टमार्टम होने से पहले उन्होंने देखा था उसकी फोटो कोर्ट की फाइल में भी संलग्न की है। उसके पीठ पर चेट के निशान थे। उसका शरीर सूजा था और नीला पड़ गया था। नाक, आंख, कान से खून रिस रहा रहा था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी मौत का कारण स्पष्ट नहीं है। जहीर कहते हैं कि उन्होंने जन सूचना अधिकार कानून के तहत जेल के डाक्टर से सूचना हासिल की गई है जिसमें कहा गया है कि खालिद को कोई बीमारी नहीं थी। खालिद की मौत के मामले में बाराबंकी में चल रहे केस का नतीजा जो भी हो पर खालिद मुजाहिद के साथ बाराबंकी में गिरफ्तार आजमगढ़ के रानी की सराय थाना क्षेत्र के सोनवारा गांव निवासी तारिक काजमी को लखनऊ कचहरी ब्लास्ट मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद जिले में खालिद मुजाहिद की चर्चा आम हो गई है।
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