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सिटी स्टेशन पर यात्री सुविधाओं के नाम पर खानापूर्ति
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Thu, 02 Jun 2016 01:21 AM IST
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सिटी स्टेशन के प्लेट फार्म एक पर पेड़ के सहारे रखी गई टूटी कुर्सी।
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वाराणसी-लखनऊ रेलवे मार्ग पर स्थित जौनपुर सिटी स्टेशन पर यात्री सुविधाओं के नाम पर रेलवे विभाग के अधिकारी मात्र खानापूर्ति कर रहे हैं। प्लेट फार्म पर चेयर रखा जरूर है लेकिन उसमें पावा नही है। यात्री प्रतीक्षालय बना है लेकिन वह अधिकारियों के निरीक्षण के समय ही खुलता है।
तेज धूप और लू की वजह से यात्रियों को काफी दिक्कत होती है। जौनपुर सिटी स्टेशन को माडल बनाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन यहां यात्री सुविधाओं के नाम पर माडल क्या सामान्य स्टेशनोें के बराबर भी नही है।
प्लेट फार्म एक पर आरपीएफ चौकी और यात्री प्रतिक्षालय के सामने पेड़ का सहरा देकर दो लोहे की चेयर रखी है। जिसका कोई बेस नही है। चेयर का पावा टूटा है।
स्टेशन की सुंदरता और यात्रियों को ट्रेन का इंतजार करने के लिए परिसर में ही एक छोटा सा पार्क बनाया गया जिसका डीआरएम ने लोकार्पण भी किया था, लेकिन आज तक उस पार्क में कुर्सी के सिवाय कोई भी एक पौधा नही दिखाई दिया। पेय जल के लिए प्लेट फार्म पर हैंडपंप लगे हैं।
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ट्रेन आने पर हैंडपंप पर पानी लेने के लिए यात्रियों में मारामारी होती है। एक दो प्याऊ टोटियां लगी हैं लेकिन वह टूटी हैं। एक यात्री रमेश चंद्र का कहना है कि अगर यात्री प्रतिक्षालय खुला रहता तो कम से कम यात्री लू और बारिश से तो बच जाते। परिवार को लेकर रात में खुले में बैठकर ट्रेनों का इंतजार करना पड़ता है।
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तेज धूप और लू की वजह से यात्रियों को काफी दिक्कत होती है। जौनपुर सिटी स्टेशन को माडल बनाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन यहां यात्री सुविधाओं के नाम पर माडल क्या सामान्य स्टेशनोें के बराबर भी नही है।
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प्लेट फार्म एक पर आरपीएफ चौकी और यात्री प्रतिक्षालय के सामने पेड़ का सहरा देकर दो लोहे की चेयर रखी है। जिसका कोई बेस नही है। चेयर का पावा टूटा है।
स्टेशन की सुंदरता और यात्रियों को ट्रेन का इंतजार करने के लिए परिसर में ही एक छोटा सा पार्क बनाया गया जिसका डीआरएम ने लोकार्पण भी किया था, लेकिन आज तक उस पार्क में कुर्सी के सिवाय कोई भी एक पौधा नही दिखाई दिया। पेय जल के लिए प्लेट फार्म पर हैंडपंप लगे हैं।
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ट्रेन आने पर हैंडपंप पर पानी लेने के लिए यात्रियों में मारामारी होती है। एक दो प्याऊ टोटियां लगी हैं लेकिन वह टूटी हैं। एक यात्री रमेश चंद्र का कहना है कि अगर यात्री प्रतिक्षालय खुला रहता तो कम से कम यात्री लू और बारिश से तो बच जाते। परिवार को लेकर रात में खुले में बैठकर ट्रेनों का इंतजार करना पड़ता है।