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बिना टीका लगे ही जारी कर दिया जा रहा टीकाकरण लगने का प्रमाण पत्र
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जौनपुर। कोरोना टीकाकरण मामले में जनपद की स्थिति प्रदेश में बहुत अच्छी बताई जा रही है। जी हां, टीकाकरण के मामले में जनपद चौथे स्थान पर है। जबकि, इन सब के बीच एक गड़बड़ी भी सामने आ रही है। यह गड़बड़ी फीडिंग करने वाले कर्मचारियों के स्तर से है। जिन्हें टीका नहीं लगा है, उनका भी नंबर फीड कर दे रहे हैं। ऐसे में उनके नाम प्रमाणपत्र भी जारी हो गया है। इस तरह के कई मामले सामने आ रहे हैं, जिसके चलते लोग परेशान हैं।
केस नंबर 01
धरनीधरपुर अहियापुर निवासी कैलाशनाथ गुप्ता की दो मई को कोरोना के कारण मई 2020 में ही निधन हो गया था। हालांकि उन्हें 12 मार्च 2021 को कोविड-19 का पहला टीका लगा था। मुख्यमंत्री योगी यादित्यनाथ ने उनके परिजनों को दस लाख रुपये की आर्थिक सहायता भी दे चुके थे। मगर, 14 जनवरी को रात 8 बजे मोबाइल नंबर पर मृत कैलाशनाथ को कोविड -19 का दूसरा टीका लगा गया। यह सूचना उनके मोबाइल पर नेशनल हेल्थ पोर्टल की ओर से भेजी गई और वेबसाइट से प्रमाणपत्र भी आ गया।
केस नंबर 02
सिपाह मोहल्ले की गायत्री देवी की मौत 10 अप्रैल को हो गई थी। हालांकि उन्होंने 23 मार्च 2021 को कोविड की पहली डोज लगवाई थी। लेकिन 16 जनवरी को घरवालों ने मोबाइल पर मैसेज देखा कि गायत्री देवी को कोविड की दूसरी डोज लगा दी गई है। घर वाले यह मैसेज देखकर सकते में आ गए। उन्हें यह नहीं समझ में आ रहा था कि आखिर जिसकी मौत पांच महीने पहले हो चुकी है, उसे कोविड की दूसरी डोज कैसे लग गई।
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केस नंबर 03
शीतलाधाम चौकिया के पास लख्खनपुर गांव निवासी विनोद कुमार शर्मा ने 24 सितंबर को कोरोना वैक्सीन का पहला टीका लगवाया था। उनके मोबाइल पर फोन आया कि आप टीका लगवा लीजिए। आपकी डेट हो चुकी है। वह 17 जनवरी को जिला अस्पताल कोरोना का दूसरा टीका लगवाने पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि आपको दूसरा डोज लग गया है, जबकि उन्हें हकीकत में टीका लगा ही नहीं था। स्वास्थ्यकर्मियों ने टीका नहीं लगाया, जिसके बाद वे निराश होकर लौट गए।
केस नंबर 04
मछलीशहर ब्लाक के छाछो गांव निवासी सावित्री देवी ने कोरोना टीकाकरण पहली बार 18 अक्तूबर को करवाई थी। इसके बाद उनके बेटे के मोबाइल पर काल करके स्वास्थ्य विभाग से बताया गया कि दूसरी डोज लगवा लीजिए, लेकिन, जब व इसके लिए रजिस्ट्रेशन कराने लगी तो पता चला कि 15 जनवरी को उन्हें दूसरा डोज लग गया है, जबकि अभी तक उन्हें कोरोना का दूसरा डोज नहीं लगा है।
वर्जन
जनपद में शत प्रतिशत टीकाकरण हो गया है। हम इस मामले में पहले स्थान पर है। गिनेचुने ऐसे मामले आए हैं, जिनका नंबर गलत फीड हो गया है। हालांकि ऐसे लोगों द्वारा जब बताया जा रहा है तो उन्हें टीका लगवा दिया जा रहा है। - मनीष कुमार वर्मा, जिलाधिकारी
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केस नंबर 01
धरनीधरपुर अहियापुर निवासी कैलाशनाथ गुप्ता की दो मई को कोरोना के कारण मई 2020 में ही निधन हो गया था। हालांकि उन्हें 12 मार्च 2021 को कोविड-19 का पहला टीका लगा था। मुख्यमंत्री योगी यादित्यनाथ ने उनके परिजनों को दस लाख रुपये की आर्थिक सहायता भी दे चुके थे। मगर, 14 जनवरी को रात 8 बजे मोबाइल नंबर पर मृत कैलाशनाथ को कोविड -19 का दूसरा टीका लगा गया। यह सूचना उनके मोबाइल पर नेशनल हेल्थ पोर्टल की ओर से भेजी गई और वेबसाइट से प्रमाणपत्र भी आ गया।
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केस नंबर 02
सिपाह मोहल्ले की गायत्री देवी की मौत 10 अप्रैल को हो गई थी। हालांकि उन्होंने 23 मार्च 2021 को कोविड की पहली डोज लगवाई थी। लेकिन 16 जनवरी को घरवालों ने मोबाइल पर मैसेज देखा कि गायत्री देवी को कोविड की दूसरी डोज लगा दी गई है। घर वाले यह मैसेज देखकर सकते में आ गए। उन्हें यह नहीं समझ में आ रहा था कि आखिर जिसकी मौत पांच महीने पहले हो चुकी है, उसे कोविड की दूसरी डोज कैसे लग गई।
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केस नंबर 03
शीतलाधाम चौकिया के पास लख्खनपुर गांव निवासी विनोद कुमार शर्मा ने 24 सितंबर को कोरोना वैक्सीन का पहला टीका लगवाया था। उनके मोबाइल पर फोन आया कि आप टीका लगवा लीजिए। आपकी डेट हो चुकी है। वह 17 जनवरी को जिला अस्पताल कोरोना का दूसरा टीका लगवाने पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि आपको दूसरा डोज लग गया है, जबकि उन्हें हकीकत में टीका लगा ही नहीं था। स्वास्थ्यकर्मियों ने टीका नहीं लगाया, जिसके बाद वे निराश होकर लौट गए।
केस नंबर 04
मछलीशहर ब्लाक के छाछो गांव निवासी सावित्री देवी ने कोरोना टीकाकरण पहली बार 18 अक्तूबर को करवाई थी। इसके बाद उनके बेटे के मोबाइल पर काल करके स्वास्थ्य विभाग से बताया गया कि दूसरी डोज लगवा लीजिए, लेकिन, जब व इसके लिए रजिस्ट्रेशन कराने लगी तो पता चला कि 15 जनवरी को उन्हें दूसरा डोज लग गया है, जबकि अभी तक उन्हें कोरोना का दूसरा डोज नहीं लगा है।
वर्जन
जनपद में शत प्रतिशत टीकाकरण हो गया है। हम इस मामले में पहले स्थान पर है। गिनेचुने ऐसे मामले आए हैं, जिनका नंबर गलत फीड हो गया है। हालांकि ऐसे लोगों द्वारा जब बताया जा रहा है तो उन्हें टीका लगवा दिया जा रहा है। - मनीष कुमार वर्मा, जिलाधिकारी