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फसल का अवशेष खेत में जलाना अपराध है: डीडीओ

Fri, 03 Sep 2021 11:20 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 03 Sep 2021 11:20 PM IST
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Burning crop residue in the field is a crime
जौनपुर। कलेक्ट्रेट स्थित प्रेक्षागृह में शुक्रवार को कृषि विभाग की ओर से प्रमोशन ऑफ एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन फॉर इन-सीटू मैनेजमेंट ऑफ क्राप रेजिड्यू योजना के तहत डीडीओ बीबी सिंह की अध्यक्षता में पराली प्रबंधन के लिए जागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया। डीडीओ ने कहा कि कोई भी किसान फसलों के अवशेष खेत में न जलाए। कंबाइन हार्वेस्टर के साथ फसल अवशेष प्रबंधन करने वाले यंत्र के साथ फसल की कटाई कराएं। सभी राजस्व गांवों में कैंप लगाकर किसानों को पराली न जलाने के संबंध में जागरूकता अभियान चलाएंगे।
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उप कृषि निदेशक जय प्रकाश ने बताया कि मुख्य सचिव के निर्देश पर फसल अवशेष जलाए जाने से उत्पन्न हो रहे प्रदूषण की रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. राजेश सिंह ने पराली को गोआश्रम में देकर खाद लेने का सुझाव दिया। कृषि वैज्ञानिक डा. सुरेंद्र प्रताप सोनकर ने कहा कि माननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेश के अनुसार फसलों का अवशेष जलाना दंडनीय अपराध है। इससे होने वाली क्षति की वसूली में दो एकड़ से कम क्षेत्रफल पर 2500 और दो एकड़ से पांच एकड़ के लिए 5000 और पांच एकड़ से ऊपर के क्षेत्रफल के लिए 15000 तक का दंड लगाकर वसूली करने का निर्देश है। फसल कटाई के दौरान कंबाइन हार्वेस्टर के साथ सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम अथवा स्ट्रा रीपर एवं बेलर का उपयोग किया जाना अनिवार्य होगा। जिला कृषि अधिकारी केके सिंह ने कहा कि जनपद में इन - सीटू योजना से ग्राम पंचायत समिति के आठ, सहकारी समितियों के चार और औद्यानिक समिति के तीन फार्म मशीनरी बैंक के लक्ष्य प्राप्त हुए थे। फसल अवशेष प्रबंधन के लिए आठ प्रकार के यंत्र कृषि विभाग से 50 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध है। कार्यक्रम संचालन अपर जिला कृषि अधिकारी रमेश चंद्र यादव ने किया।
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