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भरभराकर गिरा स्कूल का भवन
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Sun, 24 Jul 2016 01:14 AM IST
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शाहगंज के प्राथमिक विद्यालय मोलनापुर उसरहटा का ध्वस्त हुआ भवन।
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मोलनापुर उसरहटा गांव में स्थित प्राथमिक विद्यालय का भूकंपरोधी भवन शुक्रवार की रात को भरभराकर गिर पड़ा। इस भवन का निर्माण वर्ष 2006 में कराया गया था। घटिया निर्माण के चलते बिल्डिंग 10 साल भी नहीं चल सकी। जबकि दावा किया गया था कि यह भवन भूकंप का भी झटका बर्दाश्त कर सकता है।
संयोग कहें कि हादसा रात को हुआ वरना बच्चों और शिक्षकों की भी जान जा सकती थी। मोलनापुर उसरहटा प्राथमिक विद्यालय में पहली कक्षा से लेकर पांचवीं तक 61 बच्चों का नामांकन है। प्रधानाध्यापक समेत तीन शिक्षकों की यहां तैनाती है। पहली कक्षा में 02, कक्षा दो मे 17, कक्षा तीन मे 14, कक्षा चार मे 17 और कक्षा पाचं मे महज 11 छात्रों का
पंजीकरण है। प्रधानाचार्य राम श्रृंगार का कहना है कि बिल्डिंग जर्जर होने की शिकायत अधिकारियों से की गई थी लेकिन किसी ने संज्ञान में नहीं लिया। वर्ष 2006 में इस भूकंपरोधी भवन का निर्माण कराया गया था। मानक के मुताबिक भूकंप रोधी भवन के निर्माण में इतनी मजबूती का ध्यान रखा जाता है कि वह भूकंप का झटका भी बर्दाश्त कर सके।
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लेकिन विद्यालय का यह भवन शुक्रवार की रात जब गिरा तो उस वक्त न तो बारिश हो रही थी और न ही तेज हवा ही चल रही थी। सुबह बिल्डिंग की दशा देख प्रधानाध्यापक और शिक्षकों से लेकर बच्चों के अभिभावक भगवान का शुक्र मना रहे थे कि यह बिल्डिंग रात में गिरी वरना दिन में गिरती तो बड़ा हादसा हो सकता था।
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संयोग कहें कि हादसा रात को हुआ वरना बच्चों और शिक्षकों की भी जान जा सकती थी। मोलनापुर उसरहटा प्राथमिक विद्यालय में पहली कक्षा से लेकर पांचवीं तक 61 बच्चों का नामांकन है। प्रधानाध्यापक समेत तीन शिक्षकों की यहां तैनाती है। पहली कक्षा में 02, कक्षा दो मे 17, कक्षा तीन मे 14, कक्षा चार मे 17 और कक्षा पाचं मे महज 11 छात्रों का
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पंजीकरण है। प्रधानाचार्य राम श्रृंगार का कहना है कि बिल्डिंग जर्जर होने की शिकायत अधिकारियों से की गई थी लेकिन किसी ने संज्ञान में नहीं लिया। वर्ष 2006 में इस भूकंपरोधी भवन का निर्माण कराया गया था। मानक के मुताबिक भूकंप रोधी भवन के निर्माण में इतनी मजबूती का ध्यान रखा जाता है कि वह भूकंप का झटका भी बर्दाश्त कर सके।
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लेकिन विद्यालय का यह भवन शुक्रवार की रात जब गिरा तो उस वक्त न तो बारिश हो रही थी और न ही तेज हवा ही चल रही थी। सुबह बिल्डिंग की दशा देख प्रधानाध्यापक और शिक्षकों से लेकर बच्चों के अभिभावक भगवान का शुक्र मना रहे थे कि यह बिल्डिंग रात में गिरी वरना दिन में गिरती तो बड़ा हादसा हो सकता था।