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वायु प्रदूषण में सातवें नंबर पर पहुंचा बनारस, जौनपुर देश का चौथा सर्वाधिक प्रदूषित शहर

Tue, 05 Jan 2021 11:21 AM IST
विचित्र सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: विचित्र सिंह Updated Tue, 05 Jan 2021 11:21 AM IST
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Banaras reached number seven in air pollution Jaunpur is the fourth most polluted city in the country
कचरा चलाए जाने से प्रदूषण का खतरा बढ़ा। - फोटो : अमर उजाला

वायु प्रदूषण में देश में टापटेन सूची में शामिल बनारस की हवा में सोमवार को सुधार हुआ। हालांकि जौनपुर वायु प्रदूषण के मामले में चौथे नंबर पर है। आईक्यू एयर की ओर से रात 10 बजे जारी वायु गुणवत्ता सूचकांक के अनुसार वाराणसी सातवें नंबर पर है। शहर की वायु गुणवत्ता के स्तर में सुधार से प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने भी राहत की सांस ली है। 

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सोमवार को आईक्यू एयर की ओर से जारी एयर क्वालिटी इंडेक्स के अनुसार जौनपुर का एक्यूआई 314 और वाराणसी का एक्यूआई 262 रहा। शहर में चल रही खोदाई और लगने वाले जाम ने बनारस की हवा को पिछले तीन महीनों से खराब कर रहा है। वायु प्रदूषण के मामले में एक जनवरी को बनारस चौथे नंबर पर, दो जनवरी को दूसरे और तीन जनवरी को चौथे नंबर पर रहा।
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शहर का सबसे प्रदूषित इलाका नाटी इमली रहा। वहां का एयर क्वालिटी इंडेक्स 283, लंका का 241 और अर्दली बाजार का 168 रहा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार अर्दली बाजार का एयर क्वालिटी इंडेक्स 184 रहा। पीएम 10 की अधिकतम मात्रा 322, न्यूनतम मात्रा 156, ओजोन की अधिकतम मात्रा 265 और नाइट्रोजन आक्साइड की अधिकतम मात्रा 100 रही। 

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निर्माण कार्यों ने बढ़ाई परेशानी

Banaras reached number seven in air pollution Jaunpur is the fourth most polluted city in the country
हरियाली गायब।

शहर में हरित आवरण बढ़ने, विशेष रूप से पेड़ पौधों के साथ उचित यातायात और सड़क प्रबंधन से वायु प्रदूषण को कम किया जा सकता है। बीएचयू के वनस्पति विज्ञान विभाग की ओर से हुए शोध के अनुसार कचरे और बायोमास को जलाना, शहर में लगने वाला जाम, शहर में चल रहे निर्माण कार्य, सड़कों की मरम्मत और खोदाई को पार्टिकुलेट मैटर उत्सर्जन बढ़ाने के लिए जिम्मेदार पाया गया।

हरियाली ढूंढते रह जाओगे

शहर पूरी तरह से कंक्रीट का जंगल बन चुका है। कई मोहल्ले में जल चढ़ाने के लिए नीम और पीपल के पेड़ तक नहीं बचे हैं। सड़क किनारे कहीं छांव के लिए भी पेड़ नहीं हैं। जहां थोड़ी बहुत हरियाली है, वहां भी पेड़ों को सुखाकर बिल्डिंग तानने की तैयारी है। वीडीए के ग्रीन बेल्ट में भी धड़ाधड़ निर्माण हो रहे हैं। जब पेड़ ही नहीं हैं तो भला हवा से जहर कैसे कम होगा।

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