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प्रसव के दौरान बच्चे की मौत से फूटा गुस्सा

Fri, 30 Jan 2015 11:48 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर Updated Fri, 30 Jan 2015 11:48 PM IST
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Angry happened to the child's death during labor
प्रसव के दौरान बच्चे की मौत से नाराज ग्रामीणों ने शुक्रवार को महराजगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर जमकर हंगामा किया। गुस्साए ग्रामीणों ने चिकित्सा अधीक्षक और कर्मचारियों को अस्पताल के अंदर कर बाहर से ताला लगा दिया। हंगामे की सूचना पर पहुंचे दो एडिशनल सीएमओ को भी ग्रामीणों ने बंधक बना लिया।
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ग्रामीणों का आरोप था कि स्टाफ नर्स की लापरवाही से बच्चे की मौत हो गई। ग्रामीणों से घिरे एडिशनल सीएमओ ने मुख्य चिकित्साधिकारी से बात कर 15 दिन के भीतर चिकित्सा अधीक्षक के तबादले का आश्वासन दिया तो ग्रामीणों का गुस्सा शांत हुआ। करीब साढ़े छह घंटे बाद चिकित्सा अधीक्षक अस्पताल से बाहर निकल सके।
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महराजगंज ब्लाक के सवंसा गांव निवासी धर्मेंद्र गौतम की पत्नी पूनम (22) को गुरुवार को प्रसव पीड़ा हुई तो परिवार के लोग उसे लेकर सीएचसी महराजगंज पहुंचे। परिवार के लोगों का आरोप है कि शाम को करीब छह बजे जब वे सीएचसी पर पहुंचे तो वहां तैनात स्टाफ नर्स रत्ना देवी ने प्रसूता को भर्ती कर लिया। करीब तीन घंटे बाद यह कहते हुए रेफर कर दिया कि प्रसूता की हालत नाजुक हो गई है।
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 घर वाले  महिला को लेकर  निजी अस्पताल पहुंचें, जहां आपरेशन से प्रसव कराया गया तो बच्चे की मौत हो चुकी थी। परिवारीजनों का कहना है कि सीएचसी पर तैनात नर्स अगर समय रहते रेफर कर दी होती तो बच्चे की जान बच सकती थी।

 इस बात से गुस्साए सौ से अधिक की संख्या में लोग शुक्रवार को सुबह करीब नौ बजे सीएचसी पहुंच गए। चिकित्सा अधीक्षक डा. यूपी शर्मा और कर्मचारियों को अस्पताल में बंद कर बाहर से ताला लगा दिया।  सूचना पर एडिशनल सीएमओ डा. रामप्यारे और डा. आरएस कुशवाहा मौके पर पहुंचे तो ग्रामीण उन्हें भी घेरकर बैठ गए।

ग्रामीण सीएमओ के आने की जिद पर ही अड़े रहे। काफी जद्दोजहद के बाद एडिशनल सीएमओ ने आश्वासन दिया कि पीड़ित महिला को पांच हजार की आर्थिक मदद दी जाएगी।  चिकित्सा अधीक्षक के स्थानांतरण और अस्पताल में रात को भी चिकित्सक की मौजूदगी का आश्वासन दिया तो  एडिशनल सीएमओ और चिकित्सा अधीक्षक  को ग्रामीणों ने मुक्त किया।


इस संबंध में मुख्य चिकित्साधिकारी डा. डीके यादव कहाकि केस स्टाफ नर्स के बस का नहीं था तो उसने रेफर कर दिया था। अस्पताल में बवाल कर रहे ग्रामीणों की खबर पर दो एडिशनल सीएमओ को भेजा था। किसी तरह समझाकर मामला शांत कराया गया। वहां से चिकित्सा अधीक्षक का तबादला किया जाएगा और अस्पताल में रात को भी डाक्टर के रुकने की व्यवस्था की जाएगी।

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