{"_id":"496c8b2d7f7e834a5023b1ab884072ca","slug":"affect-the-cultivation-of-pan-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"ठंड से पान की खेती प्रभावित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ठंड से पान की खेती प्रभावित
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Sun, 11 Jan 2015 12:22 AM IST
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ठंड ने पान के किसानों की कमर तोड़कर रख दी है। पिछले कई दिनों से पड़ रही कड़ाके की ठंड के कारण पान में अगैती झुलसा रोग लगने से पूरा पौधा ही सड़ जा रहा है। इसके चलते कुछ समय बाद पौधा सूख जा रहा है। गाढ़ी कमाई हाथ से निकलते देख किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
पान की खेती करने वाले जिले के किसानों को भारी चपत लगी है। हर वर्ष लाखों रुपये कमाने वाले किसान काफी मायूस हैं। किसानों का कहना है कि पान की खेती में पूरी मेहनत बेकार चली गई। पान को छाया करने के लिए लगाई गई बांस बल्ली का पैसा भी डूबता नजर आ रहा है। महराजगंज ब्लाक के उदयभानपुर, कोल्हुआ आदि गांवों में देसी पान
की खेती बड़े पैमाने पर होती है। खेती करने वाले किसान बलराम चौरसिया, लालजी चौरसिया, बृजलाल ने बताया कि पान की खेती के लिए अप्रैल और मई माह में पूरी तैयारी कर ली गई थी। बुवाई के बाद अगस्त, सितंबर में पौधों में पत्ते आने लगते हैं। दिसंबर माह से ही पत्तों को तोड़कर वाराणसी की मंडी में भेजने का सिलसिला शुरू हो जाता है।
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अधिक ठंड पड़ने के कारण पान में रोग लगा गया है। इसके चलते पौधों सड़ने लगे हैं इससे पूरा पौधा सूख जा रहा है।
कहा कि पान की फसल को अप्रैल, मई तक बचाने के लिए पूरी व्यवस्था की जाती है। धूप लगने पर पान के पत्ते खराब हो जाते हैं। पान के पौधे सूखने के कारण किसानों को काफी नुकसान हुआ है। परवल, कुनरू की खेती में किसानों को
ठंड ने झटका दिया है। अब किसानों को सब्जी वाली फसल से कुछ उम्मीद है। दयाराम केसरी, गुरु प्रसाद, फूलचंद, प्रहलाद, पंडोही, प्रेम लाल यादव, जमुना प्रसाद का कहना है पान खेती में रोग लगने लगने के कारण काफी घाटा हुआ है।
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पान की खेती करने वाले जिले के किसानों को भारी चपत लगी है। हर वर्ष लाखों रुपये कमाने वाले किसान काफी मायूस हैं। किसानों का कहना है कि पान की खेती में पूरी मेहनत बेकार चली गई। पान को छाया करने के लिए लगाई गई बांस बल्ली का पैसा भी डूबता नजर आ रहा है। महराजगंज ब्लाक के उदयभानपुर, कोल्हुआ आदि गांवों में देसी पान
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की खेती बड़े पैमाने पर होती है। खेती करने वाले किसान बलराम चौरसिया, लालजी चौरसिया, बृजलाल ने बताया कि पान की खेती के लिए अप्रैल और मई माह में पूरी तैयारी कर ली गई थी। बुवाई के बाद अगस्त, सितंबर में पौधों में पत्ते आने लगते हैं। दिसंबर माह से ही पत्तों को तोड़कर वाराणसी की मंडी में भेजने का सिलसिला शुरू हो जाता है।
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अधिक ठंड पड़ने के कारण पान में रोग लगा गया है। इसके चलते पौधों सड़ने लगे हैं इससे पूरा पौधा सूख जा रहा है।
कहा कि पान की फसल को अप्रैल, मई तक बचाने के लिए पूरी व्यवस्था की जाती है। धूप लगने पर पान के पत्ते खराब हो जाते हैं। पान के पौधे सूखने के कारण किसानों को काफी नुकसान हुआ है। परवल, कुनरू की खेती में किसानों को
ठंड ने झटका दिया है। अब किसानों को सब्जी वाली फसल से कुछ उम्मीद है। दयाराम केसरी, गुरु प्रसाद, फूलचंद, प्रहलाद, पंडोही, प्रेम लाल यादव, जमुना प्रसाद का कहना है पान खेती में रोग लगने लगने के कारण काफी घाटा हुआ है।