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टिकट को लेकर छिड़ी जंग, गठबंधन के तय नहीं हुए प्रत्याशी
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जौनपुर। लोकसभा चुनाव एलान होना अभी होना बाकी है लेकिन राजनीतिक दलों में टिकट पाने जोड़तोड़ शुरू हो गई है। सपा-बसपा गठबंधन के तहत जिले की दोनों सीटें बसपा के खाते में हैं। लिहाजा बसपा के नेता जोड़तोड़ कर रहे हैं। कुछ और भी नेता हैं जो बसपा में जाने की फिराक में हैं। कांग्रेस के टिकट के भी कम दावेदार नहीं हैं। भाजपा दोनों की सीटों पर काबिज है लेकिन वहां भी कई नेता उम्मीदवारी की ताक में हैं।
वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में बसपा ने परचम लहराया था। बसपा के धनंजय सिंह ने सपा प्रत्याशी पारसनाथ यादव को हराया था। इस तरह पहली बार इस सीट पर बसपा को जीत मिली थी। मछलीशहर से बसपा से टी राम, रामफेर गौतम, बीपी सरोज और डा. सिद्घार्थ टिकट मांग रहे हैं। जौनपुर से पूर्व सांसद उमाकांत यादव, लालजी यादव, मनोज सिंह, अशोक सिंह, पूर्व मंत्री सुभाष पांडेय और मड़ियाहूं से 2017 में विधानसभा का चुनाव लड़ चुके भोला प्रसाद शुक्ला टिकट की दौड़ में हैं।
मौजूदा समय में भाजपा दोनों सीटों पर काबिज है। इसके बावजूद टिकट के लिए नेता अपनी गुणागणित भिड़ा रहे हैं। जौनपुर सदर से केपी सिंह सांसद हैं। इसके बावजूद यहां टिकट के दावेदारों की कमी नहीं है। प्रदेश प्रवक्ता मनीष शुक्ल, मनोज सिंह, पूर्व विधायक सीमा द्विवेदी, ज्ञान प्रकाश सिंह, रामसिंह मौर्य, सूर्य प्रकाश सिंह मुन्ना, पाणिनी सिंह, दिनेश सिंह बब्बू, सरदार सिंह, पुष्पराज सिंह, पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह, रमाशंकर पांडेय, राजेंद्र यादव काका, प्रमोद यादव, अंजू पाठक, अनीता सिद्घार्थ, किरन श्रीवास्तव, सुशील मिश्रा, नीरज सिंह, बदलापुर के विधायक रमेशचंद्र मिश्र, जफराबाद के विधायक डा. हरेंद्र सिंह ने दावेदारी पेश की है। हरेंद्र सिंह के समर्थकों ने तो सोशल मीडिया पर उनको प्रबल दावेदार के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है। नगर विकास राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव का नाम भी चल रहा है। ऐसा माना जा रहा है यादव समाज के लोगों को गठबंधन से दूर करने के लिए उन्हें लड़ाया जा सकता है। जिलाध्यक्ष सुशील उपाध्याय खुलकर कुछ नहीं कह रहे हैं लेकिन अंदरखाने के उनके नाम की भी चर्चा है।
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मछलीशहर सीट पर रामचरित्र निषाद काबिज हैं। वह मान रहे हैं कि उनका टिकट पक्का है। लिहाजा उन्होंने प्रचार शुरू कर दिया है। उनके पांच प्रचार वाहन क्षेत्र में दौड़ रहे हैं। मगर यहां से एमएलसी विद्यासागर सोनकर, विधानसभा चुनाव लड़ चुकी अनीता रावत, केराकत विधायक दिनेश चौधरी, दिग्विजय सिंह, बसंत आदि के भी नामों की चर्चा चल रही है। एक पूर्व सांसद भी टिकट पाने में लगे हैं। कांग्रेस में वैसे तो कोई बड़ा नाम चर्चा में नहीं आया है लेकिन मछलीशहर से राजेश गौतम, वीरेंद्र सोनकर, पंकज सोनकर, राजनाथ, द्वारिका और जौनपुुर से विजयशंकर उपाध्याय, हुकुम सिंह, गौरव सिंह, सौरभ शुक्ला के नामों की चर्चा है। पूर्व विधायक नदीम जावेद टिकट मांग तो नहीं रहे हैं लेकिन राष्ट्रीय नेतृत्व उन्हें चुनाव मैदान में उतार सकता है। सपा कांग्रेस गठबंधन पर मुंगराबादशाहपुर से विधानसभा चुुनाव लड़ चुके अजय दूबे अज्जू दूबे भी टिकट पाने में लगे हैं।
इनसेट--
पूर्व सांसद धनंजय को लेकर असमंजस
जौनपुर। पूर्व सांसद धनंजय सिंह की दावेदारी भी मजबूत है। वह किस दल से प्रत्याशी होते हैं अभी तय नहीं हो पा रहा है। भाजपा के सहयोगी दलों से उनकी उम्मीदवारी की चर्चा चल रही है। पिछले दिनों आरएसएस के नेताओं से उनकी नजदीकी को लेकर राजनैतिक माहौल गरम हुआ था। भाजपा के कुछ बड़े नेता इस बात पर जोर दे रहे हैं कि धनंजय को अगर सहयोगी दलों से चुनाव में उतारा गया तो वह अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं।
इनसेट--
कब कौन रहा सांसद
1952 आम चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी बीरबल सिंह जीते
1957 चुनाव में पुन: बीरबल सिंह कांग्रेस के सांसद बने
1962 चुनाव में पहली बार जनसंघ के ब्रहमजीत सिंह जीते
1963 में हुए उप चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी राजदेव सिंह जीते
1967 और 1971 में भी कांग्रेस प्रत्याशी राजदेव सिंह सांसद बने
1977 में भारतीय लोकदल के प्रत्याशी राजा यादवेंद्र दत्त दूबे चुनाव जीते
1980 में जनता पार्टी सेकूलर के प्रत्याशी अजीजुल्लाह आजमीं सांसद बने
1984 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस से कमला प्रसाद सिंह जीते
1989 में भाजपा से राजा यादवेंद्र दत्त दूबे सांसद बने
1991 में जनता दल के अर्जुन यादव सांसद बने
1996 में भाजपा से राजकेशर सिंह सांसद चुने गए
1998 में समाजवादी पार्टी के पारसनाथ यादव पहली बार सांसद चुने गए
1999 में भाजपा प्रत्याशी स्वामी चिन्मयानंद जीते
2004 लोकसभा चुनाव में सपा प्रत्याशी पारसनाथ यादव जीते
2009 में बसपा से धनंजय सिंह सांसद बने
2014 लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी केपी सिंह जीते
वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में बसपा ने परचम लहराया था। बसपा के धनंजय सिंह ने सपा प्रत्याशी पारसनाथ यादव को हराया था। इस तरह पहली बार इस सीट पर बसपा को जीत मिली थी। मछलीशहर से बसपा से टी राम, रामफेर गौतम, बीपी सरोज और डा. सिद्घार्थ टिकट मांग रहे हैं। जौनपुर से पूर्व सांसद उमाकांत यादव, लालजी यादव, मनोज सिंह, अशोक सिंह, पूर्व मंत्री सुभाष पांडेय और मड़ियाहूं से 2017 में विधानसभा का चुनाव लड़ चुके भोला प्रसाद शुक्ला टिकट की दौड़ में हैं।
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मौजूदा समय में भाजपा दोनों सीटों पर काबिज है। इसके बावजूद टिकट के लिए नेता अपनी गुणागणित भिड़ा रहे हैं। जौनपुर सदर से केपी सिंह सांसद हैं। इसके बावजूद यहां टिकट के दावेदारों की कमी नहीं है। प्रदेश प्रवक्ता मनीष शुक्ल, मनोज सिंह, पूर्व विधायक सीमा द्विवेदी, ज्ञान प्रकाश सिंह, रामसिंह मौर्य, सूर्य प्रकाश सिंह मुन्ना, पाणिनी सिंह, दिनेश सिंह बब्बू, सरदार सिंह, पुष्पराज सिंह, पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह, रमाशंकर पांडेय, राजेंद्र यादव काका, प्रमोद यादव, अंजू पाठक, अनीता सिद्घार्थ, किरन श्रीवास्तव, सुशील मिश्रा, नीरज सिंह, बदलापुर के विधायक रमेशचंद्र मिश्र, जफराबाद के विधायक डा. हरेंद्र सिंह ने दावेदारी पेश की है। हरेंद्र सिंह के समर्थकों ने तो सोशल मीडिया पर उनको प्रबल दावेदार के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है। नगर विकास राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव का नाम भी चल रहा है। ऐसा माना जा रहा है यादव समाज के लोगों को गठबंधन से दूर करने के लिए उन्हें लड़ाया जा सकता है। जिलाध्यक्ष सुशील उपाध्याय खुलकर कुछ नहीं कह रहे हैं लेकिन अंदरखाने के उनके नाम की भी चर्चा है।
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मछलीशहर सीट पर रामचरित्र निषाद काबिज हैं। वह मान रहे हैं कि उनका टिकट पक्का है। लिहाजा उन्होंने प्रचार शुरू कर दिया है। उनके पांच प्रचार वाहन क्षेत्र में दौड़ रहे हैं। मगर यहां से एमएलसी विद्यासागर सोनकर, विधानसभा चुनाव लड़ चुकी अनीता रावत, केराकत विधायक दिनेश चौधरी, दिग्विजय सिंह, बसंत आदि के भी नामों की चर्चा चल रही है। एक पूर्व सांसद भी टिकट पाने में लगे हैं। कांग्रेस में वैसे तो कोई बड़ा नाम चर्चा में नहीं आया है लेकिन मछलीशहर से राजेश गौतम, वीरेंद्र सोनकर, पंकज सोनकर, राजनाथ, द्वारिका और जौनपुुर से विजयशंकर उपाध्याय, हुकुम सिंह, गौरव सिंह, सौरभ शुक्ला के नामों की चर्चा है। पूर्व विधायक नदीम जावेद टिकट मांग तो नहीं रहे हैं लेकिन राष्ट्रीय नेतृत्व उन्हें चुनाव मैदान में उतार सकता है। सपा कांग्रेस गठबंधन पर मुंगराबादशाहपुर से विधानसभा चुुनाव लड़ चुके अजय दूबे अज्जू दूबे भी टिकट पाने में लगे हैं।
इनसेट--
पूर्व सांसद धनंजय को लेकर असमंजस
जौनपुर। पूर्व सांसद धनंजय सिंह की दावेदारी भी मजबूत है। वह किस दल से प्रत्याशी होते हैं अभी तय नहीं हो पा रहा है। भाजपा के सहयोगी दलों से उनकी उम्मीदवारी की चर्चा चल रही है। पिछले दिनों आरएसएस के नेताओं से उनकी नजदीकी को लेकर राजनैतिक माहौल गरम हुआ था। भाजपा के कुछ बड़े नेता इस बात पर जोर दे रहे हैं कि धनंजय को अगर सहयोगी दलों से चुनाव में उतारा गया तो वह अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं।
इनसेट--
कब कौन रहा सांसद
1952 आम चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी बीरबल सिंह जीते
1957 चुनाव में पुन: बीरबल सिंह कांग्रेस के सांसद बने
1962 चुनाव में पहली बार जनसंघ के ब्रहमजीत सिंह जीते
1963 में हुए उप चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी राजदेव सिंह जीते
1967 और 1971 में भी कांग्रेस प्रत्याशी राजदेव सिंह सांसद बने
1977 में भारतीय लोकदल के प्रत्याशी राजा यादवेंद्र दत्त दूबे चुनाव जीते
1980 में जनता पार्टी सेकूलर के प्रत्याशी अजीजुल्लाह आजमीं सांसद बने
1984 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस से कमला प्रसाद सिंह जीते
1989 में भाजपा से राजा यादवेंद्र दत्त दूबे सांसद बने
1991 में जनता दल के अर्जुन यादव सांसद बने
1996 में भाजपा से राजकेशर सिंह सांसद चुने गए
1998 में समाजवादी पार्टी के पारसनाथ यादव पहली बार सांसद चुने गए
1999 में भाजपा प्रत्याशी स्वामी चिन्मयानंद जीते
2004 लोकसभा चुनाव में सपा प्रत्याशी पारसनाथ यादव जीते
2009 में बसपा से धनंजय सिंह सांसद बने
2014 लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी केपी सिंह जीते