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कागज पर ही हो रहा हैंडपंपो के मरम्मत का कार्य
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जौनपुर। जिले में खराब इंडिया मार्का टू हैंडपंपों का मरम्मत कागज पर ही किया जा रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिला पंचायत राज कार्यालय में बिगड़े हैंडपंपों का कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। हालत यह है कि ग्राम पंचायतों द्वारा रीबोर को छोड़कर मामूली रूप से खराब इंडिया मार्का टू हैंडपंपों को भी ठीक नहीं किया जा रहा है। वहीं जिम्मेदार कर्मी इंडिया मार्का टू हैंडपंपों को ठीक कराने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
सांसद व विधायक सहित अन्य जनप्रतिनिधियों द्वारा जिले में इंडिया मार्का टू हैंडपंपों को लगवाने का कार्य किया जाता है। लेकिन हैंडपंपों के खराब होने की उसे बनवाने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को दी गई है। खराब पड़े हैंडपंपों की मरम्मत 14वें वित्त की धनराशि से कराया जाना है। जिले में कुल 91502 हैंडपंप लगे हैं। एक अनुमान के मुताबिक लगभग सात हजार हैंडपंप बिगड़े पड़े हैं। जिसमें पांच हजार हैंडपंप रिबोर पड़े हैं। हालत यह है कि ग्राम पंचायतों द्वारा खराब हैंडपंपों का आंकड़ा तो जुटाया जा रहा है। लेकिन सिर्फ रीबोर वाले हैंडपंपों को ही ठीक कराया जा रहा है। मामूली रूप से खराब हैंडपंपों को बनवाने का कार्य नहीं किया जा रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बरामनपुर गांव निवासी मोनू ने बताया कि हैंडपंप खराब था। कई बार शिकायत की गई। लेकिन उसे ठीक नहीं कराया गया है। अंत में स्वयं पैसा खर्च कर हैंडपंप को बनवाया गया।
कोट:
खराब इंडिया मार्का टू हैंडपंपों को ठीक कराने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की है। जिसके कारण विभाग में खराब हैंडपंपों का आंकड़ा नहीं है, जहां तक रीबोर को छोड़कर मामूली रूप से खराब हैंडपंपों को ठीक नहीं कराने की बात है तो इसकी शिकायत लोगों को करनी चाहिए। जिस पर संबंधित के विरुद्घ कार्यवाई करते हुए हैंडपंपों को ठीक कराया जाएगा।
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सभाजीत पांडेय
जिला पंचायत राज अधिकारी
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सांसद व विधायक सहित अन्य जनप्रतिनिधियों द्वारा जिले में इंडिया मार्का टू हैंडपंपों को लगवाने का कार्य किया जाता है। लेकिन हैंडपंपों के खराब होने की उसे बनवाने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को दी गई है। खराब पड़े हैंडपंपों की मरम्मत 14वें वित्त की धनराशि से कराया जाना है। जिले में कुल 91502 हैंडपंप लगे हैं। एक अनुमान के मुताबिक लगभग सात हजार हैंडपंप बिगड़े पड़े हैं। जिसमें पांच हजार हैंडपंप रिबोर पड़े हैं। हालत यह है कि ग्राम पंचायतों द्वारा खराब हैंडपंपों का आंकड़ा तो जुटाया जा रहा है। लेकिन सिर्फ रीबोर वाले हैंडपंपों को ही ठीक कराया जा रहा है। मामूली रूप से खराब हैंडपंपों को बनवाने का कार्य नहीं किया जा रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बरामनपुर गांव निवासी मोनू ने बताया कि हैंडपंप खराब था। कई बार शिकायत की गई। लेकिन उसे ठीक नहीं कराया गया है। अंत में स्वयं पैसा खर्च कर हैंडपंप को बनवाया गया।
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कोट:
खराब इंडिया मार्का टू हैंडपंपों को ठीक कराने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की है। जिसके कारण विभाग में खराब हैंडपंपों का आंकड़ा नहीं है, जहां तक रीबोर को छोड़कर मामूली रूप से खराब हैंडपंपों को ठीक नहीं कराने की बात है तो इसकी शिकायत लोगों को करनी चाहिए। जिस पर संबंधित के विरुद्घ कार्यवाई करते हुए हैंडपंपों को ठीक कराया जाएगा।
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सभाजीत पांडेय
जिला पंचायत राज अधिकारी