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जिले की 28.45 फीसदी आबादी निरक्षर
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Tue, 14 Jun 2016 12:47 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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राष्ट्रीय साक्षरता मिशन के कार्यक्रम जिले में सिर्फ कागजों में ही सिमट कर रह गया है। आज भी जिले की 28.45 फीसदी आबादी निरक्षर है। साक्षर महिलाओं की संख्या पुरुषों की तुलना में 23.99 फीसदी कम है।
15 साल या इससे अधिक उम्र के निरक्षर लोगों को साक्षर बनाने के लिए गांव गांव में शिक्षा प्रेरक तो रख दिए गए हैं, पर एक साल से उन्हें कोई शिक्षण सामग्री ही नहीं दी गई। सूत्रों पर भरोसा करें तो शिक्षण सामग्री का बजट भी है पर अधिकारियों को खरीदने के लिए एक साल से फुर्सत ही नहीं मिली।
वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों पर गौर करें तो करीब 45 लाख की आबादी वाले इस जिले में 27 लाख 31 हजार 670 लोग साक्षर हैं। इसमें पुरुषों की संख्या 1565390 और महिलाओं की संख्या 1166280 है। जिले की कुल साक्षरता 71.55 फीसदी है।
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जबकि पुरुषों का साक्षरता प्रतिशत 83.80 और महिलाओं की साक्षरता दर 59.81 प्रतिशत है। 15 वर्ष या इससे अधिक उम्र के निरक्षर लोगों को साक्षर बनाने के लिए राष्ट्रीय साक्षरता मिशन के तहत गांव गांव में कुल 3004 शिक्षा प्रेरकों की तैनाती की गई है।
शिक्षा प्रेरकों को जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे पूरे गांव का सर्वे कर निरक्षरों की सूची तैयार करें। उसमें से जो लोग पढ़ना चाहेंगे उन्हें गांव में बनाए गए केंद्र पर पढ़ाना होगा। इसके लिए उन्हें कापी, किताब, पेन आदि सामग्री भी मुफ्त में देने का प्राविधान है।
दो हजार रुपये प्रति माह के मानदेय पर शिक्षा प्रेरकों की फौज तो खड़ी कर दी गई पर कोई कहीं अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रहा है। अलबत्ता हर साल मार्च और अगस्त के महीने में परीक्षा करवाकर संबंधित को राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय की ओर से सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है। बेसिक शिक्षा विभाग का दावा है कि पिछले साल जिले में इस योजना के तहत एक लाख 13 हजार 54 लोगों को साक्षर बनाकर उन्हें प्रमाण पत्र दे दिया गया है।
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15 साल या इससे अधिक उम्र के निरक्षर लोगों को साक्षर बनाने के लिए गांव गांव में शिक्षा प्रेरक तो रख दिए गए हैं, पर एक साल से उन्हें कोई शिक्षण सामग्री ही नहीं दी गई। सूत्रों पर भरोसा करें तो शिक्षण सामग्री का बजट भी है पर अधिकारियों को खरीदने के लिए एक साल से फुर्सत ही नहीं मिली।
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वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों पर गौर करें तो करीब 45 लाख की आबादी वाले इस जिले में 27 लाख 31 हजार 670 लोग साक्षर हैं। इसमें पुरुषों की संख्या 1565390 और महिलाओं की संख्या 1166280 है। जिले की कुल साक्षरता 71.55 फीसदी है।
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जबकि पुरुषों का साक्षरता प्रतिशत 83.80 और महिलाओं की साक्षरता दर 59.81 प्रतिशत है। 15 वर्ष या इससे अधिक उम्र के निरक्षर लोगों को साक्षर बनाने के लिए राष्ट्रीय साक्षरता मिशन के तहत गांव गांव में कुल 3004 शिक्षा प्रेरकों की तैनाती की गई है।
शिक्षा प्रेरकों को जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे पूरे गांव का सर्वे कर निरक्षरों की सूची तैयार करें। उसमें से जो लोग पढ़ना चाहेंगे उन्हें गांव में बनाए गए केंद्र पर पढ़ाना होगा। इसके लिए उन्हें कापी, किताब, पेन आदि सामग्री भी मुफ्त में देने का प्राविधान है।
दो हजार रुपये प्रति माह के मानदेय पर शिक्षा प्रेरकों की फौज तो खड़ी कर दी गई पर कोई कहीं अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रहा है। अलबत्ता हर साल मार्च और अगस्त के महीने में परीक्षा करवाकर संबंधित को राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय की ओर से सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है। बेसिक शिक्षा विभाग का दावा है कि पिछले साल जिले में इस योजना के तहत एक लाख 13 हजार 54 लोगों को साक्षर बनाकर उन्हें प्रमाण पत्र दे दिया गया है।