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हाइवे पर उड़ रही धूल से जहरीली हो रही हवा
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जौनपुर। लखनऊ वाराणसी हाइवे को फोरलेन बनाने का काम पिछले चार साल से चल रहा है। सड़क पर मिट्टी की भराई, खुदाई के साथ ही उसपर दौड़ रहे बारी वाहनों के चलते दिन रात उड़ रहे धूल और गुबार से लोग परेशान हैं। हाइवे के किनारे रहने वाले सौ से अधिक गांवों की वायु की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है। उड़ रही धूल से लोग सांस के मरीज हो रहे हैं और मुश्किल भरे हालात में जी रहे हैं। पर्यावरण मंत्रालय द्वारा बीते साल लाए गए धूल नियंत्रण नियम का भी पालन हाइवे निर्माण एजेंसी की ओर से नहीं किया जा रहा है। क्षेत्रीय लोग निर्माण एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
लखनऊ-वाराणसी हाइवे को फोरलेन बनाने के लिए जगह जगह मिट्टी डालकर या सड़क की खुदाई कर छोड़ दिया गया है। हाईवे पर भारी वाहनों का दबाव है। जिससे दिन रात धूल और गुबार उड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी सड़क के किनारे वाले गांव के लोगों और दूकानदारों को हो रही है। सड़क पर बाइक से चलने वाले दैनिक यात्री भी इस समस्या से जूझ रहे हैं। कई कई किलोमीटर तक तेज धूल उडने के चलते लोगों की सांस पूलने लगती है। कुल्हनामऊ, लखौवा बाजार, बक्शा, उचौरा, लखनीपुर, चुरावनपुर, गोरियापुर, ब्राह्मणपुर बरखंडी, मोहम्दपुर, टिकरी समेत जिले की सीमा में हाइवे के किनारे वाले तकरीबन एक सौ गांव के लोग धूल और गुबार के चलते परेशान हैं। लखनीपुर गांव निवासी नंदलाल का कहना है कि घर अंदर के कमरों में भी रोज धूल जमा हो जाती है। सोते समय भी अधिकतर लोग मास्क लगाकर सोते हैं। सवंशा गांव के बब्लू कुमार कहते हैं कि उनका घर हाइवे से करीब तीन सौ मीटर दूरी पर है लेकिन घर के अंदर तक धूल पहुंचती है। सांस लेना भी दुश्वार हो गया है। लखौवा बाजार निवासी किराना व्यवसायी सुशील कुमार कहते हैं कि कभी कभी जब एक साथ कई बड़े वाहन गुजरते हैं तो धूल के चलते दम घुटने लगता है।
नहीं होता पानी का छिड़काव
जौनपुर। पर्यावरण मंत्रालय के धूल नियंत्रण नियम के मुताबिक हाइवे निर्माण करने वाली एजेंसी की जिम्मेदारी है कि वह लोगों की सेहत का ध्यान रखे और नियमित रूप से पानी का छिड़काव करे, जिससे धूल गुबार से लोग सुरक्षित रह सकें। मगर इस नियम का भी पालन हाइवे निर्माण एजेंसी की ओर से नहीं किया जा रहा है।
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क्या कहते हैं डाक्टर
जौनपुर। हृदय रोग विशेषज्ञ डा. हरेंद्र देव सिंह का कहना है कि सड़क की गंदगी धूल गुबार के साथ हवा में फैलकर इंसान के शरीर में प्रवेश करती है। जिससे सांस दमा और फेफड़े में संक्रमण जैसी बीमारी हो रही है। जहरीली धूल से त्वचा और आंख में भी जलन की समस्या बढने का खतरा बना रहता है। इससे बचने के लिए मास्क लगाकर निकलना चाहिए।
जिन स्थानों पर फोरलेन का निर्माण चल रहा है वहां धूल से बचने के लिए नियमित रूप से पानी का छिड़काव करने के निर्देश दिए गए हैं। तेज गर्मी के चलते पानी का असर देर तक नहीं रह पाता। फिर भी पूरी कोशिश होती है कि लोगों को किसी भी प्रकार की परेशानी निर्माण के चलते न हो सके।
एसवी सिंह
परियोजना अधिकारी एनएचएआई
लखनऊ-वाराणसी हाइवे को फोरलेन बनाने के लिए जगह जगह मिट्टी डालकर या सड़क की खुदाई कर छोड़ दिया गया है। हाईवे पर भारी वाहनों का दबाव है। जिससे दिन रात धूल और गुबार उड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी सड़क के किनारे वाले गांव के लोगों और दूकानदारों को हो रही है। सड़क पर बाइक से चलने वाले दैनिक यात्री भी इस समस्या से जूझ रहे हैं। कई कई किलोमीटर तक तेज धूल उडने के चलते लोगों की सांस पूलने लगती है। कुल्हनामऊ, लखौवा बाजार, बक्शा, उचौरा, लखनीपुर, चुरावनपुर, गोरियापुर, ब्राह्मणपुर बरखंडी, मोहम्दपुर, टिकरी समेत जिले की सीमा में हाइवे के किनारे वाले तकरीबन एक सौ गांव के लोग धूल और गुबार के चलते परेशान हैं। लखनीपुर गांव निवासी नंदलाल का कहना है कि घर अंदर के कमरों में भी रोज धूल जमा हो जाती है। सोते समय भी अधिकतर लोग मास्क लगाकर सोते हैं। सवंशा गांव के बब्लू कुमार कहते हैं कि उनका घर हाइवे से करीब तीन सौ मीटर दूरी पर है लेकिन घर के अंदर तक धूल पहुंचती है। सांस लेना भी दुश्वार हो गया है। लखौवा बाजार निवासी किराना व्यवसायी सुशील कुमार कहते हैं कि कभी कभी जब एक साथ कई बड़े वाहन गुजरते हैं तो धूल के चलते दम घुटने लगता है।
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नहीं होता पानी का छिड़काव
जौनपुर। पर्यावरण मंत्रालय के धूल नियंत्रण नियम के मुताबिक हाइवे निर्माण करने वाली एजेंसी की जिम्मेदारी है कि वह लोगों की सेहत का ध्यान रखे और नियमित रूप से पानी का छिड़काव करे, जिससे धूल गुबार से लोग सुरक्षित रह सकें। मगर इस नियम का भी पालन हाइवे निर्माण एजेंसी की ओर से नहीं किया जा रहा है।
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क्या कहते हैं डाक्टर
जौनपुर। हृदय रोग विशेषज्ञ डा. हरेंद्र देव सिंह का कहना है कि सड़क की गंदगी धूल गुबार के साथ हवा में फैलकर इंसान के शरीर में प्रवेश करती है। जिससे सांस दमा और फेफड़े में संक्रमण जैसी बीमारी हो रही है। जहरीली धूल से त्वचा और आंख में भी जलन की समस्या बढने का खतरा बना रहता है। इससे बचने के लिए मास्क लगाकर निकलना चाहिए।
जिन स्थानों पर फोरलेन का निर्माण चल रहा है वहां धूल से बचने के लिए नियमित रूप से पानी का छिड़काव करने के निर्देश दिए गए हैं। तेज गर्मी के चलते पानी का असर देर तक नहीं रह पाता। फिर भी पूरी कोशिश होती है कि लोगों को किसी भी प्रकार की परेशानी निर्माण के चलते न हो सके।
एसवी सिंह
परियोजना अधिकारी एनएचएआई