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कृष्ण का नृत्य देख थिरक उठे दर्शक
Updated Sun, 25 Nov 2018 11:43 PM IST
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सतहरिया। महाराष्ट्र के आचार्य पंडित मनोज पांडेय ने कहा कि राम के बिना मानव जीवन का कोई मतलब नहीं है। जिसके जीवन में परमपिता परमेश्वर श्रीराम के प्रति आस्था व समर्पण भाव नहीं है। जिसके हृदय में राम हो वहीं अयोध्या व मथुरा है। उन्होंने कहा कि आज के परिवेश में संस्कार को भुला देने से युवा पीढ़ी कुपथ पर चलने लगा है।
मुंगराबादशाहपुर के मोहल्ला कटरा में बलिभद्र पैलेस में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन कथा प्रवचन कर रहे थे। कहा कि इसका महत्व यह रहा कि ऋषि गर्गाचार्य ने नंदबाबा के यहां जाकर प्रभु श्रीकृष्ण तथा बलराम का नामकरण संस्कार कराया। आचार्य ने श्री कृष्ण के वात्सल्य लीला का सजीवता से वर्णन किया। कहा कि जीवात्मा और परमात्मा का माया रहित मिलन ही रास है। परम तत्व ब्रह्म किसी को मारने नहीं बल्कि उसका उद्धार व बुराइयों को दमन करने के लिए अवतार लेते हैं। भगवान कृष्ण ने कालिया नाग को मारा नहीं अपितु उसकी बुराइयों का दमन किया। इंद्र के अहंकार को नष्ट करने के लिए भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पूजा शुरू कराया था। गोपियों के साथ भगवान कृष्ण का नृत्य देखकर कथा प्रेमी झूम उठे। उनके पैर थिरकने से समूचा पैलेस कृष्ण मय हो गया। संचालन पं. जयदीप शास्त्री तथा ओम प्रकाश टैगोर ने किया। मुख्य यजमान राजेंद्र तिवारी, कामता, हौसला प्रसाद, संतोष, राजेश, आशीष दीपक, राकेश आदि रहे।
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मुंगराबादशाहपुर के मोहल्ला कटरा में बलिभद्र पैलेस में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन कथा प्रवचन कर रहे थे। कहा कि इसका महत्व यह रहा कि ऋषि गर्गाचार्य ने नंदबाबा के यहां जाकर प्रभु श्रीकृष्ण तथा बलराम का नामकरण संस्कार कराया। आचार्य ने श्री कृष्ण के वात्सल्य लीला का सजीवता से वर्णन किया। कहा कि जीवात्मा और परमात्मा का माया रहित मिलन ही रास है। परम तत्व ब्रह्म किसी को मारने नहीं बल्कि उसका उद्धार व बुराइयों को दमन करने के लिए अवतार लेते हैं। भगवान कृष्ण ने कालिया नाग को मारा नहीं अपितु उसकी बुराइयों का दमन किया। इंद्र के अहंकार को नष्ट करने के लिए भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पूजा शुरू कराया था। गोपियों के साथ भगवान कृष्ण का नृत्य देखकर कथा प्रेमी झूम उठे। उनके पैर थिरकने से समूचा पैलेस कृष्ण मय हो गया। संचालन पं. जयदीप शास्त्री तथा ओम प्रकाश टैगोर ने किया। मुख्य यजमान राजेंद्र तिवारी, कामता, हौसला प्रसाद, संतोष, राजेश, आशीष दीपक, राकेश आदि रहे।
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