{"_id":"5bc77da0bdec2269377f69c0","slug":"153980044813-jaunpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"किशोर न्याय अधिनियम के बारे में दी जानकारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किशोर न्याय अधिनियम के बारे में दी जानकारी
Updated Wed, 17 Oct 2018 11:59 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जौनपुर । जिले में आश्रय गृह ही नहीं है। ऐसे में किशोरी या किशोर के मिलने पर उन्हें रखना संभव नहीं होता है। जिला बाल संरक्षण इकाई व महिला कल्याण विभाग द्वारा बुधवार को कलेक्ट्रेट प्रेक्षागृह में किशोर न्याय (बालको का देख-रेख संरक्षण) अधिनियम एवं समेकित बाल संरक्षण योजना पर कार्यशाला में यह बात सामने आई।
पुलिस अधीक्षक दिनेश पाल सिंह ने जिले में कोई भी आश्रयगृह नहीं है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव ने किशोर को परिभाषित किया और उनके अधिकारों की जानकारी दी। जिलाधिकारी अरविंद मलप्पा बंगारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में अमित मल्होत्रा, कार्यक्रम प्रबंधक एवं कार्यालय प्रमुख यूनिसेफ लखनऊ एवं मोहम्मद आफताब आलम, बाल संरक्षण विशेषज्ञ, यूनिसेफ लखनऊ ने बाल संरक्षण समिति के सदस्यों (खंड विकास अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी, प्रभारी चिकित्साधिकारी, बाल विकास परियोजना अधिकारी, सहायक विकास अधिकारी, समस्त थानों के बाल कल्याण अधिकारी को प्रशिक्षण दिया।
विज्ञापन
पुलिस अधीक्षक दिनेश पाल सिंह ने जिले में कोई भी आश्रयगृह नहीं है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव ने किशोर को परिभाषित किया और उनके अधिकारों की जानकारी दी। जिलाधिकारी अरविंद मलप्पा बंगारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में अमित मल्होत्रा, कार्यक्रम प्रबंधक एवं कार्यालय प्रमुख यूनिसेफ लखनऊ एवं मोहम्मद आफताब आलम, बाल संरक्षण विशेषज्ञ, यूनिसेफ लखनऊ ने बाल संरक्षण समिति के सदस्यों (खंड विकास अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी, प्रभारी चिकित्साधिकारी, बाल विकास परियोजना अधिकारी, सहायक विकास अधिकारी, समस्त थानों के बाल कल्याण अधिकारी को प्रशिक्षण दिया।
विज्ञापन