{"_id":"5b9c001a867a557ea37f56b8","slug":"153695028113-jaunpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"तत्कालीन एसओ पर प्राथमिकी दर्ज न करने पर अल्टीमेटम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तत्कालीन एसओ पर प्राथमिकी दर्ज न करने पर अल्टीमेटम
Updated Sat, 15 Sep 2018 01:20 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
जौनपुर। तत्कालीन थानाध्यक्ष बक्सा शिवशंकर सिंह समेत नौ आरोपियों के खिलाफ दलित उत्पीड़न की प्राथमिकी दर्ज न करने पर थानाध्यक्ष बक्सा को सात दिन कारावास का अल्टीमेटम अपर सत्र न्यायाधीश ने दिया। 24 सितंबर को थानाध्यक्ष पर आदेश की अवहेलना में दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी।
वादी सभाजीत निवासी भटपुरा बक्सा की दरखास्त पर कोर्ट ने 13 अगस्त 18 को तत्कालीन थानाध्यक्ष बक्सा शिवशंकर सिंह व एसआई रामबालक समेत नौ आरोपियों के खिलाफ दलित उत्पीड़न व चोरी की प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था। आदेश के बावजूद प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। वादी सभाजीत ने कोर्ट में धारा 156 (3) के तहत प्रार्थना पत्र दिया था कि तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा राजस्व कर्मियों की सहायता से वादी के आराजी नंबर 49 का सीमांकन कराकर अलग कराया गया था। जिस पर वादी खेती करता है। मामला हाई कोर्ट तक गया था। वहां अवमानना प्रार्थना पत्र पर जिलाधिकारी ने की गई कार्यवाही से हाईकोर्ट को अवगत कराया था। सात अप्रैल 18 को तत्कालीन थानाध्यक्ष शिवशंकर, दरोगा रामबालक की शह पर विपक्षी उसकी बोई हुई हरी अरहर जबरन काटने लगे। विरोध पर मां बहन की गाली देते हुए जा सूचक शब्दों से अपमानित किए। वादी व उसकी पत्नी को लात मुक्के से मारकर चोटे पहुंचाए। वादी घटना की सूचना देने थाना बक्सा गया तो थानाध्यक्ष शिव शंकर व दरोगा रामबालक व अन्य पुलिसकर्मियों ने उसे गालियां व जातिसूचक शब्दों से अपमानित करते हुए लाठियों से पीटा। उसकी 50,000/- की फसल का अभियुक्तों ने नुकसान कर दिया। आधी अरहर आरोपी उठा ले गए। उच्चाधिकारियों के आदेश पर उसे व उसके पुत्र को छोड़ा गया। पुलिस अधीक्षक को दरखास्त के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया गंभीर मामला पाते हुए 14 अगस्त 18 को प्राथमिकी दर्ज करने का थाना प्रभारी बक्सा को आदेश दिया था लेकिन कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया गया।
वादी सभाजीत निवासी भटपुरा बक्सा की दरखास्त पर कोर्ट ने 13 अगस्त 18 को तत्कालीन थानाध्यक्ष बक्सा शिवशंकर सिंह व एसआई रामबालक समेत नौ आरोपियों के खिलाफ दलित उत्पीड़न व चोरी की प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था। आदेश के बावजूद प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। वादी सभाजीत ने कोर्ट में धारा 156 (3) के तहत प्रार्थना पत्र दिया था कि तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा राजस्व कर्मियों की सहायता से वादी के आराजी नंबर 49 का सीमांकन कराकर अलग कराया गया था। जिस पर वादी खेती करता है। मामला हाई कोर्ट तक गया था। वहां अवमानना प्रार्थना पत्र पर जिलाधिकारी ने की गई कार्यवाही से हाईकोर्ट को अवगत कराया था। सात अप्रैल 18 को तत्कालीन थानाध्यक्ष शिवशंकर, दरोगा रामबालक की शह पर विपक्षी उसकी बोई हुई हरी अरहर जबरन काटने लगे। विरोध पर मां बहन की गाली देते हुए जा सूचक शब्दों से अपमानित किए। वादी व उसकी पत्नी को लात मुक्के से मारकर चोटे पहुंचाए। वादी घटना की सूचना देने थाना बक्सा गया तो थानाध्यक्ष शिव शंकर व दरोगा रामबालक व अन्य पुलिसकर्मियों ने उसे गालियां व जातिसूचक शब्दों से अपमानित करते हुए लाठियों से पीटा। उसकी 50,000/- की फसल का अभियुक्तों ने नुकसान कर दिया। आधी अरहर आरोपी उठा ले गए। उच्चाधिकारियों के आदेश पर उसे व उसके पुत्र को छोड़ा गया। पुलिस अधीक्षक को दरखास्त के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया गंभीर मामला पाते हुए 14 अगस्त 18 को प्राथमिकी दर्ज करने का थाना प्रभारी बक्सा को आदेश दिया था लेकिन कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया गया।
विज्ञापन