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धूमधाम से मना सैय्यद मलिक जदा का उर्स
Updated Sat, 08 Sep 2018 12:32 AM IST
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बक्शा। थाना परिसर में स्थित सैय्यद मलिक जदा का उर्स गुरुवार की रात पूरे अकीदत के साथ मनाया गया। परंपरा के अनुसार थानाध्यक्ष अरविन्द कुमार यादव ने सर्व प्रथम चादर चढ़ाकर मन्नतें मांगी। देर रात तक मजार पर आने वाले श्रद्धालुओं द्वारा चादरपोशी व दर्शन किया जा रहा था।
1881 में स्थापित हुई बाबा की मजार आज भी सभी धर्मों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। बताते है कि बाबा सैय्यद मलिक जदा पांच भाइयों में सबसे बड़े थे। जिनमें से दो सगे भाइयों की मजार थाना परिसर में ही अगल-बगल मौजूद है। थानाध्यक्ष की ताजपोशी के बाद बक्शा, लखनीपुर, बेलापार, भकड़ी, रन्नो सहित अन्य गांवों के सैकड़ो लोगों ने बाबा की मजार पर चादर चढ़ाकर मन्नतें मांगी। रात भर मुरादे मांगने वालों का तांता लगा रहा। थाना परिसर में मेला भी लगा रहा। लोगों ने मेले का भी खूब लुफ्त उठाया। इस दौरान देर रात्रि कौव्वाली का आयोजन किया गया।मान्यता है कि अग्रेजों के शासनकाल में जब बक्शा थाने का निर्माण शुरू हुआ तो दिन में जितनी दीवारें बनाई जाती थी। रात में स्वत: ध्वस्त हो जाया करती थी। यह क्रम कई दिनों तक चलता रहा। उसी दौरान एक दिन तत्कालीन थानाध्यक्ष ने रात्रि में स्वप्न देखा कि थाने के उत्तरी कोने में बाबा की मजार है। फिर पहले सभी कार्य रोककर बाबा की मजार पक्की कराई गई। इसके बाद निर्माण कार्य आगे बढ़ सका। मजार के दक्षिण मालखाना व दफ्तर आज भी विद्यमान है। थाना परिसर में आने वाले हर पुलिस अधिकारी पहले बाबा का दर्शन करते हैं। इससे लोगो के साथ पुलिस कर्मियों की गहरी आस्था जुड़ी है। आज भी पुलिस छोटे-मोटे झगड़े बाबा की मजार पर कसम खिलाकर निपटा देते हैं। देर रात्रि भाजपा जिलाध्यक्ष सुशील कुमार उपाध्याय, राजमणि सिंह, शैलेन्द्र अवनीश सुनील सिंह सहित दर्जनों लोगों ने शिरकत किया।
1881 में स्थापित हुई बाबा की मजार आज भी सभी धर्मों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। बताते है कि बाबा सैय्यद मलिक जदा पांच भाइयों में सबसे बड़े थे। जिनमें से दो सगे भाइयों की मजार थाना परिसर में ही अगल-बगल मौजूद है। थानाध्यक्ष की ताजपोशी के बाद बक्शा, लखनीपुर, बेलापार, भकड़ी, रन्नो सहित अन्य गांवों के सैकड़ो लोगों ने बाबा की मजार पर चादर चढ़ाकर मन्नतें मांगी। रात भर मुरादे मांगने वालों का तांता लगा रहा। थाना परिसर में मेला भी लगा रहा। लोगों ने मेले का भी खूब लुफ्त उठाया। इस दौरान देर रात्रि कौव्वाली का आयोजन किया गया।मान्यता है कि अग्रेजों के शासनकाल में जब बक्शा थाने का निर्माण शुरू हुआ तो दिन में जितनी दीवारें बनाई जाती थी। रात में स्वत: ध्वस्त हो जाया करती थी। यह क्रम कई दिनों तक चलता रहा। उसी दौरान एक दिन तत्कालीन थानाध्यक्ष ने रात्रि में स्वप्न देखा कि थाने के उत्तरी कोने में बाबा की मजार है। फिर पहले सभी कार्य रोककर बाबा की मजार पक्की कराई गई। इसके बाद निर्माण कार्य आगे बढ़ सका। मजार के दक्षिण मालखाना व दफ्तर आज भी विद्यमान है। थाना परिसर में आने वाले हर पुलिस अधिकारी पहले बाबा का दर्शन करते हैं। इससे लोगो के साथ पुलिस कर्मियों की गहरी आस्था जुड़ी है। आज भी पुलिस छोटे-मोटे झगड़े बाबा की मजार पर कसम खिलाकर निपटा देते हैं। देर रात्रि भाजपा जिलाध्यक्ष सुशील कुमार उपाध्याय, राजमणि सिंह, शैलेन्द्र अवनीश सुनील सिंह सहित दर्जनों लोगों ने शिरकत किया।
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