{"_id":"5b898a9c42c7924676417df9","slug":"15357405598-jaunpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नहीं हुई शादी, बिना दुल्हन के ही लौट गए दूल्हे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नहीं हुई शादी, बिना दुल्हन के ही लौट गए दूल्हे
Updated Sat, 01 Sep 2018 12:45 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
सिरकोनी। क्षेत्र के कजगांव टेढ़वा का ऐतिहासिक कजरी मेला शुक्रवार को पारंपरिक ढंग से संपन्न हुआ। शुक्रवार को एक बार बिना दुल्हन लिए ही बारात वापस लौट गई। पोखरे के दोनों किनारे पर हाथी, घ़ोडे से आए दुल्हों को देखने के लिए भीड़ उमड़ी। मेले में लोगों ने जमकर खरीजदारी की। सुरक्षा को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस तैनात रही। देर रात तक मेले में भीड़ लगी रही।
कजगांव टेढवा का कजरी मेला करीब 158 वर्ष का इतिहास संजोए हुए है। सिरकोनी क्षेत्र के राजेपुर प्रथम स्थित पोखरे पर पूर्वी छोर पर राजेपुर की तरफ से दुल्हे लादेन व पन्नालाल और पश्चिम छोर पर कजगांव की तरफ से दुल्हा गुड्डू शर्मा, रईस, करिया बारात लेकर शुक्रवार को राजेपुर व कजगांव के बारातियों के साथ हाथी, घोड़ा, ऊंट पर सवार होकर दुल्हन लेने पहुंचे थे। राजेपुर के आखरी छोर पर स्थित पोखरे के दोनों किनारे बारात सजी थी। हर बार की तरह परंपरा के अनुसार दोनों पक्ष के लोग एक दूसरे को गाली गलोच देकर शादी के लिए ललकारते रहे। लेकिन इस वर्ष भी दुल्लू के हाथ निराशा लगी और बगैर दुल्हन लिए ही बारात वापस लौट गई। कजगांव के ऐतिहासिक कजरी मेला में परंपरागत सदियों से चली आ रही है। यहां लगने वाले मेले की प्राचीनता एवं पौराणिकता का कोई लिखित इतिहास नहीं है। कजरी मेले के दिन महिलाएं उसी ढंग से बारात विदा करती हैं जैसे वास्तविक शादी विवाह के विदाई होती है। यह मेला पूरी तरह से आपसी सौहार्द से भरा रहा। दोनों तरफ के दुल्हे इस वर्ष भी शादी न करने में असफल रहे और अगले वर्ष शादी होने की आस लगाएं बारातियों व घरातियों के साथ वापस लौट गए। सुरक्षा की व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन पहले से ही चौकन्ना रहा। पुलिस पीएसी के जवान पूरे मेले का चक्रमण करती रही। थाना अध्यक्ष जफराबाद भी फोर्स के साथ मेले की सुरक्षा व्यवस्था में लगे रहे।
कजगांव टेढवा का कजरी मेला करीब 158 वर्ष का इतिहास संजोए हुए है। सिरकोनी क्षेत्र के राजेपुर प्रथम स्थित पोखरे पर पूर्वी छोर पर राजेपुर की तरफ से दुल्हे लादेन व पन्नालाल और पश्चिम छोर पर कजगांव की तरफ से दुल्हा गुड्डू शर्मा, रईस, करिया बारात लेकर शुक्रवार को राजेपुर व कजगांव के बारातियों के साथ हाथी, घोड़ा, ऊंट पर सवार होकर दुल्हन लेने पहुंचे थे। राजेपुर के आखरी छोर पर स्थित पोखरे के दोनों किनारे बारात सजी थी। हर बार की तरह परंपरा के अनुसार दोनों पक्ष के लोग एक दूसरे को गाली गलोच देकर शादी के लिए ललकारते रहे। लेकिन इस वर्ष भी दुल्लू के हाथ निराशा लगी और बगैर दुल्हन लिए ही बारात वापस लौट गई। कजगांव के ऐतिहासिक कजरी मेला में परंपरागत सदियों से चली आ रही है। यहां लगने वाले मेले की प्राचीनता एवं पौराणिकता का कोई लिखित इतिहास नहीं है। कजरी मेले के दिन महिलाएं उसी ढंग से बारात विदा करती हैं जैसे वास्तविक शादी विवाह के विदाई होती है। यह मेला पूरी तरह से आपसी सौहार्द से भरा रहा। दोनों तरफ के दुल्हे इस वर्ष भी शादी न करने में असफल रहे और अगले वर्ष शादी होने की आस लगाएं बारातियों व घरातियों के साथ वापस लौट गए। सुरक्षा की व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन पहले से ही चौकन्ना रहा। पुलिस पीएसी के जवान पूरे मेले का चक्रमण करती रही। थाना अध्यक्ष जफराबाद भी फोर्स के साथ मेले की सुरक्षा व्यवस्था में लगे रहे।
विज्ञापन