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खुदाई में मिला नर कंकाल अंधविश्वास में पूजा शुरू
Updated Thu, 02 Aug 2018 11:56 PM IST
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थानागद्दी। केराकत कोतवाली के पहाड़ी पट्टी गांव में टुसौरी मोड़ के पास स्थित तालाब के पश्चिमी किनारे पर खुदाई के दौरान गुरुवार की सुबह नरकंकाल मिला। मौके पर आसपास के गांव से भीड़ जुटने लगी।
मालूम हो कि पहाड़ीपट्टी पोखरे के पश्चिमी छोर की तरफ से गैस पाइप लाइन बिछाने के लिए गड्ढे खोदे जा रहे हैं। गुरुवार की सुबह एक युवक उधर शौच के लिए गया। खुदाई किए गड्ढे में उसने नर कंकाल देखा तो डर गया। इसकी जानकारी उसने गांववालों को दी। नर कंकाल पाए जाने की भनक लगते ही पोखरे पर सैकड़ों लोग इकट्ठा हो गए। बेचन दफाली के परिजनों ने सैय्यद बाबा की मजार का हवाला दिया तो कुछ लोग अगरबत्ती चढ़ाकर मिन्नतें करने लगे। ग्रामीणों का कहना है कि सैकड़ों साल पहले यहां कब्रिस्तान था किंतु मौजूदा समय के कब्रिस्तान पोखरे से लगभग डेढ़ किमी दूर है। ग्रामीण सैकड़ों वर्ष पहले का कब्रिस्तान बता रहे हैं। बहरहाल, मौके पर पहुंची पुलिस बुजुर्गों से इस जमीन का इतिहास खंगालने में जुटी है। बुजुर्गों की माने तो सैकड़ों वर्ष पूर्व यहां कोई सूफी रहता था। बाद में सैय्यद बाबा के नाम से यह स्थान जाना जाने लगा था लेकिन यहां पहले कोई मजार नहीं थी। 10 वर्ष पहले कुछ लोगों ने मजार बनाने की इच्छा जाहिर की किन्तु सूफी के असल स्थान को लेकर भ्रम में थे। यही के एक मंदिर के साधु ने नर कंकाल पाए जाने के स्थान से लगभग 30 मीटर दूरी पर सैय्यद बाबा की मजार बनाने की सलाह दी थी। अब नर कंकाल मिलने से ग्रामीण गफलत में पड़ गए है कि कहीं सैय्यद बाबा की असल मजार यही तो नहीं थी। मई के कमलेश सिंह और टुसौरी के जितेंद्र सिंह बताते हैं कि इस जमीन पर दावा करने वाले भी यहां बसने से कतराते हैं।
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मालूम हो कि पहाड़ीपट्टी पोखरे के पश्चिमी छोर की तरफ से गैस पाइप लाइन बिछाने के लिए गड्ढे खोदे जा रहे हैं। गुरुवार की सुबह एक युवक उधर शौच के लिए गया। खुदाई किए गड्ढे में उसने नर कंकाल देखा तो डर गया। इसकी जानकारी उसने गांववालों को दी। नर कंकाल पाए जाने की भनक लगते ही पोखरे पर सैकड़ों लोग इकट्ठा हो गए। बेचन दफाली के परिजनों ने सैय्यद बाबा की मजार का हवाला दिया तो कुछ लोग अगरबत्ती चढ़ाकर मिन्नतें करने लगे। ग्रामीणों का कहना है कि सैकड़ों साल पहले यहां कब्रिस्तान था किंतु मौजूदा समय के कब्रिस्तान पोखरे से लगभग डेढ़ किमी दूर है। ग्रामीण सैकड़ों वर्ष पहले का कब्रिस्तान बता रहे हैं। बहरहाल, मौके पर पहुंची पुलिस बुजुर्गों से इस जमीन का इतिहास खंगालने में जुटी है। बुजुर्गों की माने तो सैकड़ों वर्ष पूर्व यहां कोई सूफी रहता था। बाद में सैय्यद बाबा के नाम से यह स्थान जाना जाने लगा था लेकिन यहां पहले कोई मजार नहीं थी। 10 वर्ष पहले कुछ लोगों ने मजार बनाने की इच्छा जाहिर की किन्तु सूफी के असल स्थान को लेकर भ्रम में थे। यही के एक मंदिर के साधु ने नर कंकाल पाए जाने के स्थान से लगभग 30 मीटर दूरी पर सैय्यद बाबा की मजार बनाने की सलाह दी थी। अब नर कंकाल मिलने से ग्रामीण गफलत में पड़ गए है कि कहीं सैय्यद बाबा की असल मजार यही तो नहीं थी। मई के कमलेश सिंह और टुसौरी के जितेंद्र सिंह बताते हैं कि इस जमीन पर दावा करने वाले भी यहां बसने से कतराते हैं।
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